NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 18 संघर्ष के कारण मैं तुनुकमिज़ाज हो गया : धनराज (विनीता पांडेय)

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Board CBSE
Textbook NCERT
Class Class 7
Subject Hindi Vasant
Chapter Chapter 18
Chapter Name संघर्ष के कारण मैं तुनुकमिज़ाज हो गया : धनराज (विनीता पांडेय)
Number of Questions Solved 11
Category NCERT Solutions

NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 18 संघर्ष के कारण मैं तुनुकमिज़ाज हो गया : धनराज (विनीता पांडेय)

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास
(पृष्ठ 133-34)

साक्षात्कार से

प्रश्न 1.
साक्षात्कार पढ़कर आपके मन में धनराज पिल्लै की कैसी छवि उभरती है? वर्णन कीजिए।
उत्तर-
साक्षात्कार पढ़कर हमारे मन में धनराज पिल्लै की छवि उभरती है कि वे गरीबी में पल-बढ़े एक स्वाभिमानी व्यक्ति हैं। वे देखने में बहुत सुंदर नहीं हैं। हॉकी खेल में इतनी प्रसिद्धि प्राप्त करने का जरा भी उनमें अभिमान नहीं है। आम लोगों की भाँति लोकन ट्रेनों में सफ़र करने में भी कतरफ्तें नहीं हैं। उन्होंने जमीन से उठकर आसमान तक पहुँचने का सफ़र तय किया है। एक अभावग्रस्त बचपन जीने वाला यह व्यक्ति आज नामी खिलाड़ी है। फिर भी विशेष लोगों से मिलकर बहुत प्रसन्नता का अनुभव करते हैं। वह स्वयं को बहुत असुरक्षित अनुभव करते हैं, अतः उनके स्वभाव में तुनुकमिज़ाजी आ गई है। वह अपनी माँ तथा भाभी का बहुत सम्मान करते हैं। वह मेहनती हैं, जुझारू हैं। आज भी आम इनसान की तरह साधारण जीवन जीने में उसे आज भी कोई संकोच नहीं होता है। उनका हॉकी से गहरा लगाव है। उन्हें पता है कि हॉकी से ही उन्हें यह सम्मान और प्यार मिला है। वह एक दयालु, सरल, एवं भावुक व्यक्ति हैं।

प्रश्न 2.
धनराज पिल्लै ने जमीन से उठकर आसमान का सितारा बनने तक की यात्रा तय की है। लगभग सौ शब्दों में इस सफ़र का वर्णन कीजिए। [Imp.]
उत्तर
यह कहना अनुचित नहीं कि धनराज पिल्लै ने ज़मीन से उठकर आसमान का सितारा बनने का सफर तय किया है क्योंकि वे बहुत ही साधारण परिवार से थे उनका बचपन बहुत मुश्किलों भरा था। एक हॉकी स्टिक खरीदने की भी उनकी हैसियत नहीं थी। लेकिन उनकी चाह, मेहनत व लगन ने उन्हें जीवन की सब मुश्किलों का सामना करने की शक्ति दी और इस खिलाड़ी ने विश्व-स्तरीय ख्याति प्राप्त करके ही दम लिया। 1985 में वे जूनियर हॉकी टीम में चुने गए। 1986 में उन्हें सीनियर टीम में डाल दिया गया। 1989 में ऑलविन एशिया कप के मैच में चुने जाने के बाद इन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा निरंतर सफलता की ओर ही बढ़ते रहे हैं।

प्रश्न 3.
‘मेरी माँ ने मुझे अपनी प्रसिद्धि को विनम्रता से सँभालने की सीख दी है’ – धनराज पिल्लै की इस बात का क्या अर्थ है?
उत्तर-
धनराज पिल्लै की इस बात का यह अर्थ है कि उनकी माँ उन्हें विनम्र बने रहने के संस्कार दिए हैं। प्रायः लोग अपनी ख्याति में पगला जाते हैं और इसे सहज भाव में स्वीकार नहीं कर पाते। धनराज के व्यक्तित्व के निर्माण में उनकी माँ का बहुत योगदान है तथा माँ ने उन्हें विनम्रता का संस्कार दिया है। इसका तात्पर्य यह है कि मनुष्य चाहे कितनी भी सफलता पा ले, उसे कभी अहंकार नहीं करना चाहिए और किसी को अपने से छोटा नहीं समझना चाहिए। धनराज ने अपनी माँ की दी हुई सीख को जीवन में उतारा है।।

साक्षात्कार से आगे

प्रश्न 1.
ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर कहा जाता है। क्यों? पता लगाइए।
उत्तर-
ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर कहा जाता है क्योंकि जैसे जादूगर अपनी दाँव-पेंच से हमारी ही आँखों के सामने न जाने क्या-क्या करतब दिखाते हैं और हम दाँतों तले उँगलियाँ दबा लेते हैं। वैसे ही ध्यानचंद भी हॉकी खेलने में माहिर है। कोई भी ऐसा दाव पेंच नहीं जो उन्हें न आता हो। कोई भी उन्हें हॉकी में पराजित नहीं कर सकता। यही कारण था कि उन्हें हॉकी का जादूगर कहा जाता है।

प्रश्न 2.
किन विशेषताओं के कारण हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल माना जाता है?
उत्तर
भारत में हॉकी सबसे पुराना खेल है। इसे राजा-महाराजाओं से लेकर देहात के लोग भी चाव से खेला करते थे। इस खेल में भारतीयों की रुचि कभी कम नहीं हुई। न ही इस खेल को खेलने हेतु अधिक पैसों की आवश्यकता पड़ती है। पुराने जमाने में तो पेड़ों की टहनियों द्वारा ही इस खेल को खेला जाता था। यह खेल वर्षों से निरंतर आगे ही बढ़ता रहा है और अपना लंबा इतिहास रखता है। इसलिए इसे राष्ट्रीय खेल माना जाता है।

प्रश्न 3.
आप समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं में छपे हुए साक्षात्कार पढ़े और अपनी रुचि से किसी व्यक्ति को चुनें, उसके बारे में जानकारी प्राप्त कर कुछ प्रश्न तैयार करें और साक्षात्कार लें।
उत्तर
छात्र स्वयं करें।

अनुमान और कल्पना

प्रश्न 1.
‘यह कोई जरूरी नहीं कि शोहरत पैसा भी साथ लेकर आए’-क्या आप धनराज पिल्लै की इस बात से सहमत हैं? अपने अनुभव और बड़ों से बातचीत के आधार पर लिखिए।
उत्तर
धनराज पिल्लै का यह कहना कि यह कोई जरूरी नहीं कि शोहरत पैसा भी साथ लेकर आए, सही है। क्योंकि धनराज को स्वयं जितनी शोहरत मिली उतना पैसा प्राप्त नहीं हुआ। वे भी काफी समय तक आम लोगों की भाँति लोकल ट्रेनों में सफर करते रहे जिसे लोग भी देखकर हैरान होते थे।
अपने अनुभव के आधार पर भी, इस बात को हम सत्य मान सकते हैं। कवि या साहित्यकार अपनी लेखनी से समाज को परिवर्तित करने की क्षमता रखते हैं लोग भी उन्हें अत्यधिक आदर-सत्कार देते हैं। कविता सुनाकर सिवाय वाह-वाही के उन्हें कुछ नहीं मिलता। आर्थिक परेशानियों से जूझने हेतु उन्हें अन्य व्यवसाय करना पड़ता है। उदाहरणस्वरूप हम साहित्यकार प्रेमचंद’ को ही ले सकते हैं, जिनकी रचनाएँ तो आज तक सराहनीय हैं लेकिन जीवन भर वे गरीबी का जीवन जीते रहे।

प्रश्न 2.
(क)अपनी गलतियों के लिए माफी माँगना आसान होता है या मुश्किल?
(ख)क्या आप और आपके आसपास के लोग अपनी गलतियों के लिए माफी माँग लेते हैं?
(ग)माफ़ी माँगना मुश्किल होता है या माफ़ करना? अपने अनुभव के आधार पर लिखिए।
उत्तर

  1. अपनी गलतियों के लिए माफी माँगना बहुत मुश्किल होता है क्योंकि हमें दूसरे के सामने अपने स्वाभिमान को झुकाना पड़ता है।
  2. नहीं! सभी लोग जल्दी ही किसी से माफ़ी नहीं माँग सकते।
  3. माफ़ करने से माफ़ी माँगना ज्यादा मुश्किल होता है क्योंकि माफ़ी माँगने का अर्थ लिया जाता है ‘झुकना’ अर्थात् माफ़ी माँगने के लिए एक बार तो झुककर अपने स्वाभिमान को झुकाना पड़ता है। लेकिन यह भी सत्य है कि यदि हम किसी से माफ़ी माँगते हैं और वह हमें दिल से माफ़ कर दे तो आपसी संबंध प्रगाढ़ हो जाते हैं। यह भी सत्य है कि किसी के गलती करने के पश्चात् माफी माँगने पर दिल से माफ़ करना आसान नहीं होता। ऐसा होना भी सही है क्योंकि हम किसी भी बात को जल्दी से भुला नहीं सकते।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
नीचे कुछ शब्द लिखे हैं जिनमें अलग-अलग प्रत्ययों के कारण बारीक अंतर है। इस अंतर को समझाने के लिए इन शब्दों का वाक्य में प्रयोग कीजिए-
प्रेरणा           प्रेरक            प्रेरित
संभव           संभावित        संभवतः
उत्साह         उत्साहित     उत्साहवर्धक
उत्तर
(क)प्रेरणा  –  हमें गांधीजी के विचारों से प्रेरणा लेनी चाहिए।
प्रेरक  –  गांधीजी अहिंसा और सत्य के प्रेरक बने।
प्रेरित  –  गांधीजी के विचारों से प्रेरित होकर लोगों ने स्वदेशी अपनाया।
(ख)संभव     –  सफलता प्राप्त करने हेतु हर संभव प्रयत्न करना चाहिए।
संभावित – संभावित रूप से कहा जाता है कि आज रात को वर्षा होगी।
संभवतः  – संभवतः पिताजी मथुरा से चल चुके होंगे।
(ग)उत्साह     – मैंने उत्साह से वार्षिकोत्सव में भाग लिया।
उत्साहित  – प्रधानाचार्य ने अपने विचारों से विद्यार्थियों को उत्साहित किया कि वे भाषण प्रतियोगिता में भाग लें।
उत्साहवर्धक   – प्रधानमंत्री का संदेश खिलाड़ियों के लिए उत्साहवर्धक था।

प्रश्न 2.
तुनुकमिज़ाज शब्द तुनुक और मिज़ाज दो शब्दों के मिलने से बना है। क्षणिक, तनिक और तुनुक एक ही शब्द के भिन्न रूप हैं। इस प्रकार का रूपांतर दूसरे शब्दों में भी होता है, जैसे-बादल, बादर, बदरा, बदरिया; मयूर, मयूरा, मोर; दर्पण, दर्पन, दरपन। शब्दकोश की सहायता लेकर एक ही शब्द के दो या दो से अधिक रूपों को खोजिए। कम-से-कम चार शब्द और उनके अन्य रूप लिखिए।
उत्तर
भू,           भूमि,     धरा।
आग,       अग्नि,     ज्वाला।
देव,         देवता,    सुर।
मातृ,        माता,     माँ।

प्रश्न 3.
हर खेल के अपने नियम, खेलने के तौर-तरीके और अपनी शब्दावली होती है। जिस खेल में आपकी रुचि हो उससे संबंधित कुछ शब्दों को लिखिए; जैसे-फुटबाल के खेल से संबंधित शब्द है- गोल, बैंकिंग, पासिंग, बूट इत्यादि।
उत्तर-
क्रिकेट – बल्ला, बैर, गेंद, अंपायर, बॉलिंग, रन, छक्का, चौका, विकेट कीपर, फील्डिंग।
हॉकी – गोल कीपर, पेनल्टी सूट, हाफ लाइन, रैफरी।

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NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 12 कंचा (टी. पद्मनाभन)

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Class Class 7
Subject Hindi Vasant
Chapter Chapter 12
Chapter Name कंचा (टी. पद्मनाभन)
Number of Questions Solved 11
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NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 12 कंचा (टी. पद्मनाभन)

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास
(पृष्ठ 97-98)

कहानी से

प्रश्न 1.
कंचे जब जार से निकलकर अप्पू के मन की कल्पना में समा जाते हैं, तब क्या होता है?
उत्तर
कंचे जब जार से निकलकर अप्पू के मन की कल्पना में समा जाते हैं तो उसे लगता है कि जैसे कंचों का जार बड़ा होकर आसमान-सा बड़ा हो गया और वह उसके भीतर चला गया। वह अकेला ही कंचे चारों ओर बिखेरता हुआ मजे से खेल रहा था। हरी लकीर वाले सफ़ेद गोल कंचे उसके दिमाग में पूरी तरह छा गए। मास्टर जी कक्षा में ‘रेलगाड़ी’ का पाठ पढ़ा रहे थे लेकिन उसका ध्यान पढ़ाई में न था। वह तो केवल कंचों के बारे में सोच रहा था इसके लिए उसने मास्टर जी से डाँट भी खाई।

प्रश्न 2.
दुकानदार और ड्राइवर के सामने अप्पू की क्या स्थिति है? वे दोनों उसको देखकर पहले परेशान होते हैं, फिर हँसते हैं। कारण बताइए।
उत्तर-
दुकानदार व ड्राइवर के सामने अप्पू एक छोटा बालक है जो अपनी दुनिया में मस्त है। दुकानदार अप्पू से परेशान था, क्योंकि वह उसकी दुकान में खड़ा कंचों को देखे जा रहा था, लेकिन खरीद नहीं रहा। दुकानदार उसकी हरकतों से परेशान था क्योंकि उसे चिंता हुई कि उसका ज़ार गिराकर तोड़ न डालें। बाद में जब अप्पू ने कंचे खरीदे तो वह हँस पड़ता। ऐसे ही जब अप्पू के कंचे सड़क पर बिखर जाते हैं, तो तेज़ रफ्तार से आती कार का ड्राइवर यह देखकर परेशान हो जाता है। कि दुर्घटना की परवाह किए बिना सड़क पर कंचे बन रहा है लेकिन जैसे ही अप्पू उसे इशारा करके अपना कंचा दिखाता है तो वह उसकी बचपन की शरारत समझने लगता है और हँसने लगता है।

प्रश्न 3.
‘मास्टर जी की आवाज़ अब कम ऊँची थी। वे रेलगाड़ी के बारे में बता रहे थे।’ मास्टर जी की आवाज़ धीमी क्यों हो गई होगी? लिखिए।
उत्तर
जब मास्टर जी ने रेलगाड़ी पाठ पढ़ाना शुरू किया तो उनकी आवाज़ ऊँची थी क्योंकि वे सभी बच्चों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना चाहते थे ताकि वे ध्यानपूर्वक पाठ को सुन सकें। जब पाठ शुरू हो गया बच्चे एकाग्रचित्त होकर उनकी बातें सुनने लगे तो उनकी आवाज़ धीमी हो गई।

कहानी से आगे

प्रश्न 1.
कंचे, गिल्ली-डंडा, गेंदतड़ी (पिट्ठ) जैसे गली-मोहल्लों के कई खेल ऐसे हैं जो बच्चों में बहुत लोकप्रिय हैं। आपके इलाके में ऐसे कौन-कौन से खेल खेले जाते हैं? उनकी एक सूची बनाइए।
उत्तर
हमारे इलाके में क्रिकेट, बैडमिंटन, फुटबॉल, वालीबॉल, खो-खो आदि अधिक खेले जाते हैं।

प्रश्न 2.
किसी एक खेल को खेले जाने की विधि को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर-
क्रिकेट आज कल हमारे देश में सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। क्रिकेट का मैच दो टीमें खेलती हैं। दोनों टीमों में ग्यारह ग्यारह खिलाड़ी होते हैं। एक टीम बल्लेबाजी करती है और दूसरी टीम गेंदबाजी व क्षेत्ररक्षण। निर्णायक अंपायर कहलाते हैं, जिनका फैसला सर्वोपरि माना जाता है। एक दिवसीय मैच में 50 ओवरों का खेल होता है, जबकि ट्वेंटी-ट्वेंटी में बीस-बीस ओवरों का खेल होता है। इन मैचों के दौरान जो टीम सबसे ज्यादा रन निर्धारित ओवरों के अंतर्गत बनाती है। उसे विजयी टीम घोषित किया जाता है। एक ओवरों में सामान्यतः छह गेंदे फेंकी जाती हैं। इसके अलावा टेस्ट मैच पाँच दिवसीय होता है। इसमें पाँच दिनों में दोनों टीमें दो-दो पारी खेलती है और अगर दोनों टीमें दो पारियों में आऊट नहीं होती हैं तो वह मैच ड्रा घोषित किया जाता है। अगर कोई टीम दोनों पारियों में एक दूसरे को आऊट कर देते हैं, तो उसे विजयी घोषित किया जाता है। प्रत्येक टीम में ग्यारह खिलाड़ी होते हैं। इस प्रकार टीम के सभी खिलाड़ी अधिक से अधिक रन बनाने का प्रयास करते हैं।

अनुमान और कल्पना

प्रश्न 1.
जब मास्टर जी अप्पू से सवाल पूछते हैं तो वह कौन-सी दुनिया में खोया हुआ था? क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि आप किसी दिन क्लास में रहते हुए भी क्लास से गायब रहे हों? ऐसा क्यों हुआ और आप पर उस दिन क्या गुज़री? अपने अनुभव लिखिए।
उत्तर-
हाँ, एक दिन मेरे साथ भी ऐसा हुआ। उस दिन मेरी माँ काफ़ी बीमार थी। मुझे स्कूल जाना पड़ा था। मेरा मन घर पर ही लगा था। जब मास्टर जी पाठ पढ़ा रहे तो मेरा पढ़ने में मन नहीं लग रहा था और मेरा मन माँ की बीमारियों के बारे में सोच-सोचकर दूसरी दुनिया में खोया रहता था। मैं मास्टर जी के द्वारा पूछे गए किसी भी सवालों का सही जवाब नहीं दे पाया। मुझे उस दिन कक्षा में शर्मिंदा होना पड़ा।

प्रश्न 2.
आप कहानी को क्या शीर्षक देना चाहेंगे?
उत्तर
कंचों की दुनिया अथवा अप्पू और उसके कंचे।

प्रश्न 3.
गुल्ली-डंडा और क्रिकेट में कुछ समानता है और कुछ अंतर। बताइए, कौन सी समानताएँ हैं और क्या-क्या अंतर हैं?
उत्तर
गुल्ली-डंडे व क्रिकेट के खेल की समानताएँ व असमानताएँ निम्न रूप से हैं

समानताएँ-

  1. दोनों खेल सहयोग पर आधारित हैं।
  2. दोनों में ही दो-दो टीमें होती हैं।
  3. दोनों में जीत के लिए निश्चित चिह्न हैं। क्रिकेट में रन व गुल्ली-डंडे में डंडे नापे जाते हैं।
  4. दोनों में खेलने के साधन दो हैं-क्रिकेट में बल्ला और गेंद व गुल्ली-डंडे में गुल्ली और डंडा।
  5. दोनों खुली जगह पर खेले जाते हैं।

असमानताएँ-

  1. गुल्ली-डंडा दो या दो से अधिक खिलाड़ियों में लेकिन क्रिकेट पूरे ग्यारह खिलाड़ियों में खेला जाता है।
  2. क्रिकेट के निर्णायक अंपायर होते हैं जबकि गुल्ली-डंडे के निर्णायक स्वयं खिलाड़ी ही बन जाते हैं।
  3. क्रिकेट अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त खेल बन चुका है जबकि गुल्ली-डंडा केवल गाँवों-मोहल्लों तक सीमित है।
  4. गुल्ली और डंडा दोनों लकड़ी के होते हैं लेकिन क्रिकेट में बल्ला लकड़ी का और गेंद चमड़े/रबड़ की होती है।
  5. क्रिकेट निश्चित समय सीमा में खेला जाता है जबकि गुल्ली-डंडे के साथ ऐसी कोई पाबंदी नहीं है।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित मुहावरे किन भावों को प्रकट करते हैं? इन भावों से जुड़े दो-दो मुहावरे बताइए और उनका वाक्य में प्रयोग कीजिए।
• माँ ने दाँतों तले उँगली दबाई
• सारी कक्षा साँस रोके हुए उसी तरफ़ देख रही है।
उत्तर
NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 12 कंचा (टी. पद्मनाभन) 1

प्रश्न 2.
विशेषण कभी-कभी एक से अधिक शब्दों के भी होते हैं। नीचे लिखे वाक्यों में रेखांकित हिस्से क्रमशः रकम और
कंचे के बारे में बताते हैं, इसलिए वे विशेषण हैं।
पहले कभी किसी ने इतनी बड़ी रकम से कंचे नहीं खरीदे।
बढ़िया सफ़ेद गोल कंचे
• इसी प्रकार के कुछ विशेषण नीचे दिए गए हैं इनका प्रयोग कर वाक्य बनाएँ-
NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 12 कंचा (टी. पद्मनाभन) 2
उत्तर-
NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 12 कंचा (टी. पद्मनाभन) 3

कुछ करने को

• मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘ईदगाह’ खोजकर पढ़िए। ‘ईदगाह’ कहानी में हामिद चिमटा खरीदता है और ‘कंचा’ कहानी में अप्पू कंचे। इन दोनों बच्चों में से किसकी पसंद को आप महत्त्व देना चाहेंगे? हो सकता है, आपके कुछ साथी चिमटा खरीदनेवाले हामिद को पसंद करें और कुछ अप्पू को। अपनी कक्षा में इस विषय पर वाद-विवाद का आयोजन कीजिए।
उत्तर
‘ईदगाह’ कहानी में चिमटा हामिद अपनी दादी के लिए खरीदता है व कंचा कहानी में कंचे अप्पू अपना . मन बहलाने के लिए खरीदता है। इस आधार पर कक्षा में इस विषय पर वाद-विवाद कीजिए।

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NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 4 कठपुतली (भवानीप्रसाद मिश्र)

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Chapter Chapter 4
Chapter Name कठपुतली (भवानीप्रसाद मिश्र)
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NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 4 कठपुतली (भवानीप्रसाद मिश्र)

 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

                                                                        (पृष्ठ 20-21)

कविता से

प्रश्न 1.
कठपुतली को गुस्सा क्यों आया?
उत्तर
कठपुतली को सदा दूसरों के इशारों पर नाचने से दुख होता है। वह स्वतंत्र होना चाहती है। अंपने पाँवों पर खड़ी होकर आत्मनिर्भर बनना चाहती है। धागे में बँधना उसे पराधीनता लगता है इसीलिए उसे गुस्सा आता है।

प्रश्न 2.
कठपुतली को अपने पाँवों पर खड़ी होने की इच्छा है, लेकिन वह क्यों नहीं खड़ी होती?
उत्तर-
कठपुतली को अपने पाँवों पर खड़े होने की इच्छा तो है ही, लेकिन खड़ी नहीं होती। इसका कारण यह है कि वह धागों से बँधी हुई होती है। वह पराधीन है। उसका स्वयं पर कोई बस नहीं चलता। दूसरों की इच्छा पर ही वह अपने हाथ-पैर हिला सकती है उसमें अपने बल पर चलने की शक्ति नहीं है।

प्रश्न 3.
पहली कठपुतली की बात दूसरी कठपुतलियों को क्यों अच्छी लगी?  [Imp. ]
उत्तर
जब पहली कठपुतली ने स्वतंत्र होने के लिए विद्रोह किया तो दूसरी कठपुतलियों को भी यह बात बहुत अच्छी लगी क्योंकि बंधन में रहना कोई पसंद नहीं करता। वे भी बंधन में दुखी हो चुकी थीं लेकिन ऐसा संभव न हुआ।

प्रश्न 4.
पहली कठपुतली ने स्वयं कहा कि-‘ये धागे / क्यों हैं मेरे पीछे-आगे? / इन्हें तोड़ दो; / मुझे मेरे पाँवों पर छोड़ दो।’ तो फिर वह चिंतित क्यों हुई कि-‘ये कैसी इच्छा / मेरे मन में जगी?’ नीचे दिए वाक्यों की सहायता से अपने विचार व्यक्त कीजिए

  1. उसे दूसरी कठपुतलियों की ज़िम्मेदारी महसूस होने लगी।
  2. उसे शीघ्र स्वतंत्र होने की चिंता होने लगी।
  3. वह स्वतंत्रता की इच्छा को साकार करने और स्वतंत्रता को हमेशा बनाए रखने के उपाय सोचने लगी।
  4. वह डर गई, क्योंकि उसकी उम्र कम थी।

उत्तर

धागों से बँधी कठपुतलियाँ दूसरों के इशारे पर नाचना ही अपना जीवन मानती हैं लेकिन एक बार एक कठपुतली ने विद्रोह कर दिया। उसके मन में शीघ्र ही स्वतंत्र होने की इच्छा जागृत हुई और वह अपनी स्वतंत्रता के बारे में सोचने लगी। लेकिन जब उसे अपने ऊपर दूसरी कठपुतलियों की ज़िम्मेदारी का अहसास हुआ तो वह डर गई, उसे ऐसा लगा न जाने स्वतंत्रता का जीवन भी कैसा होगा? तो वह सोच-विचार करने लगी।

कविता से आगे

प्रश्न 1.
‘बहुत दिन हुए / हमें अपने मन के छंद छुए।’-इस पंक्ति का अर्थ और क्या हो सकता है? अगले पृष्ठ पर दिए हुए वाक्यों की सहायता से सोचिए और अर्थ लिखिए
(क) बहुत दिन हो गए, मन में कोई उमंग नहीं आई।
(ख) बहुत दिन हो गए, मन के भीतर कविता-सी कोई बात नहीं उठी, जिसमें छंद हो, लय हो।
(ग) बहुत दिन हो गए, गाने-गुनगुनाने का मन नहीं हुआ।
(घ) बहुत दिन हो गए, मन का दुख दूर नहीं हुआ और न मन में खुशी आई।
उत्तर-
‘बहुत दिन हुए हमें अपने मन के छंद छुए’ का अर्थ है कि बहुत दिन हो गए मन का दुख दूर नहीं हुआ और न ही मन में खुशी आयी। यानी कठपुतलियाँ पराधीनता से बहुत अधिक दुखी हैं। हमने अपने मन की बात नहीं सुनी और मन की इच्छा के अनुसार कार्य नहीं किया। पराधीनता ने हमें सोचने-समझने का मौका ही नहीं दिया।

प्रश्न 2.
नीचे दो स्वतंत्रता आंदोलनों के वर्ष दिए गए हैं। इन दोनों आंदोलनों के दो-दो स्वतंत्रता सेनानियों के नाम लिखिए-
(क) सन् 1857……… ……….
(ख) सन् 1942……. ……….
उत्तर
(क) सन् 1857-लक्ष्मीबाई, ताँत्या टोपे।
(ख) सन् 1942-महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू।

अनुमान और कल्पना

* स्वतंत्र होने की लड़ाई कठपुतलियाँ कैसे लड़ी होंगी और स्वतंत्र होने के बाद स्वावलंबी होने के लिए क्या-क्या प्रयत्न किए होंगे? यदि उन्हें फिर से धागे में बाँधकर नचाने के प्रयास हुए होंगे तब उन्होंने अपनी रक्षा किस तरह के उपायों से की होगी?
उत्तर
स्वतंत्र होने की लड़ाई कठपुतलियाँ मिलकर लड़ी होगी। पहली कठपुतली के मन में भले ही अपने बंधन तोड़ने से पहले यह विचार था कि दूसरी कठपुतलियों की ज़िम्मेदारी उस पर है क्योंकि उसका धागा टूटने पर सबके धागे टूटते गए होंगे। उसने अवश्य पहले सभी कठपुतलियों से विचार-विमर्श किया होगा। स्वतंत्र होने के बाद स्वावलंबी बनने के लिए भी उन्होंने काफी परिश्रम किया होगा। रहने, खाने, पीने, जीवनयापन की अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए दिन-रात एक किया होगा।

यदि फिर से उन्हें किसी ने धागे में बाँधकर नचाने का प्रयास किया होगा तो हाथ न आई होंगी क्योंकि स्वतंत्र जीवन में मनुष्य कितनी भी मुश्किलों का सामना करें लेकिन परतंत्रता से वह भला ही होता है। उन्होंने अपनी रक्षा के लिए एकजुट होकर कार्य किया होगा। सब मिलकर रही होंगी। धागे बाँधने वालों की हर चाल को असफल किया होगा।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
कई बार जब दो शब्द आपस में जुड़ते हैं तो उनके मूल रूप में परिवर्तन हो जाता है। कठपुतली शब्द में भी इस प्रकार का सामान्य परिवर्तन हुआ है। जब काठ और पुतली दो शब्द एक साथ हुए कठपुतली शब्द बन गया और इससे बोलने में सरलता आ गई। इस प्रकार के कुछ शब्द बनाइएजैसे—काठ (कठ) से बना-कठगुलाब, कठफोड़ा
हाथ-हथ सोना-सोन मिट्टी-मट
उत्तर
हाथ-हथ – हथकड़ी, हथगोला, हथनाल
सोना-सोन – सोनपरी, सोनजुही, सोनभद्र
मिझे-मट – मटमैला, मटका, माट

प्रश्न 2.
कविता की भाषा में लय या तालमेल बनाने के लिए प्रचलित शब्दों और वाक्यों में बदलाव होता है। जैसे-आगे-पीछे अधिक प्रचलित शब्दों की जोड़ी है, लेकिन कविता में ‘पीछे-आगे’ का प्रयोग हुआ है। यहाँ ‘आगे’ का ‘..“बोली ये धागे’ से ध्वनि का तालमेल है। इस प्रकार के शब्दों की जोड़ियों में आप भी परिवर्तन कीजिए-दुबला-पतला, इधर-उधर, ऊपर-नीचे, दाएँ-बाएँ, गोरा-काला, लाल-पीला आदि।
उत्तर
पतला-दुबला, उधर-इधर, नीचे-ऊपर, बाएँ-दाएँ, काला-गोरा, पीला-लाल आदि।

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NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 1 हम पंछी उन्मुक्त गगन के

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Subject Hindi Vasant
Chapter Chapter 1
Chapter Name हम पंछी उन्मुक्त गगन के
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NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 1 हम पंछी उन्मुक्त गगन के

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

(पृष्ठ 2-3)

कविता से

प्रश्न 1.
हर तरह की सुख सुविधाएँ पाकर भी पक्षी पिंजरे में बंद क्यों नहीं रहना चाहते?
उत्तर
हर तरह की सुख-सुविधाएँ पाकर भी पक्षी पिंजरे में बंद नहीं रहना चाहते क्योंकि उन्हें बंधन पसंद नहीं। वे तो खुले आकाश में ऊँची उड़ान भरना, नदी-झरनों का बहता जल पीना, कड़वी निबौरियाँ खाना, वृक्ष की सबसे ऊँची डाली पर झूलना, अनार के दानों रूपी तारों को चुगना और क्षितिज मिलन करना ही पसंद करते हैं।

प्रश्न 2.
पक्षी उन्मुक्त रहकर अपनी कौन-कौन सी इच्छाएँ पूरी करना चाहते हैं?
उत्तर
पक्षी उन्मुक्त रहकर अपनी निम्न इच्छाओं को पूरा करना चाहते हैं

  1. पक्षी खुले आकाश में उड़ना चाहते हैं।
  2. नदी-झरनों का बहता जल पीना चाहते हैं।
  3. नीम के वृक्ष की कड़वी निबौरियाँ खाना चाहते हैं।
  4. पेड़ की सबसे ऊँची टहनी पर झूलना चाहते हैं।
  5. आकाश में ऊँची उड़ान भरकर अनार के दानों रूपी तारों को चुगना चाहते हैं।
  6. क्षितिज मिलन करना चाहते हैं।

प्रश्न 3.
भाव स्पष्ट कीजिए
या तो क्षितिज मिलन बन जाता / या तनती साँसों की डोरी।
उत्तर-
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक वसंत भाग-2 की कविता ‘हम पंछी उन्मुक्त गगन के’ से ली गई है। इस कविता के रचयिता प्रसिद्ध कवि श्री शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ हैं। इस पंक्ति में कवि पक्षी के माध्यम से कहना चाहते हैं कि पक्षी स्वतंत्र रहकर क्षितिज की सीमा तक उड़ जाने की अपनी इच्छा व्यक्त करते हैं कि उड़ते-उड़ते या तो वह तो क्षितिज की सीमा हूँढ़ ही निकालेंगे या प्राण त्याग देंगे। पक्षियों के इस कथन से उनकी उन्मुक्त उड़ान के प्रति ललक व्यक्त हुई है।

कविता से आगे

प्रश्न 1.
बहुत से लोग पक्षी पालते हैं-
(क) पक्षियों को पालना उचित है अथवा नहीं? अपने विचार लिखिए।
उत्तर
पक्षियों का पालना बिल्कुल भी उचित नहीं है क्योंकि ईश्वर ने उन्हें उड़ने के लिए पंख दिए हैं, तो इच्छाएँ भी वैसी ही दी हैं। वे हरदम स्वच्छंद रहना चाहते हैं। अपनी इच्छा से ऊँची-से-ऊँची उड़ान भरना, पेड़ों पर घोंसले बनाकर रहना, नदी-झरनों का जल पीना, फल-फूल खाना ही उनकी प्रवृत्ति है। उनके बंधन हेतु पिंजरे भले ही सोने के क्यों न हों, बढ़िया से बढ़िया खाने के पदार्थ उन्हें परोसे जाएँ, लेकिन यही सत्य है कि बंधन में रहकर मिलने वाली सुविधाओं से कठिनाइयों से भरी आज़ादी श्रेष्ठ है।

(ख) क्या आपने या आपकी जानकारी में किसी ने कभी कोई पक्षी पाला है? उसकी देखरेख किस प्रकार की जाती होगी, लिखिए।
उत्तर
हाँ! हमने एक बार तोता पाला था। मेरे पिताजी उसे मेले से खरीदकर लाए थे। पक्षी की परवरिश एक छोटे बच्चे की भाँति ही की जाती है। मेरी माँ सुबह-सुबह उसे पिंजरे समेत घर के बाहर, बगीचे में लेकर आतीं। वह बाहर का वातावरण देखकर प्रसन्न हो जाता और ज़ोर-जोर से पंख फड़फड़ाता। हम उसे नहलाते भी थे। माँ उसे बाजरा देती व कटोरी में पानी। अमरूद, अंगूर व हरी मिर्च तो वह बहुत चाव से खाता। धूप थोड़ी सी तेज होने पर वह सिकुड़कर बैठ जाता। हम उसे अंदर कमरे में ले आते। बिल्ली या कुत्ते आदि जानवरों से उसे बहुत बचाना पड़ता था। रात को उसके पिंजरे पर कोई कपड़ा डाल देते तो वह बैठे-बैठे ही सो जाता।

प्रश्न 2.
पक्षियों को पिंजरे में बंद करने से केवल उनकी आज़ादी का हनन ही नहीं होता, अपितु पर्यावरण भी प्रभावित होता है। इस विषय पर दस पंक्तियों में अपने विचार लिखिए।
उत्तर-
पक्षियों को पिंजरे में बंद करके उसकी स्वतंत्रता का हनन होता है, क्योंकि उनकी प्रवृत्ति है ‘उड़ना’। अतः प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में पृथ्वी के सभी जीवों की समान रूप से महत्त्वपूर्ण भूमिका है। पृथ्वी के पर्यावरण संतुलन के लिए मनुष्य एवं पशु दोनों की आवश्यकता समान रूप से है। पक्षियों को कैदी बना लेने से उनकी उड़ने की आजादी समाप्त हो जाती है। इससे पर्यावरण प्रभावित होता है। पर्यावरण को शुद्ध और प्राकृतिक बनाए रखने के लिए पक्षियों को प्रकृति के मध्य रहना आवश्यक है। वे इस प्रकार पर्यावरण को शुद्ध एवं संतुलित बनाते हैं। पर्यावरण में पक्षियों का अपना विशेष महत्त्व होता है।

अनुमान और कल्पना

प्रश्न 1.
क्या आपको लगता है कि मानव की वर्तमान जीवन-शैली और शहरीकरण से जुड़ी योजनाएँ पक्षियों के लिए घातक हैं? पक्षियों से रहित वातावरण में अनेक समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। इन समस्याओं से बचने के लिए हमें क्या करना चाहिए? उक्त विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन कीजिए।
उत्तर-
हाँ, इसमें कोई शक नहीं है कि मानव की वर्तमान जीवन-शैली और शहरीकरण से जुड़ी योजनाएँ पक्षियों के लिए सभी दृष्टिकोण से घातक हैं। अंधाधुंध शहरीकरण के कारण पक्षी प्रकृति से समाप्त होते चले जा रहे हैं। बड़ी संख्या में पेड़ काटे जा रहे हैं जिससे पक्षियों का आश्रय समाप्त हुआ है। कल-कारखानों के खुलने से वातावरण का प्रदूषण बढ़ गया है। इस कारण पक्षियों का आसमान में उड़ना भी कठिन हो गया है क्योंकि उनका आश्रय समाप्त होने के साथ-साथ पेड़ों से प्राप्त खाद्य पदार्थ, फल-फूल आदि उन्हें नहीं मिल पाते । ऐसा होने पर उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। पक्षियों के पलायन से सबसे बड़ा खतरा है। अनाज़ में कमी होने का है। पर्यावरण संतुलित नहीं रहेगा इससे पर्यावरण संतुलन पर गहरा असर पड़ेगा और तब मनुष्य को अपने भविष्य की चिंता सताने लगेगी। अतः आवश्यक है कि मनुष्य जागरूक हो जाए और पक्षियों के संरक्षण के लिए अधिक से अधिक संख्या में वृक्षारोपण करें। पक्षियों के लिए जलाशयों के साथ-साथ बाग-बगीचों का भी निर्माण करवाएँ। पक्षियों को पिंजरों में बंदी बना करके नहीं रखना चाहिए।

अन्य समस्याओं के बारे में छात्र स्वयं सोचे और विचार-विमर्श करें। इसके लिए विद्यालय में वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन करें।

प्रश्न 2.
यदि आपके घर के किसी स्थान पर किसी पक्षी ने अपना आवास बनाया है और किसी कारणवश आपको अपना घर बदलना पड़ रहा है तो आप उस पक्षी के लिए किस तरह के प्रबंध करना आवश्यक समझेंगे? लिखिए।
उत्तर
यदि हमारे घर में किसी पक्षी ने अपना घोंसला बनाया हो और किसी कारणवश हमें घर बदलना पड़ रहा हो तो हम संभवतः प्रयास तो यह करेंगे कि घोंसले को छेड़ा न जाए और उस पक्षी के बाहर आने-जाने का स्थान भी खुला रहे। लेकिन यदि ऐसा न हो पाए तो हम घोंसले को सावधानीपूर्वक उठाकर घर के बाहर किसी ऊँचे स्थान पर रखेंगे जहाँ उस पक्षी की नज़र पड़ सके।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
स्वर्ण-श्रृंखला और लाल किरण-सी में रेखांकित शब्द गुणवाचक विशेषण हैं। कविता से ढूंढकर इस प्रकार के तीन और उदाहरण लिखिए।
उत्तर

  1. कनक-तीलियाँ
  2. कटुक-निबौरी
  3. तारक-अनार।

प्रश्न 2.
‘भूखे-प्यासे’ में द्वंद्व समास है। इन दोनों शब्दों के बीच लगे चिह्न को सामासिक चिह्न (-) कहते हैं। इस चिह्न से ‘और’ का संकेत मिलता है, जैसे-भूखे-प्यासे = भूखे और प्यासे।
• इस प्रकार के दस अन्य उदाहरण खोजकर लिखिए।
उत्तर

  1. सुख-दुख      –   सुख और दुख
  2. दिन-रात       –  दिन और रात ।
  3. सुबह-शाम    –  सुबह और शाम
  4. अन्न-जल       –  अन्न और जल
  5. अपना-पराया – अपना और पराया
  6. अमीर-गरीब  –   अमीर और गरीब
  7. तन-मन        –     तन और मन
  8. दूध-दही       –     दूध और दही
  9. खट्टा-मीठा    –    खट्टा और मीठा
  10. पाप-पुण्य      –    पाप और पुण्य

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NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 13 एक तिनका (अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’)

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Board CBSE
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Class Class 7
Subject Hindi Vasant
Chapter Chapter 13
Chapter Name एक तिनका (अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’)
Number of Questions Solved 9
Category NCERT Solutions

NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 13 एक तिनका (अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’)

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास
(पृष्ठ 100-101)

कविता से

प्रश्न 1.
नीचे दी गई कविता की पंक्तियों को सामान्य वाक्य में बदलिए।
जैसे- एक तिनका आँख में मेरी पड़ा-मेरी आँख में एक तिनका पड़ा।
मुँठ देने लोग कपड़े की लगे-लोग कपड़े की मँठ देने लगे।
(क)एक दिन जब था मुंडेरे पर खड़ा- ……………………
(ख)लाल होकर आँख भी दुखने लगी- ……………………
(ग)ऐंठ बेचारी दबे पाँवों भगी- …………………
(घ) जब किसी ढब से निकल तिनका गया- ………….
उत्तर

  1. एक दिन जब था मुंडेरे पर खड़ा – एक दिन जब मैं अपनी छत के किनारे पर खड़ा था।
  2. लाल होकर आँख भी दुखने लगी – आँख में तिनका चले जाने के कारण आँख लाल होकर दुखने लगी।
  3. ऐंठ बेचारी दबे पाँवों भगी – जब आँख में बहुत दर्द हुआ तो कवि का घमंड भी टूट गया।
  4. जब किसी ढब से निकल तिनका गया – किसी तरीके से आँख का तिनका निकाला गया।

प्रश्न 2.
‘एक तिनका’ कविता में किस घटना की चर्चा की गई है, जिससे घमंड नहीं करने का संदेश मिलता है?
उत्तर
‘एक तिनका’ कविता में ‘हरिऔध’ जी ने आँख में चले जाने वाले तिनके की बात की है कि कैसे एक तिनका कवि की आँख में चला गया। उसकी आँख लाल होकर दुखने लगी। लोगों ने आँख में कपड़े की मुँठ भी दी। किसी तरीके से तिनका निकाल लिया गया। ऐसे में कवि का घमंड चूर-चूर हो गया। उसकी बुद्धि ने भी उसे ताने दिए कि तू ऐसे ही घमंड करता था तेरे घमंड को चूर करने हेतु एक तिनका ही बहुत है। इस कविता से यह संदेश मिलता है कि हमें घमंड नहीं करना चाहिए क्योंकि कई बार छोटी से छोटी वस्तु या प्राणी भी घमंड चूर-चूर करने में सफल हो जाता है।

प्रश्न 3.
आँख में तिनका पड़ने के बाद घमंडी की क्या दशा हुई?
उत्तर
घमंडी की आँख में तिनका पड़ने पर उसकी आँखे लाल होकर दुखने लगी। ऐसे में वह बेचैन हो उठा जिससे उसका घमंड चूर-चूर हो गया।

प्रश्न 4.
घमंडी की आँख से तिनका निकालने के लिए उसके आसपास लोगों ने क्या किया?
उत्तर-
घमंडी की आँख से तिनका निकालने के लिए उसके आसपास के लोगों ने कपड़ों की मूठ बनाकर उसकी आँख में देने लगे। यानी कपड़े की नोंक से तिनका निकालने का प्रयास करने लगे।

प्रश्न 5.
‘एक तिनका’ कविता में घमंडी को उसकी ‘समझ’ ने चेतावनी दी-
ऐंठता तू किसलिए इतना रहा,
एक तिनका है बहुत तेरे लिए।
इसी प्रकार की चेतावनी कबीर ने भी दी है-
तिनका कबहूँ न निदिए, पाँव तले जो होय।
कबहूँ उड़ि आँखिन परै, पीर घनेरी होय।
• इन दोनों में क्या समानता है और क्या अंतर? लिखिए।
उत्तर
(क)इन दोनों काव्यांशों की पंक्तियों में समानता यह है कि दोनों में ही बताया गया है कि छोटा-सा तिनका भी अगर आँख में पड़ जाए तो मनुष्य को बेचैन कर देता है।
(ख)इन दोनों काव्यांशों की पंक्तियों में अंतर‘एक तिनका’ कविता में कवि ने दर्शाया है कि छोटे से तिनके में मनुष्य का घमंड तोड़ देने की शक्ति है।
जबकि कबीर ने कहा है कि तिनके को कभी पाँव तले मत रौंदो न जाने कब वह उड़कर आँख में पड़ जाए और बहुत दर्द सहना पड़े अर्थात् छोटा व्यक्ति भी कभी-कभी नुकसान पहुँचा सकता है।

अनुमान और कल्पना

प्रश्न 1.
इस कविता को कवि ने ‘मैं’ से आरंभ किया है-‘मैं घमंडों में भरा ऐंठा हुआ’। कवि का यह ‘मैं’ कविता पढ़नेवाले व्यक्ति से भी जुड़ सकता है और तब अनुभव यह होगा कि कविता पढ़नेवाला व्यक्ति अपनी बात बता रहा है। यदि कविता में ‘मैं’ की जगह ‘वह’ या कोई नाम लिख दिया जाए, तब कविता के वाक्यों में बदलाव आ जाएगा। कविता में ‘मैं’ के स्थान पर ‘वह’ या कोई नाम लिखकर वाक्यों के बदलाव को देखिए और कक्षा में पढ़कर सुनाइए।
उत्तर
वह घमंडों में भरा ऐंठा हुआ,
एक दिन जब था मुंडेरे पर खड़ा।
आ अचानक दूर से उड़ता हुआ,
एक तिनका आँख में उसकी पड़ा।

वह झिझक उठा, हुआ बेचैन-सा,
लाल होकर आँख भी दुखने लगी।
मुँठ देने लोग कपड़े की लगे,
ऐंठ बेचारी दबे पाँवों भगी।

जब किसी ढब से निकल तिनका गया,
तब उसकी ‘समझ’ ने यों उसे ताने दिए।
ऐंठता तू किसलिए इतना रहा,
एक तिनको है बहुत तेरे लिए।

प्रश्न 2.
नीचे दी गई पंक्तियों को ध्यान से पढ़िए
ऐंठ बेचारी दबे पाँवों भगी,
तब ‘समझ’ ने यों मुझे ताने दिए।
• इन पंक्तियों में ऐंठ’ और ‘समझ’ शब्दों का प्रयोग सजीव प्राणी की भाँति हुआ है। कल्पना कीजिए, यदि ‘ऐंठ’ और ‘समझ’ किसी नाटक में दो पात्र होते तो उनका अभिनय कैसा होता?
उत्तर-
ऐंठ-अकड़ कर चलती, घमंड से भरी होती, रूखे स्वर में बोलती-ऐ! मनुष्य बता तू कौन है? उसे किसी बात की परवाह न होती।
समझ-शांत स्वभाव की होती। दूसरों का सम्मान करनेवाली होती। वह विनम्र तथा सरल होता। उसकी बातों में समझदारी होती।

प्रश्न 3.
नीचे दी गई कबीर की पंक्तियों में तिनका शब्द का प्रयोग एक से अधिक बार किया गया है। इनके अलग-अलग अर्थों की जानकारी प्राप्त करें।
उठा बबूला प्रेम का, तिनका उड़ा अकास।
तिनका-तिनका हो गया, तिनका तिनके पास।।
उत्तर
हवा का चक्रवात उठने पर धरती से तिनके उड़कर आकाश में पहुँच गए और सभी तिनके बिखर गए। कबीर जी के अनुसार मानो एक तिनका उस तिनके के साथ जा मिला अर्थात् आत्मा का परमात्मा से मिलन हो गया। यहाँ रहस्यमय अर्थात् अद्वैत भाव दर्शाया गया है।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
किसी ढब से निकलना’ का अर्थ है किसी ढंग से निकलना।’ढब से’ जैसे कई वाक्यांशों से आप परिचित होंगे, जैसे – धम से वाक्यांश है लेकिन ध्वनियों में समानता होने के बाद भी ढब से और धम से जैसे वाक्यांशों के प्रयास में अंतर है। ‘धम से’, ‘छप से’ इत्यादि का प्रयोग ध्वनि द्वारा क्रिया को सूचित करने के लिए किया जाता है। नीचे कुछ ध्वनि द्वारा क्रिया को सूचित करने वाले वाक्यांश और कुछ अधूरे वाक्य दिए गए हैं। उचित वाक्यांश चुनकर वाक्यों के खाली स्थान भरिए
छप से, टप से, थरै से, फुर्र से, सन् से
(क) मेंढक पानी में ……….. कूद गया।
(ख) नल बंद होने के बाद पानी की एक बूंद ………… चू गई।
(ग) शोर होते ही चिड़िया ………. उड़ी।
(घ) ठंडी हवा ………. गुजरी, मैं ठंड में ……….. काँप गया।
उत्तर-
(क) मेंढक पानी में छप से कूद गया।
(ख) नल बंद होने के बाद पानी की एक बूंद टप से चू गई।
(ग) शोर होते ही चिड़िया फुर्र से उड़ी।
(घ) ठंडी हवा सन् से गुजरी, मैं ठंड में थर्र से काँप गया।

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NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 19 आश्रम का अनुमानित व्यय (मोहनदास करमचंद गांधी)

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Chapter Chapter 19
Chapter Name आश्रम का अनुमानित व्यय (मोहनदास करमचंद गांधी)
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NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 19 आश्रम का अनुमानित व्यय (मोहनदास करमचंद गांधी)

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास
(पृष्ठ 139-40)
लेखा-जोखा

प्रश्न 1.
हमारे यहाँ बहुत से काम लोग खुद नहीं करके किसी पेशेवर कारगीर से करवाते हैं लेकिन गांधी जी पेशेवर कारीगरों के उपयोग में आने वाले औज़ार-छेनी, हथौड़े, बसूले इत्यादि क्यों खरीदना चाहते होंगे?
उत्तर-
यह सच है कि हमारे यहाँ काम लोग खुद नहीं करके किसी पेशेवर कारीगर से काम करवाना पसंद करते हैं, क्योंकि उनके पास अपने औजार होते हैं लेकिन गांधी जी हर छोटा-बड़ा कार्य स्वयं करते थे तथा दूसरों को भी करने पर जोर दिया करते थे। उनका विचार था कि कोई कार्य छोटा नहीं होता। व्यक्ति को आत्मनिर्भर होना चाहिए तथा किसी भी कार्य को करने में संकोच नहीं महसूस करना चाहिए।

प्रश्न 2.
गांधी जी ने अखिल भारतीय कांग्रेस सहित कई संस्थाओं व आंदोलनों का नेतृत्व किया। इनकी जीवनी या उन पर लिखी गई किताबों में उन अंशों को चुनिए जिनसे हिसाब-किताब के प्रति गांधी जी की चुस्ती का पता चलता है?
उत्तर-
गांधी जी हर काम का लेखा-जोखा रखते थे। वे प्रत्येक विषय के प्रति नकारात्मक व सकारात्मक सोच बराबर रखते थे। निम्न उदाहरणों द्वारा इस वक्तव्य को स्पष्टता दे सकते हैं

गांधी जी ने अखिल भारतीय कांग्रेस, कई संस्थाओं (खादी ग्रामोद्योग) तथा आंदोलनों का सफल नेतृत्व किया। वे लेखाजोखा रखने में शुरू से ही काफ़ी सक्रिय रहते हैं। इंग्लैंड में भी पढ़ाई के दौरान वे एक-एक पैसे का हिसाब रखते थे और प्रतिदिन अपने रोकड़ मिला लेते थे। इसका उनकी आत्मकथा में भी उल्लेख है। वे इसी आदत के कारण सभी आंदोलनों को सफलतापूर्वक चला पाए, उन्हें कभी पैसे की कमी नहीं हुई।

प्रश्न 3.
मान लीजिए, आपको कोई बाल आश्रम खोलना है। इस बजट से प्रेरणा लेते हुए उसका अनुमानित बजट बनाइए। इस बजट में दिए गए किन-किन मदों पर आप कितना खर्च करना चाहेंगे। किन नयी मदों को जोड़ना-हटाना चाहेंगे?
उत्तर
बाल आश्रम के लिए संभावित बजट
NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 19 आश्रम का अनुमानित व्यय (मोहनदास करमचंद गांधी) 2

प्रश्न 4.
आपको कई बार लगता होगा कि आप कई छोटे-मोटे काम (जैसे-घर की पुताई, दूध दुहना, खाट बुनना) करना चाहें तो कर सकते हैं। ऐसे कामों की सूची बनाइए, जिन्हें आप चाहकर भी नहीं सीख पाते। इसके क्या कारण रहे होंगे? उन कामों की सूची भी बनाइए, जिन्हें आप सीखकर ही छोड़ेंगे।
उत्तर
हमारे जीवन में ऐसे बहुत से कार्य होते हैं जिन्हें हम चाहकर भी नहीं सीख पाते जैसे-घर की पुताई सफ़ेदी वाला करता है, दूध वाला दूध दोह देता है और खाट (चारपाई) बुनने वाले से बुनवाई जाती है। कुछ ऐसे ही निम्न कार्य हैं जो मैं चाहकर भी नहीं सीख पाता-

  1. खेती-बाड़ी करना-मुझे खेतों में घूमना, अनाज-फल बोना व फसलें देखना बहुत अच्छा लगता है। मेरा भी मन चाहता है कि किसान की तरह कड़ी मेहनत करूं लेकिन मेरी इच्छा पूरी नहीं हो पाई, क्योंकि हम शहर के एक फ्लैट में रहते हैं। यहाँ खेती-बाड़ी तो क्या गमले में एक पौधा लगाने की भी खुली जगह नहीं है।
  2. कॉपी बनाना-मुझे बहुत शौक है कि मोटी-मोटी कॉपियाँ खुद बनाऊँ। क्योंकि कॉपी बंनाने में सारा काम हाथ से ही करना होता है। मैं पेज लाता हूँ, सिलता हूँ, उसका कवर भी बनाने की कोशिश करता हूँ। लेकिन कॉपियाँ सही नहीं बन पातीं क्योंकि यह काम अनुभव पर निर्भर करता है।
  3. मेज कुर्सी बनाना-कभी-कभी मेरा मन करता है कि अपने पढ़ने के लिए अपने आप एक मेज-कुर्सी
    बनाऊँ। पूरा सामान-लकड़ी के फट्टे, पाये, कील, हथौड़ा होने के बावजूद असफल हो जाता हूँ तो यही लगता है। जिसका काम उसी को साजे।।।
  4. कपड़े रंगना-कपड़े रंगना मुझे बहुत अच्छा लगता है लेकिन गर्म पानी में हाथ डालने से डर लगता है और साथ ही रंग मिलान समझ नहीं आता। इस बारे में मैं यही सोचता हूँ कि इस कार्य को करने से पहले अत्यधिक अनुभव की आवश्यकता है।
  5. चप्पल, जूते में टाँका लगाना-कितना आसान लगता है टूटे हुए चप्पल, जूते में टाँका लगाना। मोची कितनी जल्दी लगाता है। हम चाहकर भी एक छोटा-सा टाँका नहीं लगा पाते कभी सुई टूट जाती है और कभी धागा छूट जाता। है क्योंकि यह भी एक कला है जिसे सीखना पड़ता है।
    लेकिन मैंने भी प्रण किया है कि मैं कपड़े रंगना और कॉपियाँ बनाने का काम जरूर सीखेंगा, भले ही मुझे इसके लिए प्रशिक्षण लेना पड़े। मेरे माता-पिता भी मुझे यही समझाते हैं कि छोटे-से-छोटे व बड़े-से-बड़े काम को करने के लिए लगन, परिश्रम व अनुभव की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 5. इस अनुमानित बजट को गहराई से पढ़ने के बाद आश्रम के उद्देश्यों और कार्यप्रणाली के बारे में क्या-क्या अनुमान लगाए जा सकते हैं?   [Imp.]
उत्तर
इस अनुमानित बजट को गहराई से पढ़ने के बाद हम आश्रम के ये उद्देश्य जान सकते हैं
अतिथि सत्कार, जरूरतमंदों को आवश्यक सुविधाएँ प्रदान करना, बेकार लोगों को आजीविका प्रदान करना, श्रम का महत्त्व समझाना, कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देना, चरखे आदि से स्वदेशी आंदोलन को आगे बढ़ाना।
इस आश्रम की कार्यप्रणाली का मुख्य आधार आत्मनिर्भरता है।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
अनुमानित शब्द अनुमान में इत प्रत्यय जोड़कर बना है। इते प्रत्यय जोड़ने पर अनुमान का न नित में परिवर्तित हो जाता है। नीचे-इत प्रत्यय वाले कुछ और शब्द लिखे हैं। उनमें मूल शब्द पहचानिए और देखिए कि क्या परिवर्तन हो रहा है-
प्रमाणित व्यथित द्रवित मुखरित
झंकृत शिक्षित मोहित चर्चित
इत प्रत्यय की भाँति इक प्रत्यय से भी शब्द बनते हैं और तब शब्द के पहले अक्षर में भी परिवर्तन हो जाता है, जैसे-सप्ताह + इक = साप्ताहिक। नीचे इक प्रत्यय से बनाए गए शब्द दिए गए हैं। इनमें मूल शब्द पहचानिए और देखिए कि क्या परिवर्तन हो रहा है-
मौखिक         संवैधानिक        प्राथमिक
नैतिक           सौराणिक         दैनिक
उत्तर
इत प्रत्ययांत शब्द        मूल शब्द  +   प्रत्यय
प्रमाणित               =     प्रमाण      +   इत
व्यथित                 =     व्यथा        +   इत
द्रवित                   =     द्रव          +   इत
मुखरित                =     मुखर       +   इत
झंकृत                  =     झंकार      +   इत
शिक्षित                 =     शिक्षा       +   इत
मोहित                  =     मोह         +   इत
चर्चित                   =     चर्चा        +  इत

इक प्रत्ययांत शब्द       मूल शब्द  +   प्रत्यय
मौखिक                =    मुख          +   इक
संवैधानिक            =    संविधान    +    इक
प्राथमिक              =    प्रथम         +    इक
नैतिक                  =   नीति          +    इक
पौराणिक              =   पुराण         +    इक
दैनिक                  =   दिन           +    इक

प्रश्न 2.
बैलगाड़ी और घोडागाड़ी शब्द दो शब्दों को जोड़ने से बने हैं। इसमें दूसरा शब्द प्रधान है, यानी शब्द का प्रमुख अर्थ दूसरे शब्द पर टिका है। ऐसे समास को तत्पुरुष समास कहते हैं। ऐसे छह शब्द और सोचकर लिखिए और समझिए कि उनमें दूसरा शब्द प्रमुख क्यों है?
उत्तर-
रसोईघर – रसोई के लिए घर
तुलसीकृत – तुलसी द्वारा कृत
देशभक्त – देश का भक्त
घुड़सवार – घोड़े पर सवार
वनवास – वन का वास

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NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 7 पापा खो गए (विजय तेंदुलकर)

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Subject Hindi Vasant
Chapter Chapter 7
Chapter Name पापा खो गए (विजय तेंदुलकर)
Number of Questions Solved 15
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पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

                                                                        (पृष्ठ 60-62)

नाटक से

प्रश्न 1.
नाटक में आपको सबसे बुद्धिमान पात्र कौन लगा और क्यों?
उत्तर-
नाटक में सबसे बुद्धिमान पात्र हमें कौआ लगा क्योंकि वह उड़-उड़कर सभी घटनाओं की जानकारी रखता है, उसे अन्य जगहों की घटनाओं की जानकारी थी। सज्जन और दुर्जन व्यक्तियों की पहचान थी। अपनी बुद्धिमता से वह बच्ची को उस दुष्ट व्यक्ति से बचाता है और फिर उसे सही सलामत उसके घर तक पहुँचाने की तरकीब भी वही सोचता है।

प्रश्न 2.
पेड़ और खंभे में दोस्ती कैसे हुई?
उत्तर
पेड़ का जन्म समुद्र के किनारे हुआ था वह अकेला बड़ा होता रहा। कुछ समय के बाद वहाँ एक खंभा लगाया गया तो पेड़ ने उससे मित्रता करने की कोशिश की। जबकि खंभा अपनी अकड़ के कारण पेड़ से नहीं बोलता था। परंतु एक दिन घोर वर्षा और तेज हवाओं के कारण वह खंभा पेड़ के साथ जा टकराया और गिरने से बच गया। पेड़ ने स्वयं घायल होकर उसे धरती पर गिरने से बचाया। उस दिन से ही इन दोनों में गहरी मित्रता हो गई।

प्रश्न 3.
लैटरबक्स को सभी लाल ताऊ कहकर क्यों पुकारते थे?
उत्तर
लैटरबक्स को सभी लाल ताऊ कहते थे क्योंकि यह पूरे का पूरा लाल रंग में रंगा था। वह पढ़ा-लिखा था। चोरी-चोरी लोगों की चिट्ठियाँ पढ़कर समाज के लिए चिंतित होता था।

प्रश्न 4.
लाल ताऊ किस प्रकार बाकी पात्रों से भिन्न है?
उत्तर
लाल ताऊ पढ़ा-लिखा, बुद्धिमान, हँसमुख और मिलनसार था। वह नीरस वातावरण को भी भजनों और गानों से सरस बना देता था। इसलिए वह अन्य पात्रों से भिन्न है। निर्जीव होते हुए भी समाज की चिंताएँ उसे सताती थीं।

प्रश्न 5.
नाटक में बच्ची को बचानेवाले पात्रों में एक ही सजीव पात्र है। उसकी कौन-कौन सी बातें आपको मज़ेदार लगीं? लिखिए।
उत्तर
नाटक में एकमात्र सजीव पात्र ‘कौआ’ है। वह बुद्धिमान है, क्योंकि बच्ची को बचाने में सबसे बड़ी भूमिका उसी ने निभाई। उसे सामयिक घटनाओं का पूरा ज्ञान है और समाज के अच्छे-बुरे लोगों की भी पहचान है। वह दूरदर्शी व सच्चा मित्र है। कर्कश आवाज़ के बावजूद मन से कोमल और सबके साथ मित्रता स्थापित करने वाला है। उसी की योजनानुसार बालिका को उठाने वाला दुष्ट व्यक्ति भूत के डर से बालिका को छोड़कर भाग जाता है और उसी के परामर्श से बच्ची को सकुशल घर पहुँचाने के लिए पुलिस के आने की प्रतीक्षा की जाती है। अंत में जब यह सोचा जाता है कि पुलिस न आई तो क्या होगा?’ तो कौआ ही लैटरबक्स को बड़े-बड़े अक्षरों में ‘पापा खो गए’ लिखने व सबको यह कहने कि किसी को इस बच्ची के पापा मिलें तो उन्हें यहाँ ले आने की सलाह देता है।

प्रश्न 6.
क्या वजह थी कि सभी पात्र मिलकर भी लड़की को उसके घर नहीं पहुँचा पा रहे थे।
उत्तर-
किसी को उसके घर का पता मालूम नहीं था। वह लड़की इतनी छोटी और भोली थी कि वह ठीक ढंग से अपने पिता का नाम और घर का पता नहीं बता पा रही थी। यही कारण था कि सभी पात्र मिलकर भी उस बच्ची को उसके घर नहीं पहुँचा पा रहे थे।

नाटक से आगे

प्रश्न 1.
अपने-अपने घर का पता लिखिए तथा चित्र बनाकर वहाँ पहुँचने का रास्ता भी बताइए।
उत्तर-
बच्चे अपने-अपने घर का पता लिखें तथा चित्र बनाकर रास्ता भी बताएँ।
उदाहरणस्वरूप
वी० 4/13 जी० एफ०-1
डी०एल०एफ० अंकुर विहार

शिव
मंदिर एम०एम० रोड 120 फुट बी० ब्लॉक

प्रश्न 2.
मराठी से अनूदित इस नाटक का शीर्षक ‘पापा खो गए’ क्यों रखा गया होगा? अगर आपके मन में कोई दूसरा शीर्षक हो तो सुझाइए और साथ में कारण भी बताइए।
उत्तर
इस नाटक का शीर्षक ‘पापा खो गए’ इसलिए रखा गया क्योंकि लड़की को अपने पिता का नाम व घरे का पता मालूम नहीं था। इस अनोखे शीर्षक के द्वारा ही लोग और पुलिस आकर्षित होकर उस बालिका को घर पहुँचाने की कोशिश करेंगे।

इसका अन्य शीर्षक ‘गुमशुदा लड़की’ रखा जा सकता है जो प्रायः माता-पिता की ओर से पुलिस में रिपोर्ट लिखवाने के समय दिया जाता है।

प्रश्न 3.
क्या आप बच्ची के पापा को खोजने का नाटक से अलग कोई और तरीका बता सकते हैं?
उत्तर
समाचार पत्रों में, पोस्टरों में या दूरदर्शन पर उसका चित्र दिखाकर लोगों का ध्यान आकर्षित करके, उसके पापा को खोजा जा सकता है।

अनुमान और कल्पना

प्रश्न 1.
अनुमान लगाइए कि जिस समय बच्ची को चोर ने उठाया होगा वह किस स्थिति में होगी? क्या वह पार्क मैदान में खेल रही होगी या घर से रूठकर भाग गई होगी या कोई अन्य कारण होगा?
उत्तर-
जिस समय बच्ची को चोर ने उठाया होगा उस समय वह सो रही थी क्योंकि स्वयं बच्ची को उठाने वाले उस व्यक्ति ने कहा था।

प्रश्न 2.
नाटक में दिखाई गई घटना को ध्यान में रखते हुए यह भी बताइए कि अपनी सुरक्षा के लिए आजकल बच्चे क्या-क्या कर सकते हैं। संकेत के रूप में नीचे कुछ उपाय सुझाए जा रहे हैं। आप इससे अलग कुछ और उपाय लिखिए।

  • समूह में चलना।
  • एकजुट होकर बच्चा उठानेवालों या ऐसी घटनाओं का विरोध करना।
  • अनजान व्यक्तियों से सावधानीपूर्वक मिलना।

उत्तर
अन्य उपाय

  1. बच्चों को अपने पिता का नाम व घर का पता मालूम होना चाहिए।
  2. घर के पास किसी विशेष स्थान का नाम भी पता होना चाहिए।
  3. बच्चों को अपने घर का दूरभाष नंबर भी याद होना चाहिए।
  4. माता-पिता को भी चाहिए कि बच्चों को घर से बाहर भेजते समय उनकी जेब में एक पर्ची पर उनका नाम, पता व दूरभाष नंबर लिखकर डालें।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
आपने देखा होगा कि नाटक के बीच-बीच में कुछ निर्देश दिए गए हैं। ऐसे निर्देशों से नाटक के दृश्य स्पष्ट होते हैं, जिन्हें नाटक खेलते हुए मंच पर दिखाया जाता है, जैसे-‘सड़क/रात का समय … दूर कहीं कुत्तों के भौंकने की आवाज़।’ यदि आपको रात का दृश्य मंच पर दिखाना हो तो क्या-क्या करेंगे, सोचकर लिखिए।
उत्तर
यदि हमें रात का दृश्य मंच पर दिखाना हो तो हम दिखाएँगे-
रात का समय, लंबी सड़क, दूर टिमटिमाता एक छोटा-सा बल्ब, साँय-साँय चलती हवा, भयानक आवाज़ से झूमते पेड़।

प्रश्न 2.
पाठ को पढ़ते हुए आपका ध्यान कई तरह के विराम चिह्नों की ओर गया होगा। दिए गए अंश से विराम चिह्नों को हटा दिया गया है। ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा उपयुक्त चिह्न लगाइए-
मुझ पर भी एक रात आसमान से गड़गड़ाती बिजली आकर पड़ी थी अरे बाप रे वो बिजली थी या आफ़त याद आते ही अब भी दिल धक-धक करने लगता है और बिजली जहाँ गिरी थी वहाँ खड़ा कितना गहरा पड़ गया था खंभे महाराज अब जब कभी बारिश होती है तो मुझे उस रात की याद हो आती है, अंग थरथर काँपने लगते हैं।
उत्तर
मुझ पर भी एक रात आसमान से गड़गड़ाती बिजली आकर पड़ी थी। अरे, बाप रे! वो बिजली थी या आफत! याद आते ही अब भी दिल धक-धक करने लगता है और बिजली जहाँ गिरी थी वहाँ खड़ा कितना गहरा पड़ गया था, खंभे महाराज! अब जब कभी बारिश होती है तो मुझे उसे रात की याद हो आती है। अंग थरथर काँपने लगते

प्रश्न 3.
आसपास की निर्जीव चीजों को ध्यान में रखकर कुछ संवाद लिखिए, जैसे-
चॉक का ब्लैक बोर्ड से संवाद
कलम को कॉपी से संवाद
खिड़की को दरवाजे से संवाद
उत्तर
चॉक का ब्लैक बोर्ड से संवाद

चॉक-भैया ब्लैक बोर्ड! कितने वर्षों से दीवार पर टॅग रहे हो?
ब्लैक बोर्ड-लगभग पाँच वर्ष हो गए।
चॉक-जब मैं तुम पर घिसा जाता हूँ तो क्या तुम्हें दर्द नहीं होता?
ब्लैक बोर्ड-चॉक! क्या बात करते हो? अरे! दर्द क्यों होगा? मुझे तो प्रसन्नता होती है कि जितना तुम्हें मुझ पर घिसा जाता है उतना ही विद्यार्थी कुछ नया सीखते हैं।
चॉक-यह तो है!
ब्लैक बोर्ड-क्या तुम्हें मुझ पर घिसना अच्छा लगता है?
चॉक-मुझे तो तुम पर घिसना बहुत अच्छा लगता है क्योंकि जब-जब मुझे शिक्षक घिसने हेतु उठाता है मुझे लगता है कि मैं उनका हथियार हूँ। कितने ही बौद्धिक शब्द मुझसे आकृति पाते हैं।
ब्लैक बोर्ड-हम दोनों के बिना ही शिक्षक का काम नहीं चल सकता।

• कलम का कॉपी से संवाद

कलम-कॉपी! क्या मेरा तुम पर घिसे जाना तुम्हें अच्छा लगता है?
कॉपी-जब तुम्हारे द्वारा विद्यार्थी या अन्य लोग मुझ पर सुंदर-सुंदर शब्द लिखते हैं तो मैं फूली नहीं समाती।
कलम-सच!
कॉपी-लेकिन कभी-कभी तुम्हारी स्याही मुझ पर फैल जाती है तो मुझे बहुत दुख होता है। मेरी सुंदरता बिगड़ जाती है।
कलम-मैं ऐसा बिलकुल नहीं चाहती लेकिन कई बार मुझे सावधानी से चलाया नहीं जाता तो ऐसा होता है।
कॉपी-मुझे तो तुम पर नाज़ होता है क्योंकि तुम्हारे बिना तो मेरा होना न होना एक समान है। तुम ही तो मुझे उपयोगी बनाती हो। मैं तहे दिल से तुम्हारा धन्यवाद करती हूँ।
कलम-ऐसा न कहो, तुम्हारे बिना मेरी भी कोई उपयोगिता नहीं है।

• खिड़की का दरवाज़े से संवाद

खिड़की-दरवाजे भैया! क्या कर रहे हो?
दरवाज़ा-क्या करूं सुबह से परेशान हूँ, न जाने इस घर में आज क्या कार्यक्रम है? इतने लोग आते जा रहे हैं और मुझे बार-बार खुलना बंद होना पड़ रहा है।
खिड़की-परेशान क्यों होते हो?
दरवाज़ा-क्यों! क्या मैं थकता नहीं?
खिड़की-‘भाग्यवान हो’ दरवाजे भैया! कितने लोगों को रास्ता देते हो। एक मैं हूँ, सुबह खुलती हैं तो रात को बंद होती हैं। हाँ! अगर बारिश या तेज़ हवा चल रही हो तो उसी समय धड़ाम से बंद कर दी जाती हैं।
दरवाज़ा-मुझे देखो, सारा दिन खुलना बंद होना। बस यही मेरा काम है और यदि घर वाले कहीं जाएँगे तो इतना बड़ा ताला लगा देंगे कि मैं उस ताले में फँसा-हँसा ही थक जाता हूँ।
खिड़की-मेरा काम तो चिटकनी से ही चल जाता है।
खिड़की-दरवाजे भैया! हर हाल में खुश रहना सीखो! इसी का नाम जीवन है।

प्रश्न 4.
उपर्युक्त में से दस-पंद्रह संवादों को चुनें, उनके साथ दृश्यों की कल्पना करें और एक छोटा-सा नाटक लिखने का प्रयास करें। इस काम में अपने शिक्षक से सहयोग लें।
उत्तर-
छात्र स्वयं करें या शिक्षक की सहायता लेकर कार्य करें।

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NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 3 हिमालय की बेटियाँ (नागार्जुन)

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Board CBSE
Textbook NCERT
Class Class 7
Subject Hindi Vasant
Chapter Chapter 3
Chapter Name हिमालय की बेटियाँ (नागार्जुन)
Number of Questions Solved 17
Category NCERT Solutions

NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 3 हिमालय की बेटियाँ (नागार्जुन)

 

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास
(पृष्ठ 15-17)

लेख से

प्रश्न 1.
नदियों को माँ मानने की परंपरा हमारे यहाँ काफ़ी पुरानी है। लेकिन लेखक नागार्जुन उन्हें और किन रूपों में देखते हैं?
उत्तर-
हमारी भारतीय संस्कृति में नदियों को माँ मानने की परंपरा काफ़ी पुरानी है। लेकिन इस निबंध में लेखक ने बेटी, प्रेयसी तथा बहन के रूप में प्रस्तुत किया है। इस पाठ में नदियाँ हिमालय की बेटियाँ हैं। नदियों को बादलों की प्रेयसी के रूप प्रस्तुत किया गया है। इसके अतिरिक्त लेखक ने नदियों को बहन के रूप में दिखाया है।

प्रश्न 2.
सिंधु और ब्रह्मपुत्र की क्या विशेषताएँ बताई गई हैं?
उत्तर
सिंधु और ब्रह्मपुत्र हिमालय की दो ऐसी नदियाँ हैं जिन्हें ऐतिहासिकता के आधार पर पुल्लिग रूप में नद भी माना गया है। कहा जाता है कि ये दो ऐसी नदियाँ हैं जो दयालु हिमालय के पिघले हुए दिल की एक-एक बूंद से निर्मित हुई हैं। इनका रूप विशाल और विराट है। इनका रूप इतना लुभावना है कि सौभाग्यशाली समुद्र भी पर्वतराज हिमालय की इन दो बेटियों का हाथ थामने पर गर्व महसूस करता है।

प्रश्न 3.
काका कालेलकर ने नदियों को लोकमाता क्यों कहा है?       [Imp.]
उत्तर
नदियाँ हमें जल प्रदान कर जीवनदान देती हैं। ये युगों-युगों से पूजनीय व मनुष्य हेतु कल्याणकारी रही हैं। इनका जल भूमि की उर्वराशक्ति बढ़ाने में विशेष भूमिका निभाता है। मानव के आधुनिकीकरण में जैसे-बिजली बनाना, सिंचाई के नवीन साधनों आदि में इन्होंने पूरा सहयोग दिया है। मानव ही नहीं अपितु पशु-पक्षी, पेड़-पौधों आदि के लिए जल बहुत जरूरी है।

इतनी कल्याणकारी होने पर भी नदियों को कल-कारखानों से निकलने वाले विष रूपी प्रदूषित जल, गंदे रसायन पदार्थ, लोगों द्वारा दूषित किया गया जल जैसे-कपड़े धोना, पशु नहलाना व अन्य कूड़ा-करकट भी अपने आँचल में ही समेटना पड़ता है। लेकिन फिर भी ये नदियाँ कल्याण ही करती हैं। ‘अपार दुख सहकर भी कल्याण’ केवल ‘माता’ ही कर सकती है।

इसीलिए हम कह सकते हैं कि काका कालेलकर का नदियों को लोकमाता की संज्ञा देना कोई अतिशयोक्ति नहीं।

प्रश्न 4.
हिमालय की यात्रा में लेखक ने किन-किन की प्रशंसा की है?
उत्तर
हिमालय की यात्रा में लेखक ने नदियों, झरनों, हिमालय की बर्फीली चोटियों, गगनचुंबी पर्वतों, विशाल मैदानों, सागरों तथा महासागरों की भूरि-भूरि प्रशंसा की है।

लेख से आगे

प्रश्न 1.
नदियों और हिमालय पर अनेक कवियों ने कविताएँ लिखी हैं। उन कविताओं का चयन कर उनकी तुलना पाठ में निहित नदियों के वर्णन से कीजिए।
उत्तर-
यह लघु सरिता का बहता जल,
कितना शीतल कितना निर्मल।
हिमगिरि के हिम से निकल-निकल,
यह विमल दूध-सा हिम का जल,
कर-कर निनाद कल-कल छल-छल
बहता आता नीचे पल-पल।
तन का चंचल, मन का विह्वल,
यह लघु सरिता का बहता जल।
निर्मल जल की यह तेज़ धार,
करके कितनी श्रृंखला पार,
बहती रहती है लगातार
गिरती उठती है बार-बार
रखता है तन में उतना बल,
यह लघु सरिता का बहता जल।
करके तरु फूलों का सिंचन,
लघु जल-धारों से आलिंगन
जल कुंडों में करते नर्तन,
करके अपना बहु परिवर्तन।
आगे बढ़ता जाता केवल,
यह लघु सरिता का बहता जल।
मिलता है इसको जब पथ पर,
पथ रोके खड़ा कठिन पत्थर,
आकुल आतुर दुख से कातर
सिर पटक-पटककर रो-रोकर
करता है कितना कोलाहल,
यह लघु सरिता का बहता जल॥
हिम के पत्थर वे पिघल-पिघल,
बन गए धरा के वारि विमल,
सुख पाता जिससे पथिक विकल,
पी-पी कर अंजलि भर मृदु जल।
नित जलकर भी कितना शीतल,
यह लघु सरिता का बहता जल।
कितना कोमल, कितना वत्सल,
रे! जननी का वह अंतस्तल,
जिसका यह शीतल करुणा जल,
बहता रहता युग-युग अविरल।
गंगा, यमुना, सरयू निर्मल,
यह लघु सरिता का बहता जल।
-गोपालसिंह ‘नेपाली’

प्रस्तुत कविता में नदी की गति, रूप, रंग और स्वभाव का अत्यंत सुंदर चित्रण हुआ है। नदी हिमालय से निकलती है, इसलिए इसका जल धवल, निर्मल एवं शीतल होता है। यह कलकल स्वर में गाती, बाधा विघ्नों में संघर्ष करती हुई आगे बढ़ती जाती है। समतल भूमि पर भी इसके कोमल पैर को कंकड़ पर पैदल चलना पड़ता है, फिर भी यह सदानीरा कभी विश्राम नहीं करती। सूर्य की गरमी में जलकर भी यह हमें शीतलता प्रदान करती है। नदी की चंचलता और शीतलता देखकर कवि को आश्चर्य होता है। नदियों के जीवन का मूल उद्देश्य प्राणी मात्र का पालन करना है और एक माँ के समान समस्त जीवों का बिना किसी भेदभाव के पालन-पोषण करती हुई अपना कर्तव्य पूरा करना है। इस कविता को पढ़कर सुंदरता का आनंद तो मिलता ही है, साथ ही मानव के लिए संदेश है कि वह सदैव कार्यरत रहे।

हिमालय पर कविता

खड़ा हिमालय बता रहा है।
डरो न आँधी पानी में।
खड़े रहो तुम अविचल होकर
सब संकट तूफ़ानों में।।
डिगो न अपने प्रण से, तो तुम
सब कुछ पा सकते हो प्यारे,
तुम भी ऊँचे उठ सकते हो
छू सकते हो नभ के तारे।
अचल रहा जो अपने पथ पर
लाख मुसीबत आने में ।
मिली सफलता जग में उसको
जीने में मर जाने में।
-सोहनलाल द्विवेदी

उपरोक्तं कविता में हिमालय द्वारा मुसीबतों से न घबराते हुए जीवन में आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा दे रहे हैं जबकि इस कविता में अपनी बेटियों द्वारा घर का त्याग कर जाने से हिमालय पछताता रहता है।

प्रश्न 2.
गोपालसिंह नेपाली की कविता ‘हिमालय और हम’, रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कविता ‘हिमालय’ तथा जयशंकर प्रसाद की कविता ‘हिमालय के आँगन में पढ़िए और तुलना कीजिए।
उत्तर

कविता-हिमालय और हम
कवि-गोपालसिंह नेपाली

  1. इतनी ऊँची इसकी चोटी कि सकल धरती का ताज यही ।
    पर्वत–पहाड़ से भरी धरा पर केवल पर्वतराज यही
    अंबर में सिर-पाताल चरन
    मन इसका गंगा का बचपन
    तन वरन-वरन मुख निरावरन
    इसकी छाया में जो भी है, वह मस्तक नहीं झुकाता है।
    गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा नाता है।
  2. जैसा यह अटल, अडिग-अविचल, वैसे ही हैं भारतवासी
    हैं अमर हिमालय धरती पर, तो भारतवासी अविनाशी
    कोई क्या हमको ललकारे
    हम कभी न हिंसा से हारे
    दुख देकर हमको क्या मारे
    गंगा का जल जो भी पी ले, वह दुख में भी मुसकाता है।
    गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है।
  3. अरुणोदय की पहली लाली इसको ही चूम निखर जाती ।
    फिर संध्या की अंतिम लाली इस पर ही झूम बिखर जाती
    इन शिखरों की माया ऐसी ।
    जैसा प्रभात, संध्या वैसी
    अमरों को फिर चिंता कैसी
    इस धरती का हर लाल खुशी से उदय-अस्त अपनाता है।
    गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है।।

इस कविता की तुलना यदि हम पाठ हिमालय से करें तो पाएँगे कि गोपाल सिंह नेपाली ने इस कविता में यह दर्शाया है कि हिमालय का भारतवासियों से प्राचीन काल से ही अत्यंत घनिष्ठ संबंध है। भारत-धरती का मुकुट हिमालय पर्वत अपनी जड़ों को पाताल तक ले जाए हुए है। उसके धवल शिखर आकाश का चुंबन करते हैं। सुबह और शाम के समय सूर्य की लालिमा इसे चूम कर निखर उठती है। इसकी छाया सागर और गंगा के समान लंबी है। यह अचल और अडिग है। बादल और तूफ़ान इससे टकराकर अपनी हार मान लेते हैं। भारतवासियों के जीवन पर हिमालय का स्पष्ट प्रभाव है क्योंकि वे भी हिमालय की तरह आत्माभिमानी और दृढ़निश्चयी है। हिमालय से निकलने वाली गंगा की पावनधारा सभी के दुखों को समाप्त कर देती है। यही कारण है कि यहाँ गांधी जैसे कर्मठ और युगचेता महापुरुषों ने जन्म लिया है।

जबकि पाठ हिमालय में लेखक नागार्जुन ने यह दर्शाया है कि हिमालय पर्वत से निकलने वाली नदियाँ किस स्वरूप से हिमालय की गोद से निकलती हैं? हिमालय उनका पिता और निकलने वाली नदियाँ उसकी बेटियाँ प्रतीत होती हैं।

प्रश्न 3.
यह लेख 1947 में लिखा गया था। तब से हिमालय से निकलनेवाली नदियों में क्या-क्या बदलाव आए हैं?
उत्तर
1947 से लेकर कुछ दशकों तक तो नदियाँ निर्मल, कांतिमान और नीरोगता प्रदान करने वाली थीं। किंतु जनसंख्या वृद्धि, औद्योगिक क्रांति, मननीय तथा प्रशासकीय उपेक्षा के कारण इनमें औषधीय गुण समाप्त हो गए हैं। निरंतर प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। जगह-जगह बांध बनने के कारण जल-प्रवाह में न्यूनती हो गई जोकि मानव के लिए हितकर नहीं है।

प्रश्न 4.
अपने संस्कृत शिक्षक से पूछिए कि कालिदास ने हिमालय को देवात्मा क्यों कहा है?
उत्तर
हिमालय पर्वत पर देवताओं का वास माना जाता है। ऋषि-मुनि यहाँ निरंतर पूजा-अर्चना व तपस्या करते हैं इसीलिए कालिदास ने हिमालय को देवात्मा कहा।

अनुमान और कल्पना

प्रश्न 1.
लेखक ने हिमालय से निकलनेवाली नदियों को ममता भरी आँखों से देखते हुए उन्हें हिमालय की बेटियाँ कहा है। आप उन्हें क्या कहना चाहेंगे? नदियों की सुरक्षा के लिए कौन-कौन से कार्य हो रहे हैं? जानकारी प्राप्त करें और अपना सुझाव दें।
उत्तर
लेखक का नदियों को हिमालय की बेटियाँ कहना बिल्कुल सही है हम भी उन्हें हिमालय की बेटियाँ ही कहेंगे क्योंकि हिमालय की गोदी में नदियाँ बच्चियों की भाँति खेलती हुई निकलती हैं। वर्तमान में नदियों की सुरक्षा हेतु निम्न कार्य किए जा रहे हैं-

  1. नदियों के जल को प्रदूषण से बचाना।
  2. बहाव को सही दिशा देना।
  3. अधिक नहरें न निकालना।
  4. जल का कटाव रोकना।

नोट-इस हेतु अधिक जानकारी इंटरनेट की सहायता से प्राप्त करें व नदियों की सुरक्षा हेतु अपने सुझाव सोचिए।

प्रश्न 2.
नदियों से होनेवाले लाभों के विषय में चर्चा कीजिए और इस विषय पर बीस पंक्तियों का एक निबंध लिखिए।
उत्तर-
नदियाँ हमारे जीवन में प्राचीन काल से ही उपयोगी रही हैं। ये हमारी संस्कृति की पहचान हैं। ये हमारे जीवन का आधार हैं। नदियों के किनारे हमारे तीर्थस्थल हैं। इनके आस-पास का क्षेत्र उपजाऊ होता है। गंगा-यमुना का क्षेत्र इसी कारण अधिक उपजाऊ है, क्योंकि सिंचाई के लिए सरलता से जल वहीं मिल सकता है। सदियों से नदियाँ आगमन तथा व्यापार का माध्यम रही हैं तथा नदियों की सीमा होने से शत्रुओं से रक्षा भी हो जाती थी क्योंकि सेना लेकर नदी पार करना कठिन कार्य था। आज के समय में भी नदियों की उपयोगिता कम नहीं हुई है। इनका जल सिंचाई के काम में आता है। अनगिनत जीव इनसे जीवन पाते हैं। नदियों के किनारे लोग अपनी छोटी-बड़ी सभी आवश्यकताएँ जैसे सिंचाई करने, पानी पीने, कपड़े धोने, नहाने, जानवरों के लिए पानी आदि का उपयोग करते हैं। नदियों पर बाँध बनाए गए हैं। इनसे बिजली तैयार की जा रही है। इसे ‘हाइड्रो इलेक्ट्रिीसिटी’ कहा जाता है। इस प्रकार नदियों ने रोजगार में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान भी दिया है तथा आधुनिकीकरण में भी अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
अपनी बात कहते हुए लेखक ने अनेक समानताएँ प्रस्तुत की हैं। ऐसी तुलना से अर्थ अधिक स्पष्ट एवं सुंदर बन जाता है। उदाहरण
(क) संभ्रांत महिला की भाँति वे प्रतीत होती थीं।
(ख) माँ और दादी, मौसी और मामी की गोद की तरह उनकी धारा में डुबकियाँ लगाया करता।
• अन्य पाठों से ऐसे पाँच तुलनात्मक प्रयोग निकालकर कक्षा में सुनाइए और उन सुंदर प्रयोगों को कॉपी में भी लिखिए।
उत्तर

  1. दादी माँ शापभ्रष्ट देवी-सी लगीं।
  2. सागर की हिलोर की भाँति उसका यह मादक गान-गली भर के मकानों में इस ओर से उस ओर| तक लहराता हुआ पहुँचता और खिलौने वाला आगे बढ़ जाता।
  3. बच्चे ऐसे सुंदर थे जैसे सोने के सजीव खिलौने।
  4. संध्या को स्वप्न की भाँति गुजार देते हैं।
  5. मेघों की साँवली छाया में अपने इंद्रधनुष के गुच्छे जैसे पंखों को मंडलाकार बनाकर जब वह नाचता | था तब उस नृत्य में एक सहजात लय ताल रहती थी।

प्रश्न 2.
निर्जीव वस्तुओं को मानव-संबंधी नाम देने से निर्जीव वस्तुएँ भी मानो जीवित हो उठती हैं। लेखक ने इस पाठ में कई स्थानों पर ऐसे प्रयोग किए हैं, जैसे
(क) परंतु इस बार जब मैं हिमालय के कंधे पर चढ़ा तो वे कुछ और रूप में सामने थीं।
(ख) काका कालेलकर ने नदियों को लोकमाता कहा है।
• पाठ से इसी तरह के और उदाहरण ढूंढिए।
उत्तर

  1. संभ्रांत महिला की भाँति प्रतीत होती थी।
  2. इनका उछलना और कूदना, खिलखिलाकर हँसते जाना, इनकी भाव-भंगी, इनका यह उल्लास कहाँ गायब हो जाता है।
  3. पिता का विराट प्रेम पाकर भी अगर इनका हृदय अतृप्त ही है तो कौन होगा जो इनकी प्यास मिटा सकेगा।
  4. बुङ्का हिमालय अब इनकी नटखट बेटियों के लिए कितना सिर धुनता होगा।
  5. हिमालय की छोटी-बड़ी सभी बेटियाँ आँखों के सामने नाचने लगती हैं।

प्रश्न 3.
पिछली कक्षा में आप विशेषण और उसके भेदों से परिचय प्राप्त कर चुके हैं। नीचे दिए गए विशेषण और विशेष्य (संज्ञा) का मिलान कीजिएविशेषण
NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 3 हिमालय की बेटियाँ (नागार्जुन) 3

उत्तर-
NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 3 हिमालय की बेटियाँ (नागार्जुन) 4

प्रश्न 4.
द्वंद्व समास के दोनों पद प्रधान होते हैं। इस समास में ‘और’ शब्द का लोप हो जाता है, जैसे-राजा-रानी द्वंद्व समास है जिसका अर्थ है राजा और रानी। पाठ में कई स्थानों पर द्वंद्व समासों का प्रयोग किया गया है। इन्हें खोजकर वर्णमाला क्रम (शब्दकोश-शैली) में लिखिए।
उत्तर-
पाठ में आए द्वंद्व समास के अन्य उदाहरण
उछलना-कूदना
माँ-बाप
दुबली-पतली
भाव-भंगी
नंग-धडंग

प्रश्न 5.
नदी को उलटा लिखने से दीन होता है जिसका अर्थ होता है गरीब। आप भी पाँच ऐसे शब्द लिखिए जिसे उलटा लिखने पर सार्थक शब्द बन जाए। प्रत्येक शब्द के आगे संज्ञा का नाम भी लिखिए, जैसे-नदी-दीन (भाववाचक संज्ञा)।
उत्तर

  1. याद – दया    (भाववाचक संज्ञा)
  2.  मरा – राम    (व्यक्तिवाचक संज्ञा)
  3.  भला – लाभ   (भाववाचक संज्ञा)
  4.  राही – हीरा   (द्रव्यवाचक संज्ञा)
  5.  नशा – शान   (भाववाचक संज्ञा)

प्रश्न 6.
समय के साथ भाषा बदलती है, शब्द बदलते हैं और उनके रूप बदलते हैं, जैसे-बेतवा नदी के नाम का दूसरा रूप ‘वेत्रवती’ है। नीचे दिए गए शब्दों में से हूँढकर इन नामों के अन्य रूप लिखिए-
NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 3 हिमालय की बेटियाँ (नागार्जुन) 1

उत्तर
NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 3 हिमालय की बेटियाँ (नागार्जुन) 2

प्रश्न 7.
उनके खयाल में शायद ही यह बात आ सके कि बूढे हिमालय की गोद में बच्चियाँ बनकर ये कैसे खेला करती हैं।’
• उपर्युक्त पंक्ति में ‘ही’ के प्रयोग की ओर ध्यान दीजिए। ‘ही’ वाला वाक्य नकारात्मक अर्थ दे रहा है। इसीलिए ‘ही’ वाले वाक्य में कही गई बात को हम ऐसे भी कह सकते हैं-उनके खयाल में शायद यह बात न आ सके।
• इसी प्रकार नकारात्मक प्रश्नवाचक वाक्य कई बार ‘नहीं’ के अर्थ में इस्तेमाल नहीं होते हैं, जैसे-महात्मा गाँधी को कौन नहीं जानता? दोनों प्रकार के वाक्यों के समान तीन-तीन उदाहरण सोचिए और इस दृष्टि से उनको विश्लेषण कीजिए।
उत्तर

  1. वे शायद ही यह सोच पाएँ कि मैं तुम्हारे साथ आऊँगा।
  2. उन्होंने शायद ही जाना हो कि मैं बीमार हूँ।
  3. राम शायद ही यह सीख पाए कि गरीबों की सेवा करना ही मानव धर्म है।

 

  1. रमा के स्वभाव को कौन नहीं पहचानता?
  2. दु:शासन की चालें किसने नहीं जानीं?
  3. विभीषण की करतूत कौन नहीं जानता?

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NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 2 दादी माँ (शिवप्रसाद सिंह)

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Board CBSE
Textbook NCERT
Class Class 7
Subject Hindi Vasant
Chapter Chapter 2
Chapter Name दादी माँ (शिवप्रसाद सिंह)
Number of Questions Solved 10
Category NCERT Solutions

NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 2 दादी माँ (शिवप्रसाद सिंह)

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास
(पृष्ठ 10-11)

कहानी से

प्रश्न 1.
लेखक को अपनी दादी माँ की याद के साथ-साथ बचपन की और किन-किन बातों की याद आ जाती है?
उत्तर-
लेखक को अपनी दादी माँ की याद के अलावे बचपन की अन्य निम्नलिखित बातें याद आती हैं

  • अपने मित्रों और शुभचिंतकों को खुश करने के लिए छुट्टियों की सूचना देना तथा पीठ पीछे उनका मजाक उड़ना।
  • गंधपूर्ण झागभरे जलाशयों में कूदना, बीमार होने पर दादी का दिन-रात सेवा करना।
  • किशन भैया की शादी में औरतों का अभिनय छुपकर देखना। रामी चाची की घटना-पहले डाँटना फिर बाद में आशीर्वाद देना।
  • मुसीबत के समय पिता जी को तसल्ली देने की घटना आदि भी याद आती है।

प्रश्न 2.
दादा की मृत्यु के बाद लेखक के घर की आर्थिक स्थिति खराब क्यों हो गई थी?
उत्तर
दादा की मृत्यु के पश्चात् लेखक की आर्थिक स्थिति खराब हो गई क्योंकि पिताजी व भैया ने धन का सही उपयोग न किया। गलत मित्रों की संगति से सारा धन नष्ट कर डाला। इसके अलावा पिताजी ने दादा के श्राद्ध में दादी माँ के मना करने पर भी अपार संपत्ति उधार लेकर व्यय की।

प्रश्न 3.
दादी माँ के स्वभाव का कौन सा पक्ष आपको सबसे अच्छा लगता है और क्यों?
उत्तर
दादी माँ का सेवा, संरक्षण, परोपकारी व सरल स्वभाव आदि का पक्ष हमें सबसे अच्छा लगता है क्योंकि इन्हीं के कारण ही वे दूसरों का मन जीतने में सदा सफल रहीं।
लेखक के बीमार होने पर दादी द्वारा उसकी सेवा करना, रामी चाची की बेटी की शादी पर उसके घर जाकर उसकी सहायता करना व पिछला ऋण माफ़ करना, पिताजी की आर्थिक तंगी देखकर दादा की निशानी का प्रतीक सोने का कंगन उन्हें देना आदि दर्शाता है कि दूसरों की सहायता करनां वे अपने जीवन का कर्तव्य समझती थीं।

कहानी से आगे

प्रश्न 1.
आपने इस कहानी में महीनों के नाम पढ़े, जैसे-क्वार, आषाढ़, माघ। इन महीनों में मौसम कैसा रहता है? लिखिए।
उत्तर-
कहानी में आए क्वार, आषाढ़, माघ महीनों का मौसम अलग-अलग होता है; जैसे
क्वार-(न अधिक गरमी न अधिक सरदी) इसमें गरमी का अंत हो रहा होता है। हलकी-हलकी ठंड शुरू हो जाती है। दशहरा इस मास का प्रमुख त्योहार है। इस मास में पोखर, तालाब और धान के खेतों में पानी भरा होता है।

आषाढ़-वर्षा ऋतु का पहला महीना होता है। इस महीने में गरमी अपने चरम सीमा पर होती है। इस महीने में वर्षा का आरंभ होने से गरमी से राहत मिलती है। वायुमंडल में आर्द्रता बढ़ जाती है।

माघ-इस महीने में सरदी अपने चरम पर होती है। कभी-कभी तापमान शून्य से भी नीचे चला जाता है और पाला पड़ जाता है। ऐसे में सरदी और ठंड बढ़ जाती है। इस महीने में पछुआ हवा चलने से सरदी और अधिक बढ़ जाती है।

प्रश्न 2.
अपने-अपने मौसम की अपनी-अपनी बातें होती हैं’-लेखक के इस कथन के अनुसार यह बताइए कि किस मौसम में कौन-कौन सी चीजें विशेष रूप से मिलती हैं?
उत्तर
सरदी, गरमी, बरसात तीन मौसम मुख्य रूप से माने जाते हैं।

  1. सरदी-सरदी के मौसम में अत्यधिक ठंड पड़ती है। लोग गर्म पेय पीना पसंद करते हैं। फलों में सेब, अमरूद, केले व अंगूर तथा सब्ज़ियों में पालक, बथुआ, सरसों, मटर, फूलगोभी, बंदगोभी व मूली आदि अधिक मात्रा में मिलते हैं।
  2. गरमी-गरमी के मौसम में अत्यधिक गरमी पडती है। गर्म पेय का स्थान ठंडे पेय ले लेते हैं। फलों में खरबूजे, तरबूज, लीची व आम तथा सब्ज़ियों में भिंडी, टिंडा, तोरई, घीया, कटहल, खीरा, ककड़ी आदि अधिक मिलते हैं।
  3. बरसात-इस मौसम में अत्यधिक वर्षा होती है। फलों में कई किस्म के आम, आलूबुखारा, खुरमानी नामक वसंत फल व सब्ज़ियों में पालक, फलियाँ, बैंगन, करेले, कमलककड़ी आदि मिलते हैं। इनके साथ गरमी के मौसम वाले फल व सब्ज़ियाँ भी बराबर मात्रा में उपलब्ध रहते हैं।

अनुमान और कल्पना

प्रश्न 1.
इस कहानी में कई बार ऋण लेने की बात आपने पढ़ी। अनुमान लगाइए, किन-किन पारिवारिक परिस्थितियों में गाँव के लोगों को ऋण लेना पड़ता होगा और यह उन्हें कहाँ से मिलता होगा? बड़ों से बातचीत कर इस विषय में लिखिए।
उत्तर
गाँवों के लोगों को निम्न परिस्थितियों में ऋण लेना पड़ता होगा-

  1. फसलें किसी भी वज़ह से नष्ट हो जाने पर दूसरी फसल उगाने हेतु।
  2. शादी-ब्याह के समय।
  3. बच्चे के नामकरण संस्कार अथवा किसी अन्य समारोह हेतु।
  4. मृत्यु भोज हेतु।
  5. घर आदि बनवाने हेतु।
  6. कभी-कभार किसी बच्चे की उच्च शिक्षा हेतु।
  7. पशु खरीदने हेतु।

यह ऋण उन्हें गाँव के जमींदारों व साहूकारों से मिलता होगा।
यदि आज के संदर्भ में लें तो गाँववासियों को ऐसे ऋण सहकारी समितियों व बैंकों द्वारा भी मिल सकते हैं। इसके अतिरिक्त अपने घर में बड़ों से चर्चा भी कीजिए।

प्रश्न 2.
घर पर होनेवाले उत्सवों/समारोहों में बच्चे क्या-क्या करते हैं? अपने और अपने मित्रों के अनुभवों के आधार पर लिखिए।
उत्तर-
घर पर होने वाले उत्सवों, समारोहों में बच्चे नए-नए कपड़े पहनकर मौज-मस्ती करते हैं, कई प्रकार के व्यंजनों का आनंद लेते हैं, नाच-गाकर खूब आनंद-मजे लेते हैं। बच्चे इन दिनों पढ़ाई-लिखाई के भार से मुक्त हो जाते हैं। बड़ों की व्यस्तता के कारण वे डाँट-डपट से भी बच जाते हैं।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
नीचे दी गई पंक्तियों पर ध्यान दीजिए

ज़रा-सी कठिनाई पड़ते
अनमना-सा हो जाता है
सन-से सफ़ेद

• समानता का बोध कराने के लिए सा, सी, से का प्रयोग किया जाता है। ऐसे पाँच और शब्द लिखिए और उनका वाक्य में प्रयोग कीजिए।
उत्तर

  1. बर्फ-सा ठंडा शरीर-बुखार उतरते ही उसका शरीर बर्फ-सा ठंडा हो गया।
  2. मिश्री-सी मीठी-बच्चों की मिश्री-सी मीठी बातें कानों को बहुत आनंद देती हैं।
  3. हल्दी-सा पीला-घर की परेशानियाँ झेलते-झेलते आदित्य इतना कमजोर हो गया है कि उसका रंग हल्दी-सा पीला लगने लगा है।
  4. भंवरे से-भारती के बाल सँवरे से काले है।
  5. सागर-सा गहरा-कबीर का ज्ञान सागर-सा गहरा था।

प्रश्न 2.
कहानी में छू-छूकर ज्वर का अनुमान करतीं, पूछ-पूछकर घरवालों को परेशान कर देतीं’-जैसे वाक्य आए हैं। किसी क्रिया को जोर देकर कहने के लिए एक से अधिक बार एक ही शब्द का प्रयोग होता है। जैसे वहाँ जाजाकर थक गया, उन्हें ढूंढ-ढूँढ़कर देख लिया। इस प्रकार के पाँच वाक्य बनाइए।
उत्तर-

  1. मनुष्य को जीवन में कदम-कदम पर परीक्षा देना पड़ता है।
  2. नेहा न जाने क्यों ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रही थी।
  3. मेरे बार-बार मना करने पर भी वह खेलने चला गया।
  4. अंशु हँस-हँस कर पागल हो रही थी।
  5. गाडी धीरे-धीरे जा रही थी।

प्रश्न 3.
बोलचाल में प्रयोग होनेवाले शब्द और वाक्यांश ‘दादी माँ’ कहानी में हैं। इन शब्दों और वाक्यांशों से पता चलता है कि यह कहानी किसी विशेष क्षेत्र से संबंधित है। ऐसे शब्दों और वाक्यांशों में क्षेत्रीय बोलचाल की खूबियाँ होती हैं। उदाहरण के लिए निक्रसार, बरह्मा, उरिन, चिउड़ा, छौंका इत्यादि शब्दों को देखा जा सकता है। इन शब्दों का उच्चारण अन्य क्षेत्रीय बोलियों में अलग ढंग से होता है, जैसे–चिउड़ा को चिड़वा, चूड्त्र, पोहा और इसी तरह छौंका को छौंक, तड़का भी कहा जाता है। निकसार, उरिन और बरह्मा शब्द क्रमशः निकास, उऋण और ब्रह्मा शब्द का क्षेत्रीय रूप हैं। इस प्रकार के दस शब्दों को बोलचाल में उपयोग होनेवाली भाषा/बोली से एकत्र कीजिए और कक्षा में लिखकर दिखाइए।
उत्तर
बोलचाल की भाषा के प्रचलित शब्द व उनका हिंदी रूपांतरण।
NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 2 दादी माँ (शिवप्रसाद सिंह) 1

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NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 20 विप्लव-गायन (बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’)

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Class Class 7
Subject Hindi Vasant
Chapter Chapter 20
Chapter Name विप्लव-गायन (बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’)
Number of Questions Solved 7
Category NCERT Solutions

NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 20 विप्लव-गायन (बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’)

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास
(पृष्ठ 142-43)
कविता से

प्रश्न 1.
कण-कण में है व्याप्त वही स्वर ….. कालकूट फणि की चिंतामणि’
(क)‘वही स्वर’ ‘वह ध्वनि’ एवं ‘वही तान’ आदि वाक्यांश किसके लिए किस/भाव के लिए प्रयुक्त हुआ है?
(ख)वही स्वर, वह ध्वनि एवं वही तान से संबंधित भाव का ‘रुद्ध-गीत की क्रुद्ध तान है/निकली मेरी अंतरतर से’-पंक्तियों से क्या कोई संबंध बनता है?
उत्तर

  1. वही स्वर, वह ध्वनि एवं वही तान नवनिर्माण की राहें खोलने हेतु व जनता को जागृत करने के लिए प्रयुक्त हुआ है।
  2. वही स्वर, वही ध्वनि एवं वही तान से संबंधित भाव का रुद्ध-गीत की क्रुद्ध तान है। ‘निकली मेरे अंतरतर से’ पंक्तियों से सही संबंध बनता है क्योंकि कवि इन पंक्तियों में आवेशपूर्वक जनता को जागृत करना चाहता है परंतु उसके कंठ से वह गीत बाहर नहीं आ सकता जिससे वह और भी अधिक अधीर हो जाता है।

प्रश्न 2.
नीचे दी गई पंक्तियों के भाव स्पष्ट कीजिए
“सावधान! मेरी वीणा में ………. दोनों मेरी ऐंठी हैं।
उत्तर-
उपर्युक्त पंक्तियों के माध्यम से कवि लोगों को संदेश देते हुए कहते हैं कि परिवर्तन के प्रति सावधान रहने की जरूरत है। और वीणा से कोमल स्वर निकलने की बजाय कठोर स्वर निकलने के कारण उसकी उँगलियों से मिज़राबें टूटकर गिए गईं, जिससे अँगुलियाँ ऐंठ जाती हैं।

कविता से आगे

• स्वाधीनता संग्राम के दिनों में अनेक कवियों ने स्वाधीनता को मुखर करनेवाली ओजपूर्ण कविताएँ लिखीं। माखनलाल चतुर्वेदी, मैथिलीशरण गुप्त और सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला’ की ऐसी कविताओं की चार-चार पंक्तियाँ इकट्ठा कीजिए जिनमें स्वाधीनता के भाव ओज से मुखर हुए हैं।
उत्तर

  1. कोई यह कहता नहीं अनोखा घर बदलो
    बापू ने तुमको दिया, वीरता वर बदलो
    पर आज तुम्हें कहने वाला है अखिल राष्ट्र
    स्वर बदलो अपना वीरव्रती! वह स्वर बदलो!    (माखनलाल चतुर्वेदी)
  2. विचार लो कि मर्त्य हो न मृत्यु से डरो कभी,
    मरो, परंतु यों मरो कि याद जो करें सभी।
    हुई न यों सु-मृत्यु तो वृथा मरे वृथा जिए ।
    मरा नहीं वही कि जो जिया न आपके लिए।
    यही पशु-प्रवृत्ति है कि आप-आप ही चरे
    वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।    (मैथिलीशरण गुप्त)
  3. भारति जय-विजय करे!
    कनक-शस्य-कमल धरे!
    लंका पदतल-शतदल
    गर्जितोर्मि सागर-जल,
    धोता शुचि चरण युगल
    स्तव कर बहु-अर्थ भरे!          (सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’)                        

 अनुमान और कल्पना

प्रश्न 1.
कविता के मूलभाव को ध्यान में रखते हुए बताइए कि इसका शीर्षक ‘विप्लव गायन’ क्यों रखा गया होगा?
उत्तर-
इस कविता का शीर्षक ‘विप्लव-गायन’ इसलिए रखा गया होगा, क्योंकि इसमें विप्लव अर्थात् क्रांति लाने की बात कही गई है। इस कविता का मूल भाव है गलत परंपराओं, रूढ़िवादी विचारों व परस्पर भेदभाव त्यागकर नवनिर्माण के लिए जनता को प्रेरित करना। कवि क्रांति के माध्यम से समाज में परिवर्तन लाना चाहता है। यह क्रांति एक विप्लव के समान होगी। इसीलिए उन्होंने अपनी इस कविता का नाम रखा है- ‘विप्लव गायन’।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
कविता में दो शब्दों के मध्य (-) का प्रयोग किया गया है, जैसे-‘जिससे उथल-पुथल मच जाए’ एवं ‘कण-कण में है व्याप्त वही स्वर’। इन पंक्तियों को पढ़िए और अनुमान लगाइए कि कवि ऐसा प्रयोग क्यों करते हैं?
उत्तर
काव्य को प्रभावमयी बनाने व शब्दों में प्रवाह लाने हेतु (-) योजक चिह्न का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 2.
कविता में (,-। आदि) विराम-चिह्नों का उपयोग रुकने, आगे बढ़ने अथवा किसी खास भाव को अभिव्यक्त करने के लिए किया जाता है। कविता पढ़ने में इन विराम-चिह्नों का प्रभावी प्रयोग करते हुए काव्य पाठ कीजिए। गद्य में आमतौर पर है शब्द का प्रयोग वाक्य के अंत में किया जाता है; जैसे– देशराज जाता है। अब कविता की निम्न पंक्तियों को देखिए
‘कण-कण में है व्याप्त …….. वही तान गाती रहती है,
इन पंक्तियों में है शब्द का प्रयोग अलग-अलग जगहों पर किया गया है, कविता में अगर आपको ऐसे अन्य प्रयोग मिले तो उन्हें छाँटकर लिखिए।
उत्तर-
कंठ रुका है महानाश का,
मारक गीत रुद्ध होता है।
…………………
टूटी हैं मिज़राबें
रोम-रोम गाता है वह ध्वनि।

प्रश्न 3.
निम्न पंक्तियों को ध्यान से देखिए
‘कवि कुछ ऐसी तान सुनाओ … एक हिलोर उधर से आए, इन पंक्तियों के अंत में आए, जाए जैसे तुक मिलानेवाले शब्दों का प्रयोग किया गया है। इसे तुकबंदी या अंत्यानुप्रास कहते हैं। कविता से तुकबंदी के अन्य शब्दों को छाँटकर लिखिए। छाँटे गए शब्दों से अपनी कविता बनाने की कोशिश कीजिए।
उत्तर

  1. इधर-उधर
  2. बैठी/ऐंठी
  3. रुद्ध/युद्ध
  4. फणि/मणि

इन शब्दों के आधार पर कविता लिखने का प्रयास कीजिए।

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NCERT Solutions for Class 7 English Honeycomb Chapter 8 Fire : Friend and Foe

NCERT Solutions for Class 7 English Honeycomb Chapter 8 Fire : Friend and Foe are part of NCERT Solutions for Class 7 English. Here we have given NCERT Solutions for Class 7 English Honeycomb Chapter 8 Fire : Friend and Foe.

Board CBSE
Textbook NCERT
Class Class 7
Subject English Honeycomb
Chapter Chapter 8
Chapter Name Fire : Friend and Foe
Number of Questions Solved 21
Category NCERT Solutions

NCERT Solutions for Class 7 English Honeycomb Chapter 8 Fire : Friend and Foe

IMPORTANT PASSAGES FOR COMPREHENSION

Read the following extracts and answer the questions that follow by choosing the correct option :
Question 1.
When the oxygen in the air combines with carbon and hydrogen in a fuel, a chemical reaction takes place. (Page 114)
Multiple Choice Questions
Question 1.
A chemical reaction takes place when
(a) carbon dioxide combines with hydrogen
(b) oxygen combines with carbon
(c) oxygen combines with hydrogen
(d) oxygen combines with carbon and hydrogen
Answer.
(d) oxygen combines with carbon and hydrogen

Question 2.
During the chemical reaction, there is a release of
(a) three gases
(b) energy
(c) fire
(d) smoke
Answer.
(b) energy

Question 3.
The above concept was not clear to
(a) the students
(b) the early man
(c) the modern man
(d) the scientists
Answer.
(b) the early man

Question 2.
Fuel and oxygen do not make fire by themselves, or else a newspaper or a stick lying in the open would catch fire on its own (Page 114)
Questions.

  1.  What more than fuel and oxygen is needed to make a fire ?
  2.  How is it useful for us ?
  3.  Give the name of the chapter.

Answers.

  1.  Heat is also needed to make a fire.
  2.  It is very useful. For if heat is not required to make a fire, all the fuel will burn out immediately. For, oxygen is available everywhere.
  3.  The name of the chapter is—Fire : Friend and Foe.

Question 3.
Some fires cannot be put out with water. If water is sprayed onto an oil fire, the oil will float to the top of the water and continue to burn. (Page 116)
Multiple Choice Questions
Question 1.
Water is the only solution to extinguish fire
(a) true
(b) false
(c) partially correct
(d) none of the above
Answer.
(b) false

Question 2.
In the above context, fire can be put out
(a) with water
(b) by the human chain
(c) by carbon dioxide extinguisher
(d) carbohydro dioxide extinguisher
Answer.
(c) by carbon dioxide extinguisher

Question 3.
The oil floats onto the top of the water
(a) as water is heavier than the oil
(b) as oil is lighter than the water
(c) as water is sprayed onto an oil fire
(d) all the above.
Answer.
(c) as water is sprayed onto an oil fire.

Question 4.
Long ago, there were no firemen. When fire broke out, everybody became a firefighter. People formed human chains and passed buckets of water from a well or a pond to the blaze.
(Page 117)
Questions.

  1.  Who is a fireman ?
  2.  Which material was used to extinguish all fires in the by-gone days ?
  3.  What material is used today to put out the fire caused by oil or electricity ?

Answers.

  1.  A fireman is a fire fighter. He tries to put out a fire.
  2.  Water was used to put out (extinguish) all fires in the by-gone days.
  3.  Carbon dioxide is used today to put out the fire caused by oil or electricity.

Question 5.
Fire is still worshipped in many parts of the world. Fire is indeed a friend, but, as we know it can be a dangerous enemy once it gets out of control. (Page 118)
Multiple Choice Questions
Question 1.
Fire is a good servant means
(a) it behaves in a controlled manner
(b) it helps man in his daily chores
(c) it is not an expensive means
(d) it helps to cook food
Answer.
(b) it helps man in his daily chores

Question 2.
Fire is a good servant but ……..
(a) a worst master
(b) an evil master
(c) a fiery master
(d) a bad master
Answer.
(d) a bad master

Question 3.
An uncontrollable fire has taught the modern man
(a) to equip himself
(b) to rely on fire brigade
(c) to use special equipment
(d) all the above
Answer.
(d) all the above

TEXTUAL QUESTIONS

Comprehension Check (Page 118)
Question 1.
Mark the Correct answer in each of the following.
(i) Early man was frightened of
(a) lightning and volcanoes.
(b) the damage caused by them.
(c) fire.
(ii) (a) Fire is energy.
      (b) Fire is heat and light.
      (c) Fire is the result of a chemical reaction.
Answer.
(i) (c) ✓ fire.
(ii)(c) ✓ fire is the result of a chemical reaction.

Question 2.
From the boxes given below choose the one with the correct order of the following sentences.
(i) That is fire.
(ii) A chemical reaction takes place.
(iii) Energy in the form of heat and light is released.
(iv) Oxygen combines with carbon and hydrogen.
(i)        (ii)        (iii)      (iv)
(ii)       (iii)        (i)       (iv)
(iv)      (iii)        (ii)        (i)
(iv)      (ii)        (iii)        (i)
Answers.
(iv)     (ii)         (iii)        (i)

Working with the Text

Answer the following Questions :
Question 1.
What do you understand by the ‘flash point of a fuel ?   (V. Imp.)
Answer.
Every fuel burns only when it reaches a certain temperature and not before it. This particular temperature for a fuel is called its ‘flash point.

Question 2.
(i) What are some common uses of fire ?
(ii) In what sense is it a “bad master” ?   (Imp.)
Answers.
(i) Some common uses of fire are :
(a) for cooking
(b) for warming homes
(c) production of electricity.
(ii) Fire is a bad master when it is uncontrolled.

Question 3.
Match items in Column A with those in Column B.
NCERT Solutions for Class 7 English Honeycomb Chapter 8 Fire Friend and Foe 1
(i) fuel-coal, wood, cooking gas
(ii) oxygen-air
(iii) heat-lighted matchstick, burning coal, smouldering paper.

Question 4.
What are the three main ways in which a fire can be controlled or put out ? (Imp.)
Answers.
The three main ways in which a fire can be put out are :

  1.  by removing the fuel
  2.  by stopping the flow of oxygen to fire
  3.  by lowering the temperature around the fuel.

Question 5.
Match the items in Box A with those in Box B
                             A
(i) To burn paper or a piece of wood.
(ii) Small fires can be put out
(iii) When water is spread on fire,
(iv) A carbon dioxide extinguisher is the best thing
(v) Space left between buildings

                               B
• it absorbs heat from the burning material and lowers the temperature.
• reduces the risk of fire.
• with a damp blanket.
• we heat it before it catches fire.
• to put out an electrical fire.
Answers.
                   A                                                                       B
(i) To burn paper or a piece of wood   →   we heat it before it catches fire
(ii) Small fires can be put out               →   with a damp blanket
(iii) When water is spread on fire         →   it absorbs heat from the burning material and lowers the temperature.
(iv) A carbon dioxide extinguisher       →   to put out an electric fire is the best thing
(v) Space left between buildings          →   reduces the risk of fire.

Question 6.
Why does a burning candle go out when you blow on it ?   (Imp.)
Answer.
When we blow on a burning candle, it goes out. This is an example of extinguishing a fire by lowering the temperature below the flash point. The blowing reduces the temperature and the candle goes out.

Question 7.
Spraying water is not a good way of putting out an oil fire or an electrical fire. Why not?
Answer.
Spraying water is not a good way of putting out an oil fire. When we put water on oil, the oil comes on the top and keeps on burning. Along with water, the fire also flows and spreads in a wider area. So it is not advisable to use water to put out an oil fire.
The use of water is also not good to put out an electrical fire. The man spreading water can get an electric shock and be killed.

Question 8.
What are some of the things you should do to prevent a fire at home and in the school ?
Answer.
We can do a few things to prevent fire at home and in the school. While constructing our buildings, we should leave space between them to reduce the risk of fire. Every home and school must ensure fire prevention norms.

Working with Language

Question 1.
Read the following sentences :
To burn paper or a piece of wood, we heat it before it catches fire. We generally do it with a lighted match. Every fuel has a particular temperature at which it burns.
The verbs in italics are in the simple present tense. When we use it, we are not thinking only about the present. We use it to say that something happens all the time or repeatedly, or that something is true in general.
Find ten examples of verbs in the simple present tense in the text ‘Fire : Friend and Foe’ and write them down here. Do not include any passive verbs.
………….     …………….      ………………
………….     …………….      ………………
………….     …………….      ………………
Answers.

  1.  When the oxygen in the air combines with carbon and hydrogen in a fuel, a chemical reaction takes place.
  2.  This is what we call fire.
  3.  Wood, coal and cooking gas are some examples of fuel.
  4.  Oxygen comes from the air.
  5.  That is why when you blow on smouldering paper, it often bursts into flame.
  6.  Fuel and oxygen do not make a fire by themselves.
  7.  It only means that fire is very useful.
  8.  Fire is a good servant but a bad master.
  9.  It absorbs heat from the burning fuel.
  10.  The blanket of water also cuts off the supply of oxygen.

Question 2.
Fill in the blanks in the sentences below with words from the box. You may use a word more than once.
NCERT Solutions for Class 7 English Honeycomb Chapter 8 Fire Friend and Foe 2

  1.  Gandhiji’s life was devoted to the ……. of justice and fair play.
  2.  Have you insured your house against ……… ?
  3.  Diamond is nothing but ………. in its pure form.
  4.  If you put too much coal on the fire at once you will …….. it.
  5.  Smoking is said to be the main ……… of heart disease.
  6.  When asked by an ambitious writer whether he should put some …….. into his stories, Somerset Maugham murmured, “No, the other way round”.
  7.  She is ……. a copy of her mother.
  8.  It is often difficult to …… a yawn when you listen to a long speech on the value of time.

Answers.

  1.  cause
  2.  fire
  3.  carbon
  4.  smother
  5.  cause
  6.  fire
  7.  carbon
  8.  smother

Question 3.
One word is italicised in each sentence. Find its opposite in the box and fill in the blanks.
NCERT Solutions for Class 7 English Honeycomb Chapter 8 Fire Friend and Foe 3

  1.  You were required to keep all the doors open, not ………
  2.  PUPIL : What mark did I get in yesterday’s Maths test ?
    TEACHER : You got what you get when you add five and five and ……… ten from the total.
  3.  Run four kilometres a day to preserve your health. Run a lot more to …… it.
  4.  If a doctor advises a lean and lanky patient to reduce his weight further, be sure he is doing it to ………. his income.
  5.  The world is too much with us ; late and soon, Getting and ……. we lay waste our powers.
    -Wordsworth

Answers.

  1.  shut
  2.  subtract
  3.  destroy
  4.  increase
  5.  spending

Question 4.
Use the words given in the box to fill in the blanks in the sentences below.
NCERT Solutions for Class 7 English Honeycomb Chapter 8 Fire Friend and Foe 4

  1.  The cat chased the mouse …….. the lawn.
  2.  We were not allowed to cross the frontier. So we drove ……… it as far (as) we could and came back happy.
  3.  The horse went ……… the winning post and had to be stopped with difficulty.
  4.  It is not difficult to see …….. your plan. Anyone can see your motive.
  5.  GO …….. the yellow line, then turn left. You will reach the post office in five minutes.

Answers.

  1.  across
  2.  along
  3.  past
  4.  through
  5.  along

Speaking and Writing

Question 1.
Look at the following three units. First re-order the items in each unit to make
a meaningful sentence. Next, re-order the sentences to make a meaningful paragraph. Use correct punctuation marks in the paragraph.
(i) and eighteen fire tenders struggled/the fire began on Monday/to douse the blaze till morning
(ii) in a major fire/over 25 shops/were gutted
(iii) but property/was destroyed/worth several lakhs/no casualties were reported.
Answers.
Sentences
(i) The fire began on Monday and eighteen fire tenders struggled to douse the blaze till morning.
(ii) Over 25 shops were gutted in a major fire.
(iii) No casualties were reported but property worth several lakhs was destroyed.
Paragraph
The fire began on Monday and eighteen fire tenders struggled to douse the blaze till morning. No casualties were reported but property worth several lakhs was destroyed. Over 25 shops were gutted in the fire.

Question 2.
Read the following newspaper report given in the box below.
NCERT Solutions for Class 7 English Honeycomb Chapter 8 Fire Friend and Foe 5
Answer.
Students should read it themselves.

We hope the NCERT Solutions for Class 7 English Honeycomb Chapter 8 Fire : Friend and Foe Wonk help you. If you have any query regarding NCERT Solutions for Class 7 English Honeycomb Chapter 8 Fire : Friend and Foe, drop a comment below and we will get back to you at the earliest.