Online Education for Class 12 Hindi Important Questions Aroh Chapter 1 आत्म-परिचय, एक गीत

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Online Education for आत्म-परिचय, एक गीत Class 12 Important Extra Questions Hindi Aroh Chapter 1

प्रश्न 1.
‘आत्म-परिचय’ कविता का मूल भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
श्री हरिवंश राय बच्चन’ द्वारा रचित कविता ‘आत्म-परिचय’ ‘बुद्ध और नाचघर’ संग्रह से संकलित है जिसमें कवि ने यह चित्रण किया है कि मनुष्य द्वारा अपने को जानना या आत्मबोध दुनिया को जानने से अत्यंत कठिन है। समाज से मनुष्य का नाता खट्टा-मीठा होता है। इस संसार से निरपेक्ष रहना असंभव है। मनुष्य चाहकर भी जग से विमुख नहीं हो सकता। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, अतः मनुष्य का इस जग से अटूट संबंध है।

संसार अपने व्यंग्य-बाणों तथा शासन-प्रशासन से उसे चाहे कितने ही कष्ट एवं पीड़ाएं। क्यों न दे, पर मनुष्य इस जगह से अलग नहीं रह सकता। ये दुनिया ही उसकी पहचान है। जहाँ पर वह अपना परिचय देते हुए इस संसार से द्विविधात्मक एवं वंद्वात्मक संबंधों का मर्म उद्घाटित करता हुआ जीवन जीता है। इस दुनिया में मनुष्य का जीवन द्वंद्व
एवं विरुधों का सामंजस्य है। सुख-दुख का समन्वय है।

प्रश्न 2.
प्रस्तुत काव्यांश का भाव-सौंदर्य एवं काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।

मैं स्नेह-सुरा का पान किया करता हूँ,
मैं कभी न जग का ध्यान किया करता हूँ,
जग पूछ रहा उनको, जो जग की गाते,
मैं अपने मन का गान किया करता हूँ।
उत्तर
भाव-सौंदर्य प्रस्तुत काव्यांश श्री हरिवंश राय बच्चन द्वारा रचित कविता ‘आत्म-परिचय’ से अवतरित है। इस काव्यांश में कवि ने संसार
की स्वार्थपरता का चित्रांकन किया है। कवि कहता है कि मैं तो प्रेम रूपी मदिरा का पान कर उसकी मस्ती में मस्त रहता हूँ। मुझे इस संसार की बिल्कुल भी चिंता नहीं है। यह संसार मेरे बारे में क्या कहता है, क्या सोचता है मुझे इसकी कोई चिंता नहीं। यह तो स्वार्थी है, केवल उनको पूछता है जो इसका गान करते हैं अर्थात इसकी चापलूसी करते हैं। मैं तो इस जग से दूर केवल अपनी मनोभावनाओं को गाता रहता हूँ।

काव्य-सौंदर्य
(i) प्रस्तुत काव्यांश हालावाद के प्रवर्तक कवि हरिवंश राय बच्चन द्वारा रचित ‘आत्म-परिचय’ कविता से अवतरित है। इसमें कवि ने संसार की स्वार्थपरता का चित्रण किया है कि यह संसार केवल उनको पूछता है, जो इसकी चापलूसी करते हैं।
(ii) प्रस्तुत काव्यांश में खड़ी बोली भाषा का प्रयोग है जो सरल, सरस एवं प्रवाहमयी है।
(iii)स्नेह-सुरा में रूपक अलंकार की छटा शोभनीय है।
(iv) अनुप्रास, स्वरमैत्री तथा पदमैत्री अलंकारों की सुंदर प्रयोग है।
(v) संस्कृत के तत्सम और तद्भव शब्दों का सफल प्रयोग है।
(vi) गीति शैली का प्रयोग है।
(vii) मुक्तक छंद है।
(vi) माधुर्य गुण है।
(ix) श्रृंगार एवं शांत रस है।
(x) अभिधा शब्द-शक्ति का प्रयोग है।
(xi) बिंब योजना अत्यंत सुंदर है।

प्रश्न 3.
काव्यांश का भाव-सौंदर्य एवं काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
‘मैं और, और जग और, कहाँ का नाता
मैं बना बना कितने जग रोज मिटाता’
उत्तर
भाव-सौंदर्य-श्री हरिवंश राय बच्चन ने प्रस्तुत काव्यांश में संसार को स्वयं से भिन्न स्थापित किया है।
(i) प्रस्तुत अवतरण श्री हरिवंश राय बच्चन द्वारा रचित ‘आत्म-परिचय’ नामक कविता से अवतरित है। इसमें कवि ने संसार को स्वयं से बिल्कुल भिन्न स्थापित किया है।
(ii) खड़ी बोली की भाषा सरल, सरस एवं भावमयी है।
(iii) शैली अत्यंत गंभीर एवं रोचक है।
(iv) तत्सम, तद्भव एवं उर्दू व फ़ारसी के शब्दों का समन्वय है।
(v) ‘और-और’ में भिन्नर्थक आपूर्ति होने से यमक अलंकार की शोभा है।
(vi) ‘बना-बना’ में पुनरुक्ति प्रकाश की छटा है।
(vii) इसके साथ इसमें अनुप्रास, पदमैत्री अलंकारों का प्रयोग भी हुआ है।
(viii) शैली गीतिमयता से परिपूर्ण है।
(ix) माधुर्य गुण का समावेश है।
(x) शांत रस है।
(xi) बिंब योजना सार्थक एवं सारगर्भित है।

प्रश्न 4.
‘दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!
हो जाए न पत्र में रात कहीं
मंजिल भी तो है दूर नहीं
यह सोच थका दिन का पंथी
भी जल्दी-जल्दी चलता है।
उपर्युक्त पंक्तियों का भाव-सौंदर्य
एवं काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
भाव-सौंदर्य- प्रस्तुत अवतरण श्री हरिवंश राय बच्चन विरचित ‘एक गीत’ नामक कविता से अवतरित है। इसमें कवि ने समय की परिवर्तनशीलता एवं जीवन की क्षणभंगुरता का स्पष्ट चित्रांकन किया है। समय निरंतर चलायमान एवं परिवर्तनशील है। वह प्रतिपल परिवर्तित होता रहता है। यही धारणा लेकर थका हुआ यात्री शीघ्रता से अपनी मंजिल की तरफ़ चलता है। हालाँकि उसकी मंजिल ज्यादा दूर नहीं है किंतु वह यह सोचकर बेचैन होता है कि कहीं लक्ष्य पर पहुँचने से पहले ही रात न हो जाए।

काव्य-सौंदर्य
(i) इस काव्यांश में श्री हरिवंश राय बच्चन ने समय की चिर परिवर्तनशीलता एवं जीवन की क्षणभंगुरता का वर्णन किया है।
(ii) भाषा सरल, सरस खड़ी बोली है।
(iii) तत्सम, तद्भव एवं उर्दू-फ़ारसी शब्दावली है।
(iv) ‘जल्दी-जल्दी’ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।
(v) अनुप्रास-पदमैत्री की छटा भी है।
(vi) मुक्तक छंद का प्रयोग है।
(vii) शांत रस है।
(viii) प्रसाद गुण है।
(ix) बिंब-योजना सार्थक एवं सटीक है।

प्रश्न 5.
कवि जग-जीवन को भार स्वरूप क्यों समझता है?
उत्तर
कवि जग-जीवन को भार स्वरूप इसलिए समझता है क्योंकि वह जीवन को प्रेम, मस्ती, आनंद एवं सौंदर्य से परिपूर्ण मानता है जबकि संसार इनसे दूर कहीं कोरी कल्पनाओं में ही डूबा हुआ है। संसार को प्रेम, मस्ती एवं आनंद से कोई मतलब नहीं है। वह तो ईर्ष्या, द्वेष आदि की भावनाओं में ही जकड़ा रहता है।

प्रश्न 6.
कवि कैसे जीवन की कामना करता है?
उत्तर
कवि ऐसे जीवन की कामना करता है जो प्रेम, मस्ती, आनंद और सौंदर्य से भरपूर हो, जिसमें चारों तरफ सुंदरता हो। प्रेम रूपी मदिरा का मौसम हो। जहाँ वह केवल प्रेम रूपी मदिरा पीकर उसी में डूबकर आनंद विभोर हो जाए। कहीं कोई ईर्ष्या-द्वेष जैसे कुविचार न हों, जिसमें योवन की मदमस्त करने वाली उन्माद हो।

कवि का मंतव्य है कि यह संसार उससे बिल्कुल भिन्न है। उसके विचार, उसकी भावनाएँ इस क्रूर संसार से समन्वय स्थापित नहीं कर सकतीं। इसका दृष्टिकोण उससे बिल्कुल अलग है अत: इस संसार के साथ उसका कोई संबंध नहीं हो सकता। यह संसार तो केबल एक परिपाटी पर अपना जीवनयापन कर रहा है, जबकि वह प्रतिदिन ऐसे अनेक लोक बनाकर उन्हें नष्ट कर देता है। काव्य-सौंदर्य

प्रश्न 7.
आत्म-परिचय कविता में कवि संसार को क्या संदेश देना चाहता है?
उत्तर
आत्म-परिचय कविता श्री हरिवंश राय बच्चन द्वारा रचित है। इसमें कवि संसार को मस्ती का संदेश देना चाहता है। ऐसी मस्ती जिसमें संपूर्ण संसार मदमस्त होकर आनंद विभोर हो उठे। वह आनंदित होकर नृत्य करने लगे और इसी मस्ती में सदैव लहराता रहे।

प्रश्न 8.
आत्म-परिचय कविता के माध्यम से स्पष्ट कीजिए कि कवि क्यों रोया होगा?
उत्तर :
कवि प्रेम एवं मस्ती की कोमल भावनाओं से ओतप्रोत है। उसे अपने जीवन में किसी प्रिया से असीम प्रेमभाव हुआ, किंतु दुर्भाग्य से वह प्रेम पूर्ण नहीं हो सका जिसके बाद कवि को अगाध विरह-पीड़ा को सहन करना पड़ा। यही पीड़ा उसके रोदन के माध्यम से प्रस्फुटित हुई। इसी कारण है कि कवि रोया होगा।

प्रश्न 9.
कवि और संसार में क्या भिन्नता है?
उत्तर :
कवि प्रेम एवं मस्ती में मदमस्त रहता है। वह प्रेम रूपी मदिरा पीकर उसी के आनंद में डूबा हुआ है। वह चारों तरफ प्रेम, मस्ती, आनंद एवं सौंदर्य का वातावरण फैलाना चाहता है जबकि यह संसार परस्पर ईर्ष्या, द्वेष, अहं की भावनाओं में डूबा है। इसे किसी के प्रेम व आनंद से कोई मतलब नहीं है। यह तो प्रेम की मस्ती को भी व्यर्थ समझता है। यह सदैव दूसरों की कोमल भावनाओं से खिलवाड़ करता है और उनका मज़ाक उड़ाता है।

प्रश्न 10.
कवि ज्ञान की बजाय किसे अपनाना चाहता है और क्यों?
उत्तर :
कवि ज्ञान की अपेक्षा प्रेम को अपनाना चाहता है क्योंकि वह ज्ञान के रास्ते को अत्यंत कठिन एवं दुष्प्राप्य मानता है, जिसे अनादि काल से संसार के बड़े-बड़े महात्मा, मुनि एवं संतजन भी कोटि-कोटि प्रयास करने पर भी नहीं जान सके।

प्रश्न 11.
पथिक जल्दी-जल्दी क्यों चलता है?
उत्तर:
पथिक जल्दी-जल्दी इसलिए चलता है क्योंकि उसे यह भय रहता है कि कहीं पथ में ही रात न हो जाए। उसकी मंज़िल उससे छूट न जाए।

प्रश्न 12.
चिड़िया के पंखों में चंचलता कैसे भरती है?
उत्तर
चिड़िया जब सोचती है कि उसके बच्चे घोंसले में उसकी राह देख रह होंगे। वे अकेले होंगे और अपनी माँ के आने की प्रतीक्षा में नीड़ों से निरंतर रास्ते की ओर झोंक रहे होंगे, तो उसके पंखों में चंचलता भर जाती है। पनि जल्दी-जल्दी डालता जीत काया राय बच्चन का वा निम पाल का संकलित है।

प्रश्न 13.
दिन जल्दी-जल्दी ढलता है’ कविता का मूल भाव अथवा प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
‘दिन जल्दी-जल्दी ढलता है’ गीत हरिवंश राय बच्चन के ‘निशा-निमंत्रण’ गीत संग्रह से संकलित है। इस गीत में कवि ने प्रकृति थी दैनिक परिवर्तनशीलता के संदर्भ में प्राणी के धड़कते हृदय की भावनाओं को सुनने का प्रयास किया है। समय चिर परिवर्तनशील है। किसी प्रिय के आलंबन या विषय से भावी साक्षात्कार का आश्वासन ही हमारे प्रयास के चरणों की गति में और अधिक गतिशीलता एवं साहस पैदा कर देता है।

प्रश्न 14.
‘आत्म-परिचय’ कविता कहाँ से ली गई है और इसमें किस चीज़ का वर्णन किया गया है?
उत्तर
‘आत्म-परिचय’ कवित हरिवंश राय बच्चन के काव्य संग्रह ‘बुद्ध और नाचघर’ से ली गई है। इस कविता में कवि ने मानव के आत्म-परिचय का चित्रण किया है।

प्रश्न 15.
‘आत्म-बोध’ का अर्थ बताते हुए बतलाइए कि कवि ने कविता में किसका परिचय दिया है ?
उत्तर
‘आत्म-बोध’ का अर्थ है-स्वयं को जानना, जो संसार को जानने से अधिक कठिन है। व्यक्ति का समाज से घनिष्ठ संबंध है। कविता में कवि ने अपना परिचय देते हुए लगातार दुनिया से अपनी दुविधा और वंद्वपूर्ण संबंधों का रहस्य प्रकट किया है।

प्रश्न 16.
कवि किस चीज़ का भार लेकर अपने कंधों पर घूम रहा था तथा किस चीज़ ने उसके मन को झंकृत कर दिया?
उत्तर
कवि सांसारिक जीवन का संपूर्ण भार अपने कंधों पर लेकर घूम रहा था। इस सारे भार को उठाने के बाद भी वह संसार में अपने जीवन में प्यार के लिए घूम रहा था। कवि की हृदय रूपी वीणा को किसी ने प्रेम से छूकर झंकृत कर दिया। वह उसी झंकृत वीणा की साँसों को लिए दुनिया में घूम रहा है।

प्रश्न 17.
कवि का किससे कोई लेना-देना नहीं है और क्यों?
उत्तर
कवि का इस संसार से कोई लेना-देना नहीं है। उसकी दृष्टि में यह संसार एकदम अपूर्ण है, अतः उसे अच्छा नहीं लगता। वह अपने हृदय के भाव एवं उपहार लिए घूम रहा है। उसका अपना एक स्वप्निल संसार है। उसी संसार को लिए वह घूम रहा है।

प्रश्न 18.
कवि ने संसार को क्या माना है और उसे किस चीज़ की आवश्यकता नहीं है?
उत्तर
कवि सुख-दुख दोनों अवस्थाओं में मान रहता है। उसने संसार को एक सागर के समान माना है। उसके अनुसार संसार के लोग इस संसार रूपी सागर को पार करने हेतु नाव बना सकते हैं, किंतु उसे इस नाव की कोई आवश्यकता नहीं है। वह सांसारिक खुशियों में डूबकर यूं ही बहना चाहता है।

प्रश्न 19.
कवि आंतरिक रूप से क्यों रोता रहता है?
उत्तर
कवि का कहना है कि उसके पास जवानी का जोश है तथा इस जोश में छिपा दुख है। इसी कारण वह बाहय रूप से तो हँसता हुआ
दिखता है, लेकिन आंतरिक रूप से निरंतर रोता रहता है।

प्रश्न 20.
कवि और संसार में किस प्रकार का संबंध है?
उत्तर
कवि और संसार का कोई संबंध नहीं है। उसकी राह कोई और है तथा संसार की कोई और। वह न जाने प्रतिदिन कितने जग बना-बना कर मिटा देता है। कवि के अनुसार, यह संसार जिस पृथ्वी पर रहकर अपना वैभव जोड़ना चाहता है, वह प्रतिपग इस पृथ्वी के वैभव को तुकरा देता है।

प्रश्न 21.
कवि के सदन में क्या छिपा है तथा वह अपने संग क्या लेकर घूमता रहता है?
उत्तर
कवि के रूदन में एक राग छिपा है तथा उसकी शीतल वाणी में क्रोध की आग समाहित है। वह एक विराट खंडहर का अंश अपने साथ लेकर घूमता रहता है। जिस पर बड़े-बड़े राजाओं के महल भी अर्पित हो जाते हैं।

प्रश्न 22.
कवि ने संसार को अजीब क्यों कहा है?
उत्तर
कवि ने संसार को अजीब इसलिए कहा है, क्योंकि वह उसके रोने को भी गीत समझता है। दुखों की अपार वेदना के कारण जब वह फूट-फूट कर रोया तो संसार ने उसका छंद समझा।

प्रश्न 23.
कवि ने स्वयं को दीवाना क्यों कहा है?
उत्तर
कवि ने स्वयं को दीवाना इसलिए कहा है क्योंकि वह तो दीवानों का वेश धारण कर अपनी मस्ती में मस्त होकर घूम रहा है। साथ ही वह अपने संग मस्ती का संदेश लेकर घूम रहा है जिसे सुनकर ये सारा संसार झूम उठेगा, झुक जाएगा तथा लहराने लगेगा।

प्रश्न 24.
कवि मस्ती में डूबकर मन के गीत क्यों गाता रहता है?
उत्तर
प्रेम रूपी मदिरा को पी लेने के कारण कवि इसी में मग्न रहता है। उसे इस संसार का बिल्कुल भी ध्यान नहीं है। कवि के अनुसार यह संसार मात्र उन्हीं की पूछ करता है जो उसका गान करते हैं। यह स्वार्थ के नशे में डूबकर औरों की अनदेखी कर देता है, लेकिन कवि अपनी मस्ती में डूब मन के गीत गाता रहता है।

प्रश्न 25.
कविता में कवि अपने हृदय में क्या जलाकर रखता है?
उत्तर
कविता में कवि अपने हृदय में अग्नि जलाकर रखता है तथा स्वयं भी उसी में जलता रहता है। वह अपने जीवन को समभाव होकर जीता है। वह सुख-दुख दोनों अवस्थाओं में मग्न रहता है।

प्रश्न 26.
कवि को संसार अपूर्ण क्यों लगता है?
उत्तर
कवि को संसार इसलिए अपूर्ण लगता है, क्योंकि यह समस्त संसार स्वार्थी है। यहाँ हर कोई अपनी स्वार्थ पूर्ति में डूबा हुआ है। संसार केवल उन्हीं को पूछता है तो उसकी जय-जयकार करते हैं।

प्रश्न 27.
कवि किसकी यादों का अपने दिल में संजोकर घूमता है?
उत्तर
कवि कहता है कि उसने अपनी जवानी में किसी से प्रेम किया था और उसकी यादों को अपने हृदय में संजोया था। आज उसी की यादों का अपने हृदय में संजोकर घूम रहा है। प्रश्न

प्रश्न 28.
कवि ने संसार को मूर्ख क्यों कहा है?
उत्तर
कवि संसार को मूर्ख इसलिए कहता है, क्योंकि यह संसार सत्य की खोज में मिटे असंख्य महापुरुषों को देखकर भी सचेत नहीं हुआ। सत्य को जानने के लिए असंख्य महापुरुष लोग यत्न कर मिट गए। वह बात जानकर भी यह संसार कुछ भी सीखना नहीं चाहता।

प्रश्न 29.
कवि संसार में किस चीज़ से प्रभावित नहीं होता?
उत्तर
कवि पृथ्वी पर व्याप्त धन-ऐश्वर्य तथा शान-ओ-शौकत से तनिक भी प्रभावित नहीं होता। ऐसी शान-ओ-शौकत को वह पग-पग रा पर ठुकराता चलता है। वह कहता है कि जिस पृथ्वी पर यह संसार झूठे धन-ऐश्वर्य तथा शान और शौकत खड़ा करता है, वह ऐसी ऐश्वर्य परिपूर्ण पृथ्वी को पग-पग पर ठुकरा देता है। यह धन-वैभव कवि को तनिक भी विचलित नहीं कर सकता।

प्रश्न 30.
कवि संसार से उसे कवि न मानने के लिए क्यों कहता है?
उत्तर
कवि संसार को संबोधन करते हुए कहता है कि यह संसार उसे एक कवि मानकर क्यों अपनाना चाहता है। वह एक कवि नहीं, अपितु इस संसार का एक नया प्रेमी है। एक नया दीवाना है, जो अपनी प्रेमवाणी का बखान कर रहा है।

प्रश्न 31.
कवि संसार में किसका रूप धारण करके जीवनयापन कर रहा है?
उत्तर
कवि का कथन है कि वह इस संसार में प्रेम में पागल प्रेमियों का रूप लेकर जीवनयापन कर रहा है। वह अपने हृदय में एक प्रेमी को बिठाकर उसी का वेश धारण किए हुए है। कवि के हृदय में थोड़ी-सी मादकता व नशा बाकी है और उसी मादकता में डूबकर वह जी रहा है।

प्रश्न 32.
‘एक गीत’ कविता किसकी है और कहाँ से ली गई है?
उत्तर
‘एक गीत’ कविता श्री हरिवंश राय बच्चन द्वारा रचित उनके काव्य संग्रह ‘बुद्ध और नाचघर’ से संकलित है।

प्रश्न 33.
प्रस्तुत कविता में कवि ने क्या कहता चाहा है?
उत्तर
प्रस्तुत कविता में कवि ने समय के व्यतीत होने के एहसास के साथ-साथ लक्ष्य तक पहुँचने के लिए प्राणी द्वारा कुछ कर गुजरने के जज़्बे का चित्रण किया है। इस कविता में कवि की रहस्यवादी चेतना भी मुखरित हुई है।

प्रश्न 34.
कवि ने कविता में समय के बारे में क्या कहा है?
उत्तर
कवि का कथन है कि समय परिवर्तनशील है जो निरंतर चलायमान अवस्था में रहता है। वह कभी भी नहीं रुकता। समय के इसी परिवर्तन और अभाव को देखकर दिन में चलने वाला पाथिक भी यह सोचकर अत्यंत शीघ्रता से चलता है कि कहीं जीवन रूपी रास्ते में ही रात न हो जाए, जबकि उसकी मंज़िल भी अधिक दूर नहीं है।

प्रश्न 35.
‘मानव-जीवन क्षणभंगुर है’ पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
कवि के कहने का अभिप्राय यह है कि मानव-जीवन क्षणभंगुर है। अर्थात समय बहुत कम है जो अत्यंत तेज़ी से गुज़रता है। मनुष्य रूपी यात्री को यह चिंता रहती है कि उसके लक्ष्य को प्राप्त करने से पहले ही उसके रास्ते में रात न हो जाए। कवि कहता है कि दिन अत्यंत शीघ्रता से व्यतीत होता है।

प्रश्न 36.
‘मंज़िल भी तो दूर नहीं’ पंक्ति में निहित लाक्षणिक अर्थ को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
इस पंक्ति का आशय है कि मनुष्य की वह मंजिल भी अधिक दूर नहीं है जहाँ उसे मृत्यु के बाद पहुँचना है।

प्रश्न 37.
कौन-सा ध्यान चिड़ियों के पंखों में न जाने कितनी चंचलता भर देता है?
उत्तर
चिड़ियों के पंखों में यह ध्यान चंचलता उत्पन्न करता है कि संध्या के समय घोंसलों के उनके बच्चे उनके आने की प्रतीक्षा करते हुए घोंसले से झाँक रहे होंगे। इससे उनके पंखों में वात्सल्य भाव के कारण अत्यधिक स्फूर्ति आ जाती है और वे शीघ्र अतिशीघ्र अपने घोंसलों तक पहुंचना चाहते हैं।

प्रश्न 38.
कविता में जीवन रूपी रथ पर बैठते हुए राही क्या सोचता है?
उत्तर
कवि का कथन है कि अपने जीवन रूपी पथ पर चलता हुआ प्राणी चिंतन करता है। वह निरंतर सोचता रहता है कि इस समय उससे मिलने के लिए कौन व्याकुल होगा।

प्रश्न 39.
पथिक के पाँवों को कौन-सा प्रश्न कमजोर कर देता है?
उत्तर
कवि कहता है कि जब-जब पथिक के हृदय में यह प्रश्न उठता है कि कौन उसके लिए व्याकुल है अर्थात कौन उसकी प्रतीक्षा कर रहा है तो यह प्रश्न उसके पाँवों को कमजोर कर देता है और यह उसे सुस्त बना देता है और इससे राही के हृदय में अपार व्याकुलता भर जाती है क्योंकि उसे लगता है कि किसी को उसकी प्रतीक्षा नहीं है।

प्रश्न 40.
घोंसलों में किसे न पाकर कौन परेशान हो उठता है?पक्षियों के बच्चे अपने घोंसले में अपने माँ-बाप को न पाकर परेशानी से भर उठते हैं। घोंसलों में अपने बच्चों को अकेला छोड़कर गए
पक्षी भी इसी चिंता में रहते हैं कि उनके बच्चे भी उनके आने की आशा में अपने-अपने घोंसलों से झाँक रहे होंगे।

प्रश्न 41.
कविवर ‘बच्चन’ किस प्रकार के साहित्यकार हैं?
उत्तर
‘बच्चन जी हालावाद के प्रवर्तक कवि हैं तथा आधुनिक हिंदी साहित्य के महान साहित्यकार माने जाते हैं। इनका एक कहानीकार के रूप में भी उदय हुआ था, किंतु काव्य के क्षेत्र में इन्होंने अद्भुत साहित्य की रचना की। ये एक कवि के रूप अधिक प्रसिद्ध हुए। इन्होंने हालावाद का प्रवर्तन कर साहित्य को एक नया मोड़ दिया।

प्रश्न 42.
आशय स्पष्ट कीजिए-“मैं और, और जग और, कहाँ का नाता।” (A.I. C.B.S.E 2016)
उत्तर
‘मैं और, और जग और, कहाँ का नाता’-हरिवंशराय बच्चन के द्वारा रचित है जिसमें कवि मानता है कि उसका समाज से कोई नाता नहीं है। समाज और उसकी प्रकृति में बहुत बड़ा अंतर है क्योंकि उन दोनों के लक्ष्यों में बहुत बड़ा अंतर है। कवि तो अपने कल्पना के लोक में प्रतिदिन अनेक संसार बना-बनाकर नष्ट कर देता है। वह नित नई कल्पना करता है और फिर उसे मिटा देता है। वह धन-ऐश्वर्य और शान-ओ-शौकत से प्रभावित नहीं होता जबकि संसार धन-दौलत और झूठी शान-ओ-शौकत पाना चाहता है।

प्रश्न 43.
‘बच्चन’ के संकलित गीत में दिन ढलते समय पथिकों और पक्षियों की गति में तीव्रता और कवि की गति में ष्ठिाथिलता के कारण लिखिए। (Outside Delhi 2017)
उत्तर
पथिक मंजिल से पूर्व रात होने के कारण तीव्रता से चलता है। पक्षी घोंसलों में अपने बच्चों द्वारा प्रतीक्षा के कारण गतिष्ठील बन जाते हैं। कवि की किसी के द्वारा प्रतीक्षा न करने के कारण गति में ष्ठिाथिलता आ जाती है।

प्रश्न 44.
आत्म परिचय कविता में परस्पर विपरीत कथनों से कवि क्या कहना चाहता है? (Outside Delhi 2017 Set-III)
उत्तर
आत्म परिचय कविता में परस्पर विपरीत कथनों से कवि यह कहना चाहता है कि मनुज्य एक सामाजिक प्राणी है। समाज से मनुज्य का नाता खट्टा-मीठा होता है। उसके जीवन में दुःख-सुख दोनों ही आते हैं। दुनिया अपने व्यंग्य-बाण और टासन-प्रष्ठासन से मनुज्य को अनेक कज्टों के रूप में जीवन-भार प्रदान करती है। चाहकर भी मनुज्य इस जीवन-भार से अलग नहीं हो सकता। इस जीवन-भार को उसे आजीवन ढोना ही पड़ता है।

लेकिन दूसरी ओर कवि का यह कहना है कि जीवन इस जग को देकर नहीं जीता क्योंकि वह इसे हृदयहीन और स्वार्थी मानता है। वह तो केवल संसार के वैभव से अलग अपनी मस्ती में मस्त होकर जीवन जीना चाहता है। इसलिए वह कहता है कि मैं कभी भी जग का ध्यान नहीं करता।

सप्रसंग व्याख्या, अर्थग्रहण एवं सौंदर्य-सराहना संबंधी प्रश्नोत्तर

1. मैं जग-जीवन का भार लिए फिरता हूँ,
फिर भी जीवन में प्यार लिए फिरता हूँ;
कर दिया किसी ने झंकृत जिनको छूकर
कि मैं साँसों के दो तार लिए फिरता हूँ। (C.B.S.E. Sample Paper-I, C.B.S.E. 2014 set I, III)

शब्दार्थ : जग-जीवन-संसार का जीवन, सांसारिक जीवन । छूकर-स्पर्श करके। झंकृत-बजाना।

प्रसंग : प्रस्तुत काव्यांश हमारी हिंदी की पाठ्य-पुस्तक ‘आरोह-भाग-2’ में संकलित ‘आत्म परिचय’ नामक कविता से अवतरित है जिसके रचयिता ‘हरिवंशराय बच्चन’ हैं। इसमें कवि ने आत्म-परिचय का चित्रण किया है।

व्याख्या : कवि बच्चन अपने जीवन का बोध कराते हुए कहते हैं कि मैं इस सांसारिक जीवन के भार को निरंतर वहन करता हुआ
जीवन-यापन कर रहा हूँ। मेरे जीवन पर इस जग का बहुत भार है लेकिन मैं इस भार को देख दुखी नहीं होता और न ही कभी विचलित होता हूँ। मैं अपने जीवन में असीम प्यार लिए घूम रहा हूँ। अपने विगत जीवन का स्मरण करते हुए कवि कहता है कि मेरे जीवन में किसी ने पदार्पण किया था तथा प्रेम-भरे हाथों से मेरी हृदय रूपी वीणा को झंकृत कर दिया था।

आज मैं उनकी यादों के रूप में अपने साँसों के दो तार लिए जी रहा हूँ। कवि का कहने का अभिप्राय यह है कि एक प्रिया का मेरे जीवन में आगमन हुआ था। उसने मुझे प्यार से छुआ था लेकिन उसका साथ नहीं रहा। बस यादों के रूप में उसके कोमल हाथों से झंकृत साँसों के तार लिए जीवन जी रहा हूँ।

अर्थग्रहण एवं सौंदर्य-सराहना संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
1. उपर्युक्त काव्यांश के कवि तथा कविता का नाम लिखिए।
2. कवि किसका भार लिए फिरता है?
3. कवि अपने जीवन में क्या लेकर घूमता है?
4. साँसों के तारों को किसने छुआ होगा?
5. काव्यांश का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
1. उपर्युक्त काव्यांश के कवि श्री हरिवंश राय बच्चन हैं तथा कविता का नाम ‘आत्मपरिचय’ है।
2. कवि जग-जीवन का भार लिए फिरता है। वह भार दुख और दर्द के कारण जीवन के लिए अति दुखदायी है।
3. कवि अपने जीवन में प्यार लेकर घूमता है।
4. साँसों के तारों को कवि की प्रियतमा ने छुआ होगा।
5. काव्य-सौंदर्य

  • कवि ने विगत जीवन का यथार्थ बोध कराया है।
  • भाषा सहज, सरल, सरस खड़ी बोली है।
  • संस्कृत के तत्सम और तद्भव शब्दों का प्रयोग है।
  • गेय-मुक्तक शैली का प्रयोग है।
  • अनुप्रास, पदमैत्री तथा स्वरमैत्री अलंकार की शोभा दर्शनीय है।
  • अभिधा शब्द-शक्ति का प्रयोग है।
  • बिंब-योजना सार्थक एवं सटीक है।
  • शृंगार रस का प्रयोग किया गया है।
  • माधुर्य गुण विद्यमान है।

2. मैं स्नेह-सुरा का पान किया करता हूँ,
मैं कभी न जग का ध्यान किया करता हूँ,
जग पूछ रहा उनको, जो जग की गाते,
मैं अपने मन का गान किया करता हूँ !
(C.B.S.E. Sample Paper-I, A.I. C.B.S.E. 2011 Set-I), (C.B.S.E. Delhi 2013, Set-I, II, III, C.B.S.E. Outside Delhi 2013, Set-II, A.L.C.B.S.E, 2014)

शब्दार्थ : स्नेह-सुरा-स्नेह रूपी मदिरा, प्रेम रूपी शराब। गान-बखान, कहना। जग-संसार।

प्रसंग : प्रस्तुत काव्यांश हमारी हिंदी की पाठ्य-पुस्तक ‘आरोह-भाग-2’ में संकलित कवि श्री हरिवंशराय बच्चन द्वारा रचित है। इसमें कवि ने आत्म-परिचय का बोध कराया है।

व्याख्या : कवि कहता है कि मैं प्रेम रूपी मदिरा को पीने वाला हूँ। मैं इसी प्रेम रूपी मदिरा को पीकर इसी की मस्ती में डूबा रहता हूँ। मैं केवल अपने में मग्न रहता हूँ। मैं कभी भी संसार का ध्यान नहीं करता। कवि कहता है कि यह संसार स्वार्थी है। यह केवल उसको पूछता है, जो इसका बखान करते हैं और उसके अनुकूल कार्य करते हैं। अपने प्रतिकूल कार्य करने वालों को यह संसार कभी नहीं पूछता। कवि कहता है कि मैं तो अपनी मस्ती में डूबकर अपने मन का बखान करता हूँ, अपने मन की भावनाओं तथा संवेदनाओं को सुनाता रहता हूँ।

अर्थग्रहण एवं सौंदर्य-सराहना संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
1. कवि किसका पान किए विचरण करता है?
2. कवि जग का ध्यान क्यों नहीं करता?
3. कवि किसका गान करता है?
4. जग कवि को क्यों नहीं पूछता?
5. काव्यांश का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
1. कवि स्नेह रूपी मदिरा का पान किए विचरण करता है।
2. कवि जग का ध्यान इसलिए नहीं करता, क्योंकि वह स्नेह रूपी सुरा को पीकर उसी में मस्त रहता है।
3. कवि अपने मन का गान करता है।
4. जग कवि को इसलिए नहीं पूछता क्योंकि वह जग का गान नहीं करता; उसकी जय-जयकार नहीं करता।
5. काव्य-सौंदर्य

  • कवि ने संसार की स्वार्थपरता का चित्रांकन किया है।
  • भाषा सहज, सरल, सरस खड़ी बोली है।
  • संस्कृत के तत्सम और तद्भव शब्दों का प्रयोग है।
  • स्नेह-सुरा में रूपक अलंकार की छटा शोभनीय है।
  • अनुप्रास, पदमैत्री, स्वरमैत्री अलंकार द्रष्टव्य हैं।
  • गेय-मुक्तक शैली का सुंदर प्रयोग है।
  • बिंब योजना सार्थक एवं सटीक है।
  • माधुर्य गुण है।
  • शृंगार रस का चित्रण है।

3. मैं निज उर के उद्गार लिए फिरता हूँ, (C.B.S.E. Delhi 2013, Set-II, Set-III, A.I.C.B.S.E, 2014)
मैं निज उर के उपहार लिए फिरता हूँ,
है यह अपूर्ण संसार न मुझको भाता
मैं स्वप्नों का संसार लिए फिरता हूँ। (C.B.S.E. Sample Paper)

शब्दार्थ : निज-अपना। भाता-अच्छा लगना। उद्गार-भाव, अधीरता।

प्रसंग : प्रस्तुत अवतरण हमारी हिंदी की पाठ्य-पुस्तक ‘आरोह-भाग-2’ में संकलित आत्म-परिचय नामक कविता से अवतरित है। इसके रचयिता श्री हरिवंश राय बच्चन हैं। इस काव्यांश में कवि ने अपने हृदय के उद्गार व्यक्त किए हैं।

व्याख्या : कवि कहता है कि मैं अपने हृदय के भाव तथा उपहार लिए जीवन-यापन कर रहा हूँ। कवि का कहने का अभिप्राय यह है कि मैंने अपने हदय में अनेक भाव उपहार स्वरूप सँजो रखे हैं। इन्हीं भावों तथा उपहारों को लिए विचरण कर रहा हूँ। कवि कहता है कि यह संसार तो अपूर्ण है इसलिए इसकी अपूर्णता मेरे हृदय को अच्छी नहीं लगती। मैं तो इस संसार की उपेक्षा करके अपने ही सपनों का संसार लेकर जी रहा हूँ। मैं तो अपने ही स्वप्निल संसार में डूबा रहता हूँ।

अर्थग्रहण एवं सौंदर्य-सराहना संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
1. कवि किसके उद्गार और उपहार लेकर फिरता है?
2. कवि को यह संसार अपूर्ण क्यों लगता है?
3. कवि जीवन में किसका संसार लिए फिरता है?
4. उपर्युक्त काव्यांश का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
1. कवि अपने हृदय के उद्गार और उपहार लेकर फिरता है।
2. कवि को यह संसार इसलिए अपूर्ण लगता है क्योंकि यह समस्त संसार स्वार्थी है। यहाँ हर कोई अपनी स्वार्थ-पूर्ति में डूबा हुआ है। यह संसार केवल उन्हीं को पूछता है जो इसकी जय-जयकार करते हैं।
3. कवि अपने जीवन में सपनों का संसार लिए फिरता है।
4. काव्य-सौंदर्य

  • कवि ने संसार को अपूर्ण बताया है।
  • भाषा सरस, प्रवाहमयी है।
  • गीति शैली का प्रयोग है।
  • अनुप्रास, पदमैत्री तथा स्वरमैत्री अलंकारों की छटा शोभनीय है।
  • संस्कृत के तत्सम और तद्भव शब्दों का सार्थक प्रयोग है।
  • शांत रस है।
  • प्रसाद गुण है।

4. मैं जला हृदय में अग्नि, दहा करता हूँ,
सुख-दुख दोनों में मग्न रहा करता हूँ,
जग भव-सागर तरने को नाव बनाए,
मैं भव मौजों पर मस्त बहा करता हूँ।  (C.B.S.E. Model Question Paper, 2008, A.I.C.B.S.E, 2014)

शब्दार्थ : अग्नि-आग। जग-संसार। नाव-किश्ती। दहा-जला। भव-सागर-संसार रूपी सागर। मौजों पर-तरंगों पर, हिलोरों या लहरों पर।

प्रसंग : प्रस्तुत काव्यांश हमारी हिंदी की पाठ्य-पुस्तक ‘आरोह-भाग-2’ में संकलित कवि श्री हरिवंश राय बच्चन द्वारा रचित ‘आत्म-परिचय’ नामक कविता से अवतरित है। इसमें कवि ने आत्म-परिचय का चित्रण करते हुए सुख-दुखावस्था में एक समान रहने की प्रेरणा दी है।

व्याख्या : कवि कहता है कि मैंने अपने हृदय में वियोग रूपी अग्नि को जला रखा है जिसमें मैं निरंतर जलता रहता हूँ। मैं सुख और दुःख दोनों अवस्थाओं में मग्न रहता हूँ। मैं न तो सुख आने पर अत्यधिक खुश होता हूँ और न ही दुःख की प्रतिकूल परिस्थितियों में अधिक दुखी। दोनों भावों को अपने जीवन में एकसमान ग्रहण करता हूँ। कवि संसार को संबोधन करते हुए कहता है कि अन्य लोग इस संसार रूपी सागर को पार करने के लिए भले ही नाव का निर्माण करे, पर मेरी संसार रूपी सागर को पार करने की कोई इच्छा नहीं है।

मैं तो इस संसार की लहरों पर ही मस्ती में बहना चाहता हूँ। कवि का अभिप्राय यह है कि इस संसार रूपी सागर को पार करने अर्थात मोक्ष की कामना हेतु भले ही औरों को किसी अन्य सहारे रूपी नाव की आवश्यकता हो, पर उसे किसी अन्य की कोई आवश्यकता नहीं और न ही मोक्ष प्राप्ति की कोई कामना है। वह तो इसी संसार की लहरों पर बहना चाहता है।

अर्थग्रहण एवं सौंदर्य-सराहना संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
1. उपर्युक्त अवतरण के रचयिता का नाम लिखिए।
2. कवि किसमें मग्न रहता है?
3. कवि किन पर मस्ती में बहता है?
4. कवि अपने हृदय में किस अग्नि को जलाने की बात करता है?
5. इस अवतरण का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
1. उपर्युक्त अवतरण के रचयिता श्री हरिवंश राय बच्चन हैं।
2. कवि सुख और दुख दोनों में मग्न रहता है।
3. कवि इस संसार की तरह-तरह की मौजों पर मस्ती में भरकर बहता है।
4. कवि अपने हृदय में वियोग रूपी अग्नि को जलाने की बात करता है।
5. काव्य-सौंदर्य

  • कवि ने सुख-दुःख में सम रहने की प्रेरणा दी है।
  • भाषा सरल, साधारण, सरस खड़ी बोली है।
  • भव-सागर में रूपक अलंकार की छटा है।
  • अनुप्रास, पदमैत्री, स्वरमैत्री अलंकारों का प्रयोग है।
  • प्रतीकात्मक शैली का प्रयोग है।
  • बिंब योजना सार्थक है।
  • वियोग-शृंगार की अद्भुत छटा है।
  • माधुर्य गुण का सार्थक प्रयोग है।

5. मैं यौवन का उन्माद लिए फिरता हूँ,
उन्मादों में अवसाद लिए फिरता हूँ,
जो मुझको बाहर हँसा, रुलाती भीतर,
मैं, हाय, किसी की याद लिए फिरता हूँ, (C.B.S.E. Model Question Paper, 2008)

शब्दार्थ: यौवन-जवानी। अवसाद-दुख, पीड़ा। भीतर-आंतरिक रूप। उन्माद-जोश, मस्ती। बाहर-बाह्य रूप।

प्रसंग : प्रस्तुत पद्यांश हमारी हिंदी की पाठ्य-पुस्तक ‘आरोह-भाग-2’ में संकलित ‘आत्म-परिचय’ नामक कविता से अवतरित किया गया है, जिसके रचयिता श्री हरिवंश राय बच्चन हैं। ये हालावाद के प्रवर्तक कवि माने जाते हैं। इस काव्यांश में कवि ने अपने जीवन की आंतरिक पीड़ा का चित्रण किया है।

व्याख्या : कवि कहता है कि मैं तो अपनी जवानी का जोश लिए जी रहा हूँ। मेरे हृदय में आज भी वह जवानी की मस्ती और जोश है जिसमें मस्त होकर मैं जीवन-यापन कर रहा हूँ। इसी जवानी के पागलपन में अनेक दुख समाए हुए हैं। कवि कहता है कि मैंने जवानी में किसी से प्रेम करके उसकी यादों को अपने हृदय में संजोया था। आज उसी की यादों को अपने हृदय में सजाकर फिर रहा हूँ। ये । यादें मुझे बाह्य रूप से हँसा देती हैं लेकिन आंतरिक रूप से रुलाती हैं। मैं अपनी प्रिया की यादों को लेकर जीवन जी रहा हूँ। इस जहाँ को मैं बाहर से भले ही हँसता हुआ दिखाई दूं, लेकिन मैं हृदय से रोता रहता हूँ। उसकी यादें आज भी मुझे सताती रहती हैं।

अर्थग्रहण एवं सौंदर्य-सराहना संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
1. कवि किसका उन्माद लिए फिरता है?
2. कवि को किसकी याद रुलाती है? कैसे?
3. कवि के जीवन में जवानी के उन्माद के साथ-साथ और क्या है?
4. उपर्युक्त पंक्तियों का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
1. कवि यौवन का उन्माद लिए फिरता है।
2. कवि को उसकी प्रियतमा की याद रुलाती है। वह कवि को बाहर से हँसाती है तथा अंदर से रुलाती है।
3. कवि के जीवन में जवानी के उन्माद के साथ-साथ अनेक अवसाद हैं।
4. काव्य-सौंदर्य

  • आंतरिक पीड़ा का प्रतिपादन किया है।
  • भाषा खड़ी बोली है जो अत्यंत सरस एवं प्रवाहमयी है।
  • प्रतीकात्मक शैली का सार्थक प्रयोग है। यहाँ बाहर से ‘बाह्य स्वरूप’ का तथा भीतर से आंतरिक रूप का परिचय होता है।
  • अनुप्रास, पदमैत्री अलंकारों की शोभा है।
  • संस्कृत के तत्सम और तद्भव शब्दों का प्रयोग है।

6. कर यल मिटे सब, सत्य किसी ने जाना ?
नादान वहीं है, हाय, जहाँ पर दाना !
फिर मूढ़ न क्या जग, जो इस पर भी सीखे ?
मैं सीख रहा हूँ, सीखा ज्ञान भुलाना !

शब्दार्थ : यल – प्रयास। दाना – अक्लमंद, समझदार। जग = संसार। नादान – नासमझ। मूढ़ – मूर्ख।

प्रसंग : प्रस्तुत पद्यांश हमारी हिंदी की पाठ्य-पुस्तक ‘आरोह-भाग-2′ में संकलित कवि श्री हरिवंशराय बच्चन’ द्वारा रचित ‘आत्म-परिचय’ नामक कविता से अवतरित किया गया है। इसमें कवि ने ‘शाश्वत सत्य’ का वर्णन किया है।

व्याख्या : कवि प्रश्न करते हुए पूछता है कि इस संसार में बड़े-बड़े महापुरुषों ने सत्य को जानने का प्रयास किया, लेकिन आज तक कोई भी सत्य को नहीं जान पाया। सत्य (ब्रह्म) की खोज करते-करते सब समाप्त हो गए, फिर भी उसे नहीं जान पाए। कवि का अभिप्राय यह है कि इस संसार में आज तक कोई भी सत्य को पहचान नहीं सका। वह कहता है कि समाज में जहाँ पर अक्लमंद या समझदार लोग रहते हैं, वहीं पर नासमझ या मूर्ख भी निवास करते हैं। संसार को संबोधन कर कवि कहता है कि यह बात जानकर भी यह संसार मूर्ख है जो इसके बावजूद भी सीखना चाहता है। मैं तो भूले हुए ज्ञान को सीखने का प्रयास कर रहा हूँ।

अर्थग्रहण एवं सौंदर्य-सराहना संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
1. ‘कर यत्न मिटे सब, सत्य किसी ने जाना?’ पंक्ति में कवि किस सत्य की बात कहता है?
2. ‘नादान वहीं है, हाय, जहाँ पर दाना।’ पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
3. कवि संसार को मूर्ख क्यों कहता है ?
4. काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
1. इस पंक्ति में कवि अंतिम सत्य अर्थात परमात्मा की बात करता है। इस सत्य को जानने के लिए असंख्य महापुरुष लोग और उनके अनेक यत्न कर मिट गए।
2. इस पंक्ति का भाव यह है कि सृष्टि में जहाँ समझदार और विद्वान लोग रहते हैं, वहीं नासमझ और मूर्ख लोग भी निवास करते हैं।
3. कवि संसार को मूर्ख इसलिए कहता है क्योंकि यह संसार सत्य की खोज में मिटे असंख्य महापुरुषों को देखकर भी सचेत नहीं हुआ।
4. काव्य-सौंदर्य

  • कवि ने शाश्वत सत्य अर्थात ब्रह्म की ओर संकेत किया है।
  • संस्कृत के तत्सम और तद्भव शब्दों का प्रचुर प्रयोग हुआ है।
  • कवि की रहस्यवादी चेतना का चित्रण हुआ है।
  • अनुप्रास, पदमैत्री, प्रश्नवाचक अलंकारों की शोभा है।
  • प्रतीकात्मक शैली का प्रयोग है।
  • शांत रस है।
  • प्रसाद गुण है।

7. मैं और, और जग और, कहाँ का नाता,
मैं बना-बना कितने जग रोज़ मिटाता;
जग जिस पृथ्वी पर जोड़ा करता वैभव,
मैं प्रति पग से उस पृथ्वी को ठुकराता! (C.B.S.E. Outside Delhi 2013, Set-1)

शब्दार्थ : वैभव-धन, ऐश्वर्य। प्रति-पग-प्रत्येक चरण।

प्रसंग : प्रस्तुत काव्यांश हमारी हिंदी का पाठ्य-पुस्तक ‘आरोह-भाग-2’ में संकलित कवि ‘श्री हरिवंश राय बच्चन’ द्वारा रचित ‘आत्म-परिचय’ नामक कविता से अवतरित किया गया है। इसमें कवि ने बताया है कि उसका इस संसार से कोई नाता नहीं है। कवि कहता है कि मेरा इस संसार के साथ कोई संबंध नहीं है। मेरी और संसार की प्रकृति में बहुत अंतर है। मेरा स्वभाव कुछ और है तथा संसार का कुछ और। मेरी कोई और मंजिल है तथा इस स्वार्थी संसार की कोई और।

व्याख्या : कवि कहता है कि मैं तो प्रतिदिन ऐसे अनेक संसार बना-बना कर खत्म कर देता हूँ। मैं हर दिन ऐसे अनेक संसार की कल्पना करता हूँ और फिर उसे मिटा देता हूँ। ये संसार धन-ऐश्वर्य से प्रेरित होकर जिस पृथ्वी पर धन-ऐश्वर्य तथा शान-ओ-शौकत जोड़ता है, मैं उससे तनिक भी प्रभावित नहीं होता। ऐसी शान-ओ-शौकत को मैं पग-पग पर ठुकराता चलता हूँ। जिस पृथ्वी पर यह संसार झूठे धन-ऐश्वर्य खड़ा करता है मैं ऐसी ऐश्वर्य से परिपूर्ण पृथ्वी को पग-पग पर ठुकरा देता हूँ। ये धन-वैभव मुझे बिल्कुल भी विचलित नहीं कर सकते।

अर्थग्रहण एवं सौंदर्य-सराहना संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
1. कवि राग किसमें लिए हुए हैं?
2. ‘शीतल वाणी में आग लिए फिरता हूँ’ पंक्ति में विरोधाभास स्पष्ट कीजिए।
3. कवि किस खंडहर का अंग लिए हुए हैं?
4. उपर्युक्त अवतरण का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
1. कवि अपने रोदन में राग लिए हुए है।
2. शीतल वाणी अर्थात हृदय के उद्गार, आग अर्थात क्रोध रूपी आग। इसका आशय है कि कवि अपने हृदय की शीतल वाणी में भी क्रोध एवं व्यंग्य रूपी आग बरसाता है।
3. कवि उस खंडहर का अंग लिए हुए हैं, जिस पर अनेक राजाओं के महल न्योछावर हो जाते हैं।
4. काव्य-सौंदर्य

  • कवि ने अपने हृदय की पीड़ा का प्रतिपादन किया है।
  • खड़ी बोली भाषा सरस एवं प्रवाहमयी है।
  • तत्सम शब्दावली का प्रचुर प्रयोग है।
  • प्रतीकात्मक शैली का प्रयोग है।
  • अनुप्रास, स्वरमैत्री तथा पदमैत्री की छटा है।
  • माधुर्य गुण है।
  • शृंगार रस की वियोगावस्था का चित्रण हुआ है।
  • लक्षणा शब्द-शक्ति का प्रयोग भावानुरूप हुआ है।

8. मैं निज रोदन में राग लिए फिरता हूँ,
शीतल वाणी में आग लिए फिरता हूँ,
हों जिस पर भूपों के प्रासाद निछावर,
मैं वह खंडहर का भाग लिए फिरता हूँ। (C.B.S.E. Model Q. Paper, 2008)

शब्दार्थ : निज-अपना। भूपों के राजाओं के। निछावर-अर्पण, न्योछावर। भाग-अंश। रोदन-रोना, दुख। प्रासाद-महल। खंडहर-टूटा-फूटा महल।

प्रसंग : प्रस्तुत काव्यांश हमारी हिंदी की पाठ्य-पुस्तक ‘आरोह-भाग-2’ में संकलित कवि ‘श्री हरिवंश राय बच्चन’ द्वारा रचित ‘आत्म-परिचय’ नामक कविता से अवतरित किया गया है। इसमें कवि ने आत्मीय पीड़ा का चित्रण किया है।

व्याख्या : कवि कहता है कि मैं अपने आँसुओं में भी प्रेम-भरा गीत छिपाए फिरता हूँ। जिसे संसार मेरा रोदन समझता है, उसमें मेरे अनेक गीत छिपे हुए हैं। मैं अपनी अश्रुओं की धारा के माध्यम से अपने प्रेमगीतों का बखान करता चलता हूँ। मेरे हृदय में वाणी अत्यंत शीतल और कोमल है लेकिन मैं इस शीतलता में भी क्रोध रूपी आग छिपाए हूँ। कवि जग को संबोधित करते हुए कहता है कि मैं उस खंडहर का अंश लिए हूँ जिस पर महान प्रतापी राजा अपने महलों को न्योछावर कर देते हैं।

मेरे पास उस खंडहर का अंशमात्र है जिसके सामने बड़े-बड़े राजाओं के आलीशान महलों का भी कोई मूल्य नहीं है अर्थात कवि का प्रिया से वियोग होने पर हृदय विच्छिन हो गया, जो खंडहर की भाँति पड़ा है लेकिन फिर भी उसका मूल्य अनमोल है। वह इतना सुंदर है कि उसकी शोभा के समक्ष बड़े से बड़े राजा का आलीशान महल भी नगण्य है।

अर्थग्रहण एवं सौंदर्य-सराहना संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
1. संसार किसको गाना कहता है?
2. कवि के फूट-फूटकर रोने को संसार ने क्या नाम दिया?
3. कवि संसार से क्या अपेक्षा करता है?
4. उपर्युक्त अवतरण का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
1. संसार कवि के रोने को गाना कहता है।
2. कवि के फूट-फूट कर रोने को संसार ने छंद बनाना नाम दिया।
3. कवि संसार से यह अपेक्षा करता है कि संसार उसे एक कवि कहकर न बुलाए, बल्कि उसे एक नया दीवाना कहकर संबोधित करे।
4. काव्य-सौंदर्य

  • कवि ने अपनी अंत:पीड़ा का प्रतिपादन किया है।
  • संस्कृत के तत्सम और तद्भव शब्दों का प्रयोग है।
  • भाषा खड़ी बोली है।
  • अनुप्रास, स्वरमैत्री, पदमैत्री अलंकारों की शोभा दर्शनीय है।

9. मैं रोया, इसको तुम कहते हो गाना,
मैं फूट पड़ा, तुम कहते, छंद बनाना,
क्यों कवि कहकर संसार मुझे अपनाए,
मैं दुनिया का हूँ एक नया दीवाना !

शब्दार्थ : फूट पड़ा-जोर से रोया। दीवाना-प्रेम करने वाला, आसक्त। छंद बनाना-कविता लिखना या कहना।

प्रसंग : प्रस्तुत पद्यांश हमारी हिंदी की पाठ्य-पुस्तक ‘आरोह-भाग-2’ में संकलित तथा कवि ‘हरिवंश राय बच्चन’ द्वारा रचित कविता
‘आत्म-परिचय’ से अवतरित किया गया है। इसमें कवि ने हृदय की पीड़ा का चित्रण किया है।

व्याख्या : कवि संसार को संबोधन करते हुए कहता है कि मैं दुख में अत्यंत दुखी होकर रोया था लेकिन तुम मेरे रोने को भी गीत समझ रहे हो। हृदय में अपार वेदना के कारण मैं तो जोर-जोर से रोया लेकिन इसे भी तुम कविता कहना समझते रहे। कवि का कहने का अभिप्राय यह है कि यह संसार तो बिल्कुल अजीब है।

यह किसी की आंतरिक भावनाओं को नहीं समझ सकता। मैं जब साधारण रूप से रोया था तो उसे यह मेरा गीत गाना समझ रहे थे, लेकिन जब असीम पीड़ा के कारण मेरा हृदय जोर-जोर से चिल्लाकर रोने लगा तो उसे इसने मेरा कविता करना मान लिया। इस प्रकार यह हृदयहीन संसार मेरी आंतरिक पीड़ा को नहीं समझ रहा है। कवि पुनः इस जग को संबोधित करते हुए कहता है कि यह संसार मुझे एक कवि मानकर क्यों अपनाना चाहता है। मैं एक कवि नहीं हूँ बल्कि मैं तो इस जहाँ का एक नया प्रेमी हूँ। एक नया दीवाना हूँ जो अपनी प्रेमवाणी का बखान कर

अर्थग्रहण एवं सौंदर्य-सराहना संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
1. संसार किसको गाना कहता है?
2. कवि के फूट-फूटकर रोने को संसार ने क्या नाम दिया?
3. कवि संसार से क्या अपेक्षा करता है?
4. उपर्युक्त अवतरण का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
1. संसार कवि के रोने को गाना कहता है।
2. कवि के फूट-फूट कर रोने को संसार ने छंद बनाना नाम दिया।
3. कवि संसार से यह अपेक्षा करता है कि संसार उसे एक कवि कहकर न बुलाए, बल्कि उसे एक नया दीवाना कहकर संबोधित करे।
4. काव्य-सौंदर्य

  • कवि ने अपनी अंत:पीड़ा का प्रतिपादन किया है।
  • संस्कृत के तत्सम और तद्भव शब्दों का प्रयोग है।
  • भाषा खड़ी बोली है।
  • अनुप्रास, स्वरमैत्री, पदमैत्री अलंकारों की शोभा दर्शनीय है।

10. मैं दीवानों का वेश लिए फिरता हूँ,
मैं मादकता निःशेष लिए फिरता हूँ,
जिसको सुनकर जग झूमे, झुके, लहराए,
मैं मस्ती का संदेश लिए फिरता हूँ।

शब्दार्थ : दीवानों का-प्रेम में पागल व्यक्तियों का, प्रेमियों का। मादकता-नशा, उन्माद । वेश-पहनावा, रूप। निःशेष-बिल्कुल थोड़ा-सा, समाप्त।

प्रसंग : प्रस्तुत काव्यांश हमारी हिंदी की पाठ्य-पुस्तक ‘आरोह-भाग-2’ में संकलित तथा श्री हरिवंश राय बच्चन द्वारा रचित ‘आत्म-परिचय’ नामक कविता से अवतरित किया गया है। इसमें कवि ने संसार को प्रेम और मस्ती का संदेश दिया है जिसमें यह संसार झूम उठे तथा लहराने लगे।

व्याख्या : कवि का कथन है कि मैं इस संसार में प्रेम में पागल प्रेमियों का रूप लेकर जीवनयापन कर रहा हूँ अर्थात मैंने अपने हृदय में एक प्रेमी को बिठाकर उसी का वेश धारण कर लिया है। मेरे हृदय में अभी भी थोड़ी-सी मादकता का नशा बाकी है और उसी मादकता में डूबकर मैं जी रहा हूँ। कवि कहता है कि मैं इस हृदयहीन और दुखी संसार को एक ऐसा मस्ती का संदेश देना चाहता हूँ, जिसको सुनकर यह संपूर्ण दुखी संसार झूम उठे और मस्ती में डूब कर लहराने लगे तथा इस मस्ती के आगे झुक जाएं।

अर्थग्रहण एवं सौंदर्य-सराहना संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
1. कवि किसका वेश लिए फिरता है?
2. कवि किसका संदेश देता है?
3. कवि के संदेश को सुनकर संसार क्या-क्या प्रतिक्रियाएँ करता है?
4. उपर्युक्त अवतरण का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
1. कवि दीवानों का वेश लिए फिरता है।
2. कवि संसार को मस्ती का संदेश देता है।
3. कवि का संदेश सुनकर यह संसार झूम उठता है, झुक जाता है तथा लहराने लगता है।
4. काव्य-सौंदर्य

  • कवि दुखी हृदयहीन संसार को मस्ती का संदेश देना चाहता है।
  • खड़ी बोली, भाषा सहज, सरस एवं प्रवाहमयी है।
  • गेय मुक्तक शैली का प्रयोग है।
  • माधुर्य गुण है। शृंगार रस की छटा है।
  • अनुप्रास, स्वरमैत्री तथा पदमैत्री अलंकारों की शोभा दर्शनीय है।
  • अभिधा शब्द-शक्ति का सटीक प्रयोग हुआ है।
  •  तत्सम शब्दावली का प्रचुर प्रयोग है।।

11. दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!
हो जाए न पथ में रात कहीं,
मंजिल भी तो है दूर नहींयह
सोच थका दिन का पंथी भी जल्दी-जल्दी चलता है!
दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!

शब्दार्थ : ढलता है-अस्त होता है। मंजिल-लक्ष्य, जहाँ पहुँचना है। पथ-रास्ता। दिन का पंथी-सूर्य।

प्रसंग : प्रस्तुत काव्यांश हमारी हिंदी की पाठ्य-पुस्तक ‘आरोह-भाग-2’ में संकलित कवि श्री हरिवंश राय बच्चन द्वारा रचित ‘एक गीत’ नामक कविता से अवतरित किया गया है। बच्चन जी हालावाद के प्रवर्तक तथा आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रमुख कवि माने जाते हैं। इस काव्यांश में कवि ने समय के व्यतीत होने के साथ-साथ पथिक के मंजिल पर पहुँचने तथा उसे प्राप्त करने के जज्बे का चित्रण किया है।

व्याख्या : कवि का कथन है कि समय परिवर्तनशील है जो निरंतर चलायमान अवस्था में रहता है। वह कभी भी नहीं रुकता। समय के इसी परिवर्तन और अभाव को देखकर दिन में चलने वाला पथिक अर्थात सूर्य भी यह सोचकर अत्यंत शीघ्रता से चलता है कि कहीं रास्ते में ही रात न हो जाए, जबकि उसकी मंजिल भी अधिक दूर नहीं है। कवि का कहने का अभिप्राय यह है कि मानव जीवन क्षणभंगुर है। अतः समय बहुत कम है जो अत्यंत तेजी से गुजरता हुआ चलता है। मनुष्य रूपी यात्री को यह चिंता रहती है कि कहीं उसके लक्ष्य को प्राप्त करने से पहले ही उसके रास्ते में रात न हो जाए। यह सोच वह अत्यंत शीघ्रता से चलता है। कवि कहता है कि दिन अत्यंत शीघ्रता से व्यतीत होता है।

अर्थग्रहण एवं सौंदर्य-सराहना संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
1. उपर्युक्त काव्यांश के कवि तथा कविता का नाम बताएँ।
2. ‘हो जाए न पथ में रात कहीं’ यहाँ कवि किस पथ और रात की बात करता है?
3. ‘मंजिल भी तो है दूर नहीं’ पंक्ति में निहित लाक्षणिक अर्थ को स्पष्ट कीजिए।
4. इस काव्यांश का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
1. उपर्युक्त काव्यांश के कवि का नाम श्री हरिवंश राय बच्चन है तथा कविता का नाम ‘एक गीत’ है।
2. यहाँ कवि जीवन रूपी पथ और मृत्यु रूपी रात की बात करता है।
3. इस पंक्ति का आशय है कि मनुष्य की वह मंज़िल भी अधिक दूर नहीं है जहाँ उसे मृत्यु के बाद पहुँचना है।
4. काव्य-सौंदर्य

  • कवि ने अपनी रहस्यवादी चेतना का चित्रण किया है।
  • ‘जल्दी-जल्दी’ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार की छटा दर्शनीय है।
  • भाषा खड़ी बोली, सरल, सरस तथा प्रवाहमयी है।
  • तत्सम और तद्भव शब्दावली का प्रयोग है। (५) प्रसाद गुण है।
  • शांत रस है।
  • बिंब योजना अत्यंत सटीक एवं सार्थक है।

12. बच्चे प्रत्याशा में होंगे,
नीड़ों से झाँक रहे होंगे
यह ध्यान परों में चिड़ियों के भरता कितनी चंचलता है।
दिन जल्दी-जल्दी ढलता है। (A.I. C.B.S.E. 2012, Set-I, 2018)

शब्दार्थ : प्रत्याशा-आशा। झाँकना-देखना। नीड़ों से-घोंसलों से। परों में-पंखों में।

प्रसंग : प्रस्तुत काव्यांश हमारी हिंदी की पाठ्य-पुस्तक ‘आरोह-भाग-2’ में संकलित ‘एक गीत’ नामक कविता से अवतरित किया गया है जिसके रचयिता ‘श्री हरिवंश राय बच्चन’ जी हैं। इस काव्यांश में कवि ने दाने की खोज में गए पक्षियों (प्राणियों) का अपने बच्चों के प्रति वात्सल्य भाव का चित्रण किया है।

व्याख्या : कवि का कथन है कि लौटते पक्षियों को जब यह महसूस होता है कि उनके बच्चे घोंसलों में उनकी राह देख रहे होंगे और उनके आने की आशा मन में लिए घोंसलों से झाँक रहे होंगे। यह ध्यान उन चिड़ियों के पंखों में न जाने कितनी चंचलता भर देता है अर्थात जब भी चिड़ियों को अपने बच्चों की याद आती है तो उनके पंखों में अपने बच्चों की वात्सल्य भाव के कारण और अधिक स्फूर्ति छा जाती है। कवि कहता है कि दिन अत्यंत शीघ्रता से व्यतीत हो रहा है।

अर्थग्रहण एवं सौंदर्य-सराहना संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
1. बच्चे किसकी प्रत्याशा में होंगे?
2. नीड़ों से कौन झाँक रहे होंगे और क्यों?
3. चिड़ियों के पंखों में कौन-सा ध्यान चंचलता उत्पन्न करता है?
4. इस अवतरण का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
1. बच्चे अपनी माताओं की प्रत्याशा में होंगे।
2. नीडों से चिडियों के बच्चे झाँक रहे होंगे, क्योंकि संध्या के समय उनकी माताएँ उनके पास नहीं हैं।
3. चिड़ियों के पंखों में यह ध्यान चंचलता उत्पन्न करता है कि संध्या के समय घोंसलों में उनके बच्चे उनके आने की प्रतीक्षा करते हुए घोंसलों से झाँक रहे होंगे।
4. काव्य-सौंदर्य

  • चिड़ियों का बच्चों के प्रति वात्सल्य भाव का चित्रण है।
  • खड़ी बोली की भाषा सरल एवं सरस है।
  • मुक्तक छंद है।
  • अनुप्रास, पुनरुक्ति प्रकाश, पदमैत्री, स्वरमैत्री अलंकारों की शोभा है।
  • तत्सम और तद्भव शब्दावली का प्रयोग है।
  • प्रसाद गुण है।
  • अभिधा शब्द-शक्ति का प्रयोग है।

13. मुझसे मिलने को कौन विकल?
मैं होऊँ किसके हित चंचल?
यह प्रश्न शिथिल करता पद को, भरता उर में विहवलता है!
दिन जल्दी-जल्दी ढलता है।

शब्दार्थ : विकल-याकुल। शिथिल करना-सुस्त करना, मंद करना। विह्वलता-व्याकुलता। हित-के लिए। उर-हृदय।

प्रसंग : प्रस्तुत काव्यांश हिंदी की पाठ्य-पुस्तक ‘आरोह-भाग-2’ में संकलित ‘एक गीत’ से अवतरित है जिसके रचयिता हरिवंश राय बच्चन हैं। इस काव्यांश में कवि ने प्राणी की व्याकुलता का चित्रण किया है।

व्याख्या : कवि का कथन है कि अपने जीवन रूपी पथ पर चलता हुआ प्राणी चिंतन करता है। वह अपने मन ही मन में सोच रहा है कि इस जीवन मार्ग में अपनी मंजिल की ओर आगे बढ़ते हुए मुझसे मिलने के लिए कौन व्याकुल हो रहा है तथा मैं भी किसके लिए दुखी हो रहा हूँ। कवि कहता है कि जब-जब पथिक के हृदय में यह प्रश्न उठता है तो यह प्रश्न

उसके पाँवों को कमजोर कर देता है, उन्हें सुस्त बना देता है तथा राही के हृदय में अपार व्याकुलता भर देता है अर्थात जीवन रूपी मार्ग पर अग्रसर होते हुए जब भी पथिक को किसी का ध्यान आता है तो वह उसके पैरों को सुस्त कर उसके हृदय में व्याकुलता भर देता है क्योंकि उसे लगता है कि ऐसा कोई भी नहीं है जो उससे मिलने को व्याकुल हो। कवि कहता है कि दिन अत्यंत शीघ्रता से व्यतीत हो रहा है। समय शीघ्र गुजर रहा है।

अर्थग्रहण एवं सौंदर्य-सराहना संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
1. ‘मुझसे मिलने को कौन विकल?’ पंक्ति में निहित भाव स्पष्ट कीजिए।
2. कौन-सा प्रश्न पद को शिथिल करता है?
3. हृदय में व्याकुलता कौन भरता है?
4. काव्यांश का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
1. इस पंक्ति का भाव यह है कि जीवन रूपी पथ पर बैठते हुए राही सोचता है कि उससे इस राह में मिलने के लिए कौन व्याकुल हो रहा है।
2. जीवन रूपी राह पर चलते हुए मुझसे मिलने के लिए कौन व्याकुल है तथा मैं किसके लिए रोमांचित हो जाऊँ, यह प्रश्न पद को शिथिल करता है।
3. जीवन में उठने वाले ये प्रश्न कि उससे मिलने के लिए व्याकुल कौन है तथा वह किसके लिए रोमांचित है, यह प्रश्न हृदय में व्याकुलता भरता है।
4. काव्य-सौंदर्य

  • कवि ने राही के पथ से ध्यान भटक जाने की ओर संकेत किया है।
  • प्रश्न अलंकार, पुनरुक्ति प्रकाश, पदमैत्री, स्वरमैत्री तथा अनुप्रास अलंकारों की छटा शोभनीय है।
  • भाषा सहज, सरल एवं सरस है।
  • तत्सम शब्दावली का प्रचुरता से प्रयोग है। (५) मुक्तक छंद है।
  • अभिधात्मक शैली का प्रयोग है।
  • प्रसाद गुण है।
  • बिंब योजना सार्थक एवं सटीक है।
An Elementary School Classroom in a Slum Extra Questions and Answers Important Questions Class 12 English Flamingo

Online Education for An Elementary School Classroom in a Slum Extra Questions and Answers Important Questions Class 12 English Flamingo

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Online Education for An Elementary School Classroom in a Slum Extra Questions and Answers Important Questions Class 12 English Flamingo

An Elementary School Classroom in a Slum Extra Questions and Answers Short Answer Type

An Elementary School Classroom In A Slum Questions And Answers Question 1.
What do you think is the colour of ‘sour cream’? Why do you think the poet has used this expression to describe the classroom walls ?
Answer:
The poet says that the colour of the walls is of‘sour cream’. The poet wants to convey the idea that the children living in the slum has no happiness in their life. It has become sour and the cream colour represents paleness. The children have no vitality in their lives, thus they have become pale due to malnutrition.

An Elementary School Classroom In A Slum Extra Questions And Answers Question 2.
The walls of the classroom are decorated with the pictures of ‘Shakespeare’, ‘buildings with domes’, ‘world maps’ and beautiful valleys. How do these contrast with the world of these children ?
Answer:
The world of the children living in slum is totally different from the pictures of Shakespeare, maps beautiful valleys and big buildings. Their world is confined to the slum in which they are living. The open joyful world is accessible to them.

Elementary School Classroom In A Slum Questions Question 3.
What does the poet want for the children of the slums ? How can their lives be made to change ?
Answer:
The poet wants that the children should be taken out of their slums. Their living conditions should be changed. The poet wants that the children should be shown green fields; they should be allowed to live a free and carefree life. Without any worry, they can concentrate well on their studies.

An Elementary School Classroom In A Slum Questions And Answers Extra Question 4.
What does Stephen Spender want for the children of the school in a slum ?
Answer:
The poet wants that the children should be shown green fields; they should be allowed to live a free and carefree life. Without any worry, they can concentrate well on their studies. The poet says only those people create history who are carefree.

An Elementary School Classroom In A Slum Short Questions And Answers Question 5.
How is ‘Shakespeare wicked and the map a bad example’ for the children of the school in a slum ?
Answer:
The poet says that it will be useless to talk about Shakespeare to the children in the classroom. He even says that Shakespeare is wicked. The big map with all its places, ships and so on tempts the children to steal. These children have to spend their lives in small homes. The poet means to say that for the children their world is only the slums not the big maps.

An Elementary School Classroom In A Slum Important Questions Question 6.
Which words/phrases in the poem ‘An Elementary School Classroom in a Slum’ show that the slum children are suffering from acute malnutrition ?
Answer:
There are many words and phrases in the poem that show the slum children are suffering from malnutrition. These words and phrases are hair torn round their pallor’, ‘tall girl with her weighed-down’ head, ‘the paper seeming boy’ and ‘the stunted heir of twisted bones’.

An Elementary School Classroom In A Slum Question Answer Question 7.
How does the poet describe the classroom walls ?
Answer:
The poet explains the classroom in detail. He says that the walls of the classroom have cream colour. They smell like sour cream. They are decorated with many pictures, maps of the world and the pictures of Shakespeare.

Extra Questions Of Elementary School Classroom In A Slum Question 8.
Whom does the poet appeal to change the life of the children for better ?
Answer:
The poet appeals to the governor, inspector and the visitors to do something for the poor children. The poet wants that the children should be shown green fields; they should be allowed to live a free and carefree life. Without any worry they can concentrate well on their studies. The poet says only those people create history who are carefree.

Elementary School Classroom In A Slum Extra Questions Question 9.
How does the poet describe the walls of the classroom wall ?
Answer:
The poet says that the walls of the classroom are cream. They smell like sour cream. There is a bust of Shakespeare in the classroom. There are pictures of big church and Tyrolese valley having bell-shaped flowers. There is an open-handed map, which shows all the places of the world.

Extra Questions Of An Elementary School Classroom In A Slum Question 10.
Why does the Stephen Spender say that the pictures and maps in the elementary school classroom are not meaningful ?
Answer:
The poet says that there is a bust of Shakespeare in the classroom. There are pictures of a big church and the Tyrolese valley having bell-shaped flowers. There is an open-handed map, which shows all the places of the world. But ironically for the children living in the slum their world is not that map but only the scene that can be seen outside the window of their classroom. Therefore, the pictures and maps on the wall are meaningless.

An Elementary School Classroom In A Slum Extra Questions Question 11.
How does the world depicted on the classroom walls differ from the world of the slum children ?
Answer:
There are many pictures and maps on the walls of the classroom walls. They present a very rosy picture of the world. But ironically the lives of the children living in the slum are very gloomy. They live a very miserable life.

Question Answer Of An Elementary School Classroom In A Slum Question 12.
What message does Stephen Spender convey through the poem ‘An Elementary School Classroom in a Slum’ ?
Answer:
The message conveyed in this poem is that the children living in the slum should be given better facilities. They should be taken out of their slums. Only then they can become useful citizens.

An Elementary School Classroom in a Slum Extra Questions and Answers Long Answer Type

Question 1.
Write in brief the summary of the poem.
Answer:
The poet describes some children sitting in an elementary school. This school is situated in a slum. The children sitting here present a very miserable view. Their hair are like weeds and scattered on their pale face. Then the poet describes a tall girl. She is sitting with her head bent. There is a small and thin looking boy. His eyes are like that of a rat’s eyes. Then there is an another boy who has disease of swollen and twisted bones and joints. He has got his disease from his father.

The poet notices a young and sweet boy sitting at the back of the class. He is perhaps dreaming about the squirrel’s game. He is perhaps dreaming of having such tree-room for him¬self also. The poet says that the walls of the classroom are cream. They smell like sour cream. There is a bust of Shakespeare in the classroom. There are pictures of big church and the Tyrolese valley having bell-shaped flowers. There is an open-handed map, which shows all the places of the world. But ironically for the children living in the slum their world is not that map but only the scene that can be seen outside the window of their classroom.

The poet says that it will be useless to talk about Shakespeare to the children in the classroom. He even says that Shakespeare is wicked. The big map with all its places, ships and so on tempts the children to steal. These children have to spend their lives in small homes. Their lives are nothing but an endless night. The children have grown so weak that their bones could be seen from their skin. Many of these wear spectacles, and these spectacles have mended glass.

The poet appeals to the governor, inspector and the visitors to do something for the poor children. The poet wants that the children should be shown green fields; they should be allowed to live a free and carefree life. Without any worry they can concentrate well on their studies. The poet says only those people create history who are carefree.

Question 2.
Write the central idea of the poem in detail.
Answer:
This poem is about the children who are living in a slum. They are mostly suffering from malnutrition. In their classroom, there are many beautiful pictures. There is an open handed map and the bust of . Shakespeare. The poet wants that these children should be taken out of their slum and they should be shown green fields and be allowed to run freely. Therefore, he appeals to the officials to do some thing for the children.

The poet says that only those people can create history who can enjoy anything under the sun. Therefore, the poet wants that these children should also be provided proper facilities so that they can grow into useful citizens.

An Elementary School Classroom in a Slum Extra Questions and Answers Stanza For  Comprehension

Stanza 1

Far far from gusty waves these children’s faces.
Like rootless weeds, the hair torn round their pallor :
The tall girl with her weighed-down head.

Questions
(a) Who are these children ?
(b) Which figure of speech has been used in the first two lines ?
(c) Why is the tall girl’s head weighed-down ?
(d) What does the word ‘pallor’ mean ?
Answers
(a) These children are very poor children who live in a slum and sitting in a school classroom of the slum.
(b) The figure of speech used in the first two lines ‘simile’ A. like rootless weeds.
(c) The tall girl appears to be very sad with the condition of life. She might have many responsibilities. Therefore, her head is weighed-down.
(d) The word ‘pallor’ means the pale faces of the children due to malnutrition.

Stanza 2

At back of the dim class
One unnoted, sweet and young. His eyes live in a dream,
Of squirrel’s game, in tree room, other than this.

Questions
(a) Why is the class dim ?
(b) How is the young child different from others ?
(c) What is he doing ?
(d) What is a tree room ?
Answers
(a) The class is dim because no one takes care of its paint as a result it has become dark and dingy. Possibly, the poet here also wants to indicate the poor class of society and their dark and dim future.
(b) All the other children look gloomy. But the young child is quite different from them. He is full of bright dreams of his future.
(c) He is possibly dreaming about the squirrel’s game in the tree room.
(d) A tree room is a type of hole in the trunk of a tree where the little animals or birds make their homes.

Stanza 3

On sour cream walls, donations.  Shakespeare’s head,
Cloudless at dawn, civilized dome riding all cities.
Belled, flowery, Tyrolese valley. Open-handed map
Awarding the world its world.

Questions
(a) Name the poem and its poet.
(b) What is meant by ‘sour cream walls’ ?
(c) What donations are displayed on the walls ?
(d) Why does the poet call the map ‘open-handed’ ?
Answers
(a) The name of the poem is ‘An Elementary School Class¬room in a Slum’ and the name of the poet is Stephen Spender.
(b) Sour cream walls mean damp and faded walls of the classroom that give foul smell.
(c) There are many things donated by people are displayed
on the walls. They include pictures, map and Shakespeare’s bust. .
(d) The map has been called ‘open-handed’ because all the places of the world are shown in it and it is big.

Stanza 4

And yet, for these
Children, these windows, not this map, their world,
Where all their future’s painted with a fog,
A narrow street sealed in with a lead sky Far far from rivers,
capes, and stars of words.

Questions
(a) Who are the children referred to here ?
(b) Which is their world ?
(c) How is their life different from that of other children ?
(d) Why is the future of these children ‘painted with a fog ?
Answers
(a) The children referred to here are the children living in the slum.
(b) Their world is confined to the slum in which they are living.
(c) The other children of well-to-do families have all basic facilities of life. They are free to go anywhere. But the children living in the slum are confined to their little dark world.
(d) The future of these children is very dark. Therefore the poet calls it ‘painted with a fog’.

Stanza 5

With ships and sun and love tempting them to steal
For lives that slyly turn in their cramped holes
From fog to endless night ?

Questions
(a) Who are ‘them’ referred to in the first line ?
(b) What tempts them ?
(c) What does the poet say about ‘their’ lives ?
(d) What do you understand ‘from fog to endless night’ ?
Answers
(a) The word ‘them’ in these lines referred to the children living in the slum.
(b) The beautiful places shown in the map tempt them.
(c) The poet says that ‘their’ lives are like a life of a mouse. The children are compelled to live in very small rooms as the mice live in holes.
(d) This phrase means that the children living in the slum have a very miserable existence. They have to suffer a lot from dawn till night and would never overcome.

Stanza 6

On their slag heap, these children Wear skins peeped through by bones and spectacles of steel
With mended glass, like bottle bits on stones.
All of their time and space are foggy slum.
So blot their maps with slums as big as doom.

Questions
(a) Name the poem and the poet.
(b) Which two images are used to describe these slums ?
(c) What sort of life do these children lead ?
(d) Which figure of speech is used in the last line ?
Answers
(a) The name of the poem is ‘An Elementary School Class¬room in a Slum’. The name of the poet is Stephen Spender.
(b) The sickly bodies of the children has been compared to a slag heap. Their mended spectacles have been compared to the bottle bits on stones.
(c) These children live a very poor and miserable life.
(d) The poetic device simile is used in the last line – slums as big as doom.

Stanza 7

Unless, governor, inspector, visitor,
This map becomes their window and these windows
That shut upon their lives like catacombs,
Break O break open till they break the town.

Questions
(a) Name the poem and the poet.
Ob) What does the poet want from the governor, inspector and visitors ?
(c) What are ‘these windows’ which the poet talks of ?
(d) ‘That shut upon their lives like catacombs’. Which figure of speech has been used in this line ?
Answers
(a) The name of the poem is ‘An Elementary School Classroom in a Slum’ and the name of the poet is Stephen Spender.
(b) The poet wants that they should come and do something for the betterment of the children living in a slum.
(c) They are the classroom windows from where the children can see the narrow street of their slum.
(d) The figure of speech used here is simile

Online Education for Class 12 Hindi Important Questions Vitan Chapter 1 सिल्वर वैडिंग 

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Online Education for सिल्वर वैडिंग Class 12 Important Extra Questions Hindi Vitan Chapter 1

प्रश्न 1.
यशोधर बाबू दिल्ली कब और क्यों आए ?
उत्तर
यशोधर बाबू ने अल्मोड़ा के रेम्जे स्कूल में मैट्रिक की परीक्षा पास की। इसके बाद वे दिल्ली आ गए क्योंकि उन्हें आजीविका चलाने के लिए किसी नौकरी की तलाश थी।

प्रश्न 2.
दिल्ली आने पर यशोधर बाबू की सहायता किसने की और कैसे ?
उत्तर
दिल्ली आने पर यशोधर बाबू की सहायता किशनदा ने की। किशनदा ने यशोधर बाबू को रहने के लिए घर ही नहीं दिया बल्कि उसे मेस में रसोइया बनाकर भी रख लिया। उन्होंने यशोधर को पचास रुपए उधार भी दिए ताकि वह अपने लिए कपड़े बनवा सके तथा अपने गाँव पैसा भेज सके। इसके बाद नौकरी की उम्र होने पर किशनदा ने उन्हें अपने दफ्तर में अपने नीचे नौकरी पर लगवा दिया।

प्रश्न 3.
यशोधर साइकिल छोड़कर दफ्तर पैदल क्यों जाने लगे ?
उत्तर
यशोधर बाबू साइकिल छोड़कर दफ्तर पैदल इसलिए जाने लगे क्योंकि उनके बच्चे आधुनिक विचारों के थे। उन्हें अपने पिता का साइकिल पर आना-जाना अच्छा नहीं लगता था। उनका विचार था कि साइकिल तो चपरासी चलाते हैं, इसलिए पिता जी स्कूटर पर दफ्तर जाएँ किंतु यशोधर बाबू को स्कूटर बिल्कुल बेकार सवारी मालूम होती थी।

प्रश्न 4.
यशोधर बाबू ने नई रीत कौन-सी अपनाई ?
उत्तर
यशोधर बाबू प्रतिदिन दफ्तर से लौटते समय बिड़ला मंदिर जाने लगे। वे मंदिर के उद्यान में कुछ समय तक बैठकर कोई प्रवचन सुनने लगे। इसके साथ-साथ वे स्वयं प्रभु का ध्यान लगाते थे। उन्होंने अपनी आत्मिक शांति के लिए यह नई रीति अपनाई।

प्रश्न 5.
यशोधर बाबू की पत्नी तथा बच्चों को उनका कौन-सा व्यवहार बुरा लगता था और क्यों ?
उत्तर
यशोधर की पत्नी तथा बच्चों को उनका प्रतिदिन मंदिर जाकर प्रवचन सुनना और प्रभु का ध्यान लगाना बुरा लगता था। क्योंकि उनका सोचना था कि उनके पिता अभी बूढ़े नहीं हुए हैं जो प्रतिदिन मंदिर जाएँ और इतने अधिक व्रत-उपवास आदि करें।

प्रश्न 6.
यशोधर बाबू की अपनी पत्नी तथा बच्चों के विचारों में भिन्नता क्यों थी ?
उत्तर
यशोधर बाबू एक सिद्धांत-प्रिय व्यक्ति थे। वे प्राचीन जीवन-मूल्यों में पूरा विश्वास रखते थे, किंतु उनकी पत्नी तथा बच्चे आधुनिक विचारों के थे। इसीलिए उनके पत्नी तथा बच्चों से विचारों में भिन्नता थी।

प्रश्न 7.
यशोधर बाबू दफ्तर से छुट्टी होने के बाद भी जल्दी घर लौटना पसंद क्यों नहीं करते थे ?
उत्तर
यशोधर बाबू दफ्तर से छुट्टी होने के बाद भी जल्दी घर लौटना पसंद इसलिए नहीं करते थे क्योंकि उनका अपनी पत्नी तथा बच्चों से हर छोटी-छोटी बात पर मतभेद होने लगा था। उनकी कोई बात नहीं सुनता था और न ही मानता था।

प्रश्न 8.
यशोधर बाबू अपने बच्चों की तरक्की होने पर ज्यादा खुश क्यों नहीं थे ?
उत्तर
यशोधर बाबू अपने बच्चों की तरक्की होने पर ज्यादा खुश इसलिए नहीं थे क्योंकि उनके बच्चे आधुनिक रहन-सहन में रहने लगे थे। पैसा होने पर वे सभी जीवन-मूल्य भुला चुके थे। वे सदा अपने गरीब रिश्तेदारों की उपेक्षा करते थे। समय आने पर अपने पिता जी को भी अपमानित करने में उन्हें कोई शर्म नहीं थी।

प्रश्न 9.
यशोधर बाबू की पत्नी मॉड कैसे बन गई ?
उत्तर
यशोधर बाबू की पत्नी अपने मूल संस्कारों से किसी भी तरह से आधुनिक नहीं थी। किंतु फिर भी वह अपने आधुनिक बच्चों की मातृसुलभ मजबूरी के कारण तरफदारी करती थी। इसी मातृसुलभ बच्चों की तरफदारी से यशोधर बाबू की पत्नी मॉड बन गई।

प्रश्न 10.
यशोधर बाबू तथा उसकी पत्नी के आधुनिकता के प्रति विचारों में कैसा दवंद्व था ?
उत्तर
यशोधर बाबू की पत्नी धर्म-कर्म, कुल परंपरा, सबको ढोंग-ढकोसला कहकर आधुनिकता का आचरण करती थी। किंतु यशोधर बाबू शायनल बुढ़िया, चटाई का लहंगा, बुढी मुँह मुँहासे, लोग करें तमासे आदि कहकर पत्नी के विद्रोह का मजाक में उड़ाते थे।

प्रश्न 11.
परलोक के बारे में उत्साही होने पर यशोधर बाबू ने क्या किया ?
उत्तर
परलोक के बारे में उत्साही होने पर यशोधर बाबू बिड़ला मंदिर जाना शुरू किया। वहाँ जाकर उन्होंने लक्ष्मी-नारायण के आगे हाथ जोड़कर प्रार्थना करते और प्रवचन सुनते। प्रभु के चरणों से आशीर्वाद के फूल उठाते तथा महात्मा जी के गीता पर प्रवचन सुनते।

प्रश्न 12.
यशोधर बाबू को पत्नी का कैसा रहन-सहन समहाऊ इंप्रापर मालूम होता है ?
उत्तर
यशोधर बाबू की पत्नी बिना बाँह का ब्लाउज पहनती थी। रसोई से बाहर दाल-भात खाती थी। ऊँची हील वाली सैंडल पहनती थी। यही सब यशोधर बाबू को समहाऊ इंप्रापर मालूम होता था।

प्रश्न 13.
यशोधर बाबू अपने बच्चों से कैसा व्यवहार चाहते थे ?
उत्तर
यशोधर बाबू चाहते थे कि उन्हें समाज का सम्मानित बुजुर्ग माना जाए। उसके बच्चे उसका आदर-सम्मान करें। प्रत्येक बात में उसकी सलाह लें।

प्रश्न 14.
यशोधर बाबू के बच्चों को अपने पिता से क्या शिकायत थी?
उत्तर
यशोधर बाबू प्राचीन मूल्यों एवं विचारों के आदमी थे। उन्हें लोक-दिखावा तथा भीड़-भाड़ पसंद नहीं थी किंतु उनके बच्चे आधुनिक विचारों के थे। उन्हें पार्टी, समारोह आदि करना तथा आधुनिक परिधान पहनना अच्छा लगता था। उन्होंने अपने पिता की सिलवर वैडिंग का आयोजन किया और वहाँ बड़े-बड़े लोगों को बुलाया। परंतु उनके पिता वहाँ देर से आए। उनके बच्चों को यही शिकायत थी कि वे केवल एल० डी० सी० टाइप लोगों से मिलते-जुलते हैं।

प्रश्न 15.
बेटे द्वारा भेंट किए गए ड्रेसिंग गाउन को पहनते हुए यशोधर बाबू को कौन-सी बात चुभ गई और क्यों? (C.B.S.E. 2014. Set-II)
उत्तर
बेटे ने यशोधर बाबू को ड्रेसिंग गाउन दिया ताकि उसे पहनकर वे दूध लेने जाया करें। उन्हें ऐसा लगा था जैसे बेटे को कहना चाहिए था कि वह स्वयं दूध ले आया करेगा। यही बात यशोधरा बाबू का चुभ गई।

प्रश्न 16.
सिल्वर वैडिंग के आधार पर भूषण के चरित्र की किन्हीं दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। (AIC.B.S.E. 2014)
उत्तर
भूषण के संबंधों के प्रति कोई लगाव नहीं था वह अति कंजूस और स्वार्थी था तथा आधुनिक खयाल का था।

निबंधात्मक प्रशनोत्तर 

प्रश्न 1.
“किशनदा यशोधर बाबू के आदर्श थे।” इसी कथन के आधार पर किशनदा की जीवन-शैली की चर्चा कीजिए।
अथवा
वाई०डी०पंत का आदर्श कौन था? उसके व्यक्तित्व की तीन विशेषताएँ लिखिए। (A.L. C.B.S.E. 2014, Set-I)
उत्तर
‘किशनदा एक संवेदनशील, परिश्रमी एवं संस्कारी व्यक्ति थे। वे पहाड़ से आकर दिल्ली में नौकरी करते थे। वे सारी उम्र अविवाहित रहे। पहाड़ी स्थानों से आने वाले बेरोजगार युवक उनके यहाँ रुककर काम की तलाश किया करते थे। यशोधर बाबू भी कम उम्र में अल्मोड़ा से आए और किशनदा के यहाँ रहने लगे थे। चूंकि यशोधर बाबू की उम्र अभी नौकरी के लायक नहीं थी इसलिए जब तक उसकी उम्र नौकरी के लायक होती उन्होंने किशनदा के यहाँ रसोइया की नौकरी की।

फिर किशनदा ने उन्हें अपने कार्यालय में नौकरी लगवाई थी। संवेदनशील किशनदा का घर सबके लिए खुला था। वे सारी उम्र दूसरों के लिए कार्य करते रहे। जब किशनदा सेवानिवृत्त हो गए तब किसी ने भी उनको अपने यहाँ ठहरने के लिए एक कमरा तक नहीं दिया था। यशोधर बाबू भी मजबूर थे क्योंकि क्वार्टर में उनके परिवार के लिए भी पूरी जगह नहीं थी। फिर भी किशनदा को जब कभी भी अवसर मिलता वे यशोधर बाबू का पूरा ध्यान रखते थे।

वे सदा काम करने में विश्वास करते थे। वे स्वयं बताते हैं कि किस तरह उन्होंने जवानी में पचासों किस्म की खुराफात की है। जैसे-ककड़ी चुराना, गर्दन मरोड़कर मुर्गा मार देना, पीछे की खिड़की से कूद कर सेकिंड शो सिनेमा देख आना भी। इस प्रकार किशनदा एक चंचल प्रकृति के व्यक्ति थे। किशनदा का बुढ़ापा संकटों में बीता। सेवानिवृत्ति के कुछ वर्ष वे राजेंद्र नगर में किराये के मकान में रहे। फिर वे अपने गाँव चले गए। कुछ साल बाद वहाँ उनकी मृत्यु हो गई।

जब यशोधर बाबू ने उनकी मृत्यु का कारण जानना चाहा तो किसी ने यही कहा कि ‘जो हुआ होगा’ यानी कि ‘पता नहीं क्या हुआ।” यशोधर बाबू के लिए यह उत्तर काफ़ी नहीं था। परंतु वे चाहकर भी किशनदा के अंतिम दिनों के बारे में कुछ नहीं जान पाए। परंतु यह सत्य है कि यशोधर बाबू के जीवन पर किशनदा की जीवन-शैली का अत्यधिक प्रभाव था।

प्रश्न 2.
यशोधर बाबू को अपने परिवार के सदस्यों से किस प्रकार की शिकायतें हैं ? वर्णन करें।
अथवा
अपने निवास के पास पहुँचकर बाई० डी० पंत को क्यों लगा कि वे किसी गलत जगह पर आ गए हैं? वे घर जाकर अंधेरे में क्यों दुबके रहते हैं ? (A.I. C.B.S.E. 2012)
उत्तर
यशोधर बाबू को अपने परिवार के प्रत्येक सदस्य से शिकायतें हैं। उनका बड़ा बेटा एक विज्ञापन संस्था में नौकरी करता है। यशोधर बाबू को यही समझ नहीं आता कि उसका साधारण बेटा यह असाधारण नौकरी कैसे पा गया है। वे सोचते है कि डेढ हजार की नौकरी हमें अब रिटायरमेंट के पास पहुंच कर मिली है, शुरू में ही डेढ़ हजार रुपया देने वाली नौकरी में जरूर कुछ पेंच होगा। उनका दूसरा बेटा दूसरी बार आई० ए० एस० को परीक्षा देने की तैयारी कर रहा है।

यशोधर बाबू को शिकायत है कि जब यह पिछले वर्ष ‘एलाइड सर्विसेज’ की सूची में, माना चाहे इसका स्थान काफी नीचे था, तब इसने उस नौकरी को ज्वाइन क्यों नहीं किया था। यशोधर बाबू का तीसरा बेटा स्कॉलरशिप लेकर अमेरिका चला गया है। उन्हें बेटे का अमेरिका चला जाना भी समझ में नहीं आ रहा था। उनकी एक ही बेटी है जो अभी शादी नहीं करवाना चाहती। यशोधर बाबू बेटी की इसी बात से दुःखी हैं कि क्यों वह सभी प्रस्तावित पर अस्वीकार करती चली जाती है। बेटी अक्सर यशोधर बाबू को यह धमकी देती रहती है कि अगर आपने मेरी शादी की बात शुरू की तो वह डॉक्टरी की उच्चतम शिक्षा के लिए अमेरिका चली जाएगी।

वे अपने बच्चों की तरक्की से वश तो हैं परंतु वे अनुभव भी करते हैं कि वह खुशहाली भी कैसी जो अपनों में परायापन पैदा करे। यशोधर बाबू को अपनी पत्नी से भी शिकायत है क्योंकि वह अपने बच्चों की नई दुनिया में पूरी तरह रच-बस गई है। पली की यह बात बुरी लगती है कि वह बिना बाजू की ब्लाउज पहनती है, रसोई से बाहर भात-दाल खाती है, ऊँची होल वाली सैंडल पहनती है तथा हॉठों पर लिपस्टिक लगाती है। पत्नी की बुढ़ापे में यह आदतें यशोधर बाबू को बुरी लगती है, इसीलिए वे अपने घर में होकर भी उसे अपना घर नहीं मान पाते।

प्रश्न 3.
यशोधर बाबू के चरित्र की विशेषताएं लिखिए। (Delhi C.B.S.E. 2016 Ser IA.. 2016 Set-in.C.B.S.E.2010, 2011 Set-1, 2012 Set-1, 2014 Set-I, II,III, C.B.S.E. Outside Delhi 2013, Set-1)
उत्तर
(i) कर्मठ एवं परिश्रमी-यशोधर बाबू एक कर्मठ एवं मेहनती व्यक्ति है। वे दस्तर में पूरा समय काम करते हैं। घर का बहुत-सा काम वे स्वयं करते हैं। सब्जी लाना, दूध लाना, राशन लाना तथा दूसरे अन्य काम भी उन्हें ही करने पड़ते हैं परंतु वे इन सभी कामों को करना अपना कर्तव्य समझते हैं।

(ii) संवेदनशील-बोधर बाबू एक संवेदनशील व्यक्ति हैं। वे रिश्तों के प्रति संवेदनशील एवं भावुक है। जब किशनदा को कोई अपने यहाँ नहीं ठहराता तो उन्हें बहुत बुरा लगता है। चूंकि घर में बच्चे और पत्नी का उनके साथ मतभेद है इसलिए वे पर देर से लौटते हैं। उन्हें इस बात का दुःख है कि बच्चे उनकी कदर नहीं करते है।

(iii) परंपरावादी-यशोधर बाबू परंपराओं और मर्यादाओं में विश्वास करते हैं। उन्होंने अपना घर नहीं बनाया क्योंकि वे चाहते है कि सेवानिवृत्त होने के पश्चात वे भी अपने पैतृक गांव लौट जाएंगे इसलिए दिल्ली जैसे महंगे शहर में घर बनाने का कोई फायदा नहीं है, जबकि परिवार के सभी सदस्य उनकी इस बात को एक बड़ी भूल मानते हैं।

(iv) संस्कारी-यशोधर बाबू संस्कारी व्यक्तित्व के हैं। वे रिश्ते-नाते बनाए रखने में विश्वास रखते है। वे अपनी बहन को मिलने अहमदाबाद इसलिए जाना चाहते हैं कि उनके जीजा जनार्दन जी आजकल बीमार हैं। वे चाहते हैं कि उनके बच्चे भी रिक्तों के प्रति संवेदनशील बनें।

Online Education for Comparative Development Experiences of India and its Neighbours Class 12 Important Extra Questions Economics Chapter 10

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Online Education for Class 12 Economics Chapter 10 Important Extra Questions Comparative Development Experiences of India and its Neighbours

Comparative Development Experiences of India and its Neighbours Important Extra Questions Very Short Answer Type

Question 1.
Name the largest democracy of the world.
Answer:
India is the largest democracy of the world.

Question 2.
When did China announce its first Five Year Plan?
Answer:
China announced its first Five Year Plan in 1953.

Question 3.
What was the objective of the Great Proletarian Cultural Revolution introduced by Mao?
Answer:
Under the Great Proletarian Cultural Revolution, students and professionals were sent to work and learn from the countryside.

Question 4.
What are the government-owned enterprises known in China?
Answer:
The government owned enterprises are known as State Owned Enterprises SOEs in China.

Question 5.
When were reforms initiated in Pakistan?
Answer:
Reforms were initiated in 1988 in Pakistan.

Question 6.
Which country is the most populated in the world?
Answer:
China is the most populated country in the world.

Question 7.
Arrange India, China and Pakistan in terms of their HDI ranks.
Answer:
The three nations are arranged in terms of their HDI ranks
(i) China
(ii) India
(iii) Pakistan

Question 8.
Which sector contributes the most in the India’s GDP?
Answer:
Sendee sector contributes the most in the India’s GDP.

Question 9.
What is the density of population in India, Pakistan and China?
Answer:
The density of population in India, Pakistan and China is 441, 245 and 146 persons per sq. km. respectively.

Question 10.
Which country has largest share of poor among India, China and Pakistan?
Answer:
India has the largest share of poor among the three countries.

Question 11.
List any two problems which China faced prior to the introduction of reforms in 1978.
Answer:
Problems faced by China prior to the introduction of reforms in 1978 were:
(i) Slow pace of growth
(ii) Lack of modernisation under the Maoist rule

Question 12.
Where did India borrow from to correct its balance of payments crisis.
Answer:
India borrowed from the IMF and World Bank to correct its balance of payments crisis.

Comparative Development Experiences of India and its Neighbours Important Extra Questions Short Answer Type

Question 1.
Write a brief note on the commune system in China.
Answer:
Commune system was started in the rural areas of China, under which people collectively cultivated lands. Commune lands were divided into small plots. These plots were allocated to individual households for cultivation, not ownership. Households were allowed to keep all income from the land after paying specified taxes. In 1958, there were 26,000 communes covering almost all the farm population. The commune system resulted in more equitable distribution of food grains in China.

Question 2.
State the factors which created a conducive environment for new investments in Pakistan.
Answer:
Following factors created conducive environment for new investments in Pakistan:
(i) Adoption of green revolution
(ii) Shift of the orientation of nationalisation policy to denationalisation and encouragement to private sector
(iii) Financial support from western nations
(iv) Growing remittances from Pakistani workers in the Middle-east

Question 3.
What were the problems faced by the Great Proletarian Cultural Revolution in China?
Answer:
GLF campaign faced many problems. These were:
(i) A severe drought caused havoc in China, which killed around 30 million people.
(ii) Russia had conflicts with China. As a result, Russia withdrew its professionals who were sent to China to help in the industrialisation process.

Question 4.
What are special economic zones? Why were these established in China?
Answer:
Special Economic Zones (SEZs) are regions that are granted special economic policies and flexible governmental measures. Such policies and measures provide special tax incentives to foreign investment institutions. SEZs were created by the People’s Republic of China to attract and utilize foreign capital investments.

Question 5.
Compare China with India and Pakistan on the basis of demographic trends.
Answer:
The table below shows the comparison of China with India and Pakistan on the basis of demographic trends (2015):

Country Estimated Population (in million) Annual Growth of Population (%) Density
(per sq. km)
India 1311 1.2 441
China 1371 0.5 146
Pakistan 188 2.1 245

It is clear from the table that although China ranks first in population in the world, its population growth rate is much less than that of India. Density of population in China is also less than India and Pakistan. That day is not far behind when India will overtake China in world population.

Question 6.
Compare the position of India with China and Pakistan on the basis of sectoral development.
Answer:
Sectoral comparison of India, China and Pakistan is shown in the table below:

Contribition to GDP (2015-17)
Sector India China Pakistan
Agriculture 17 9 25
Industry 30 43 21
Service 53 48 54
Total 100 100 100

Sectoral contribution of India and Pakistan stands on the same ground. Service sector contributes significantly towards India’s and Pakistan’s GDP, followed by industrial sector. On the contrary, the industrial and services sectors contribute nearly equally in China’s GDP.

The process of economic growth has led to a tremendous shift in the sectoral share of output and employment. All three nations have undergone structural transformation from primary to industrial and service sectors.

Question 7.
Critically assess pre and post-reform period in China.
Answer:
Pre-reform period
(i) There was massive establishment of infrastructure in the areas of education and health
(ii) Extensive land reforms were introduced to bring about changes in the ownership of land holdings and encourage equity.
(iii) Development of small enterprises was promoted on a large scale.

Post-reform period
(i) Reforms in agriculture brought about prosperity to a vast number of poor people.
(ii) Reforms created conditions for the subsequent phenomenal growth in rural industries.
(iii) Strong support base was built up for more reforms.

Question 8.
State the outcome of reforms in Pakistan.
Answer:
The reform process led to worsening of all the economic indicators as stated below:
(i) The growth rate of GDP and its sectoral constituents have fallen in the 1990s compared to 1980s.
(ii) The official data of Pakistan indicates that the proportion of poor in 1960s was more than 40 per cent. It declined to 25 per cent in 1980s, which again started rising in 1990s.

Question 9.
Discuss the sources of foreign exchange in Pakistan.
Answer:
The sources of foreign exchange in Pakistan include:
(i) remittances from Pakistani workers in the Middle-east;
(ii) payment in exchange for exports of highly volatile agricultural products; and
(iii) loans from foreign countries.

Comparative Development Experiences of India and its Neighbours Important Extra Questions Long Answer Type

Question 1.
Give a brief account of developmental path of India, China and Pakistan.
Answer:
India, Pakistan and China have followed almost similar path for development. All the three nations started towards their developmental path at the same time. India and Pakistan became independent nations in 1947 while People’s Republic of China was established in 1949.

India announced its first Five Year Plan for 1951-56, Pakistan announced its first five year plan in 1956 and China announced its First Five Year Plan in 1953. India and Pakistan adopted similar strategies such as creating a large public sector and raising public expenditure on social development.

China was the first among the three nations to adopt reforms in its agricultural and industrial sectors. All the three countries had similar growth rates and per capita incomes till the 1980s.

Question 2.
Bring out the comparison between the economic growth of India, China and Pakistan.
Answer:
The comparison between the economic growth of India, China and Pakistan is discussed below:
(i) National Income: The national income of China in 2017 was $12,206.5 billion. The national income of India in the same year was $2,597.5 billion and that of Pakistan was only $321.6 billion. Thus, in terms of national income, China’s position is much better than India and Pakistan, In this context, we can say that India’s position in comparison with Pakistan is much better.

(ii) Gross National Income in PPP (Purchasing Power Parity): GNI of China in PPP in the year 2017
(Comparative Development Experiences of India and Its Neighbours ) was $23,241.5 billion. The GNI of India in PPP in the same year was $9,448.7 billion and that of Pakistan was only $1,148.4 billion. Thus, in terms of GNI in PPP also, China’s position is much better than India and Pakistan.

(iii) Per Capita Income: Human Development Report, 2018 depicts that the per capita income of China is $ 15,309 while that of India and Pakistan are $6,427 and $5,035 respectively. Although India and Pakistan are at par in terms of per capita income, China is far ahead of both of these countries.

(iv) Percentage Growth of GDP per Capita: In the year 2017, percentage growth of GDP per capita in China was about 6.3 per cent per annum. In India, it was about 5.4 per cent while that in Pakistan it is only 3.7 per cent. China’s position in terms of per capita growth is much better than India and Pakistan.

Question 3.
Assess the performance of India, China and Pakistan over the last three decades.
Answer:
The last three decades, have taken India, China and Pakistan to different levels.
(i) India: India’s performance has been moderate with its democratic institutions. However, a majority of India’s population is still dependent on agriculture. Infrastructure lacks in many parts of the country. More than one-fourth of its population lives below the poverty line. The level of living is yet to be raised

(ii) Pakistan: The Pakistan economy has slowed down due to political instability, over-dependence on remittances and foreign aid along with volatile performance of the agriculture sector. The devastating earthquake of 2005 resulted in an enormous loss to life: and property, Recovering from this calamity was a great challenge for Pakistan. However, It is making efforts to improve: the situation by maintaining high rates of GDP growth.

(iii) China: China has been successful in raising the level of growth along with alleviation of poverty. China has used the market system to create additional social and economic opportunities for its people. However, lack of political freedom and its implications for human rights are still major concerns in China.

Comparative Development Experiences of India and its Neighbours Important Extra Questions HOTS

Question 1.
Write a short note on:
(i) ASEAN
(ii) BRIC
Answer:
(i) ASEAN: The ASEAN – Association of Southeast Asian Nations – was formed in 1967 by Indonesia, Malaysia, the Philippines, Singapore, and Thailand to promote political and economic cooperation and , regional stability. Brunei and Vietnam joined ASEAN in 1984 and 1995 respectively. The ASEAN comprises of three pillars:

  • Political-Security Community
  • Economic Community
  • Socio-Cultural Community

(ii) BRIC: BRIC is an acronym for the economies of Brazil, Russia, India and China. It had been speculated that by 2050, these four economies would be wealthier than most of the current major economic powers. According to the BRIC theory, China and India will become the world’s dominant suppliers of manufactured goods and services, respectively, while Brazil and Russia will become the world’s dominant suppliers of raw materials.

Online Education for Class 12 Hindi Important Questions Aroh Chapter 14 पहलवान की ढोलक 

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Online Education for पहलवान की ढोलक Class 12 Important Extra Questions Hindi Aroh Chapter 14

प्रश्न 1.
प्रस्तुत कहानी के आधार पर मलेरिये और हेजे की विभीषिका का चित्रण कीजिए।
उत्तर
प्रस्तुत कहानी में संपूर्ण गाँव मलेरिये और हैसे का शिकार था। एक ओर ये महामारियाँ अपना तांडव मचा रही थीं; तो दूसरी ओर रात्रि का गहन अंधकार लोगों के हृदय को दहला देता था। इस विभीषिका से भयभीत होकर संपूर्ण गाँव एक शिशु के समान थर-थर काँपता था। बाँस-फूस की झोंपड़ियों में चारों ओर सनापन और अंधेरा छाया हुआ था। गाँव प्रायः सुना हो गया था। घर के घर खाली हो गए थे। प्रतिदिन दो-तीन लाशें गाँव से निकलती थीं। दिन में पक्षियों के कलरव हाहाकार और लोगों के रोने के बावजूद उनके चेहरों पर थोड़ी-सी चमक दिखाई देती थी; लेकिन रात होते ही लोग अपनी-अपनी झोपड़ियों में सुन्न होकर मुस जाते थे। लोग इतने डर जाते थे कि माताएँ दम तोड़ रहे अपने बच्चे को बेटा कहकर पुकारने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाती थीं।

प्रश्न 2.
लुट्टन सिंह पहलवान का चरित्र-चित्रण कीजिए।
उत्तर
‘पहलवान की ढोलक’ फनीश्वरनाथ रेणु द्वारा रचित एक आंचलिक कथा है। लुट्टन सिंह पहलवान इस कहानी का केंद्र बिंदु है। उसके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं10

(i) व्यक्तित्व-लद्दन सिंह पहलवान का वास्तविक नाम लट्टन सिंह था। ‘पहलवान’ उसके नाम में बाद में जड़ा। वह लंबा चोगा तथा अस्त-व्यस्त पगड़ी बाँधता था। लुट्टन सिंह अपने माता-पिता की इकलौती संतान था। उसके माता-पिता नौ वर्ष की अवस्था में उसे अकेला छोड़कर स्वर्ग सिधार गए थे। सौभाग्यवश उसकी बचपन में ही शादी हो गई थी। अतः उसका पालन-पोषण उसकी विधवा सास ने किया। लुट्टन पहलवान के दो बेटे थे।

(ii) साहसालुटन सिंह पहलवान अत्यंत साहसी था। वह सुडौल और हट्टा-कट्टा था। वह प्रत्येक परिस्थिति का डटकर सामना करता था। वह कभी घबराता नहीं था। अपने साहस के बल पर उसने प्रसिद्ध पहलवान चाँद सिंह को हरा दिया था। महामारी फैलने के कारण जब रात्रि की विभीषिका से सारा गाँव शिशुओं की तरह थर-थर काँपता था, तब लुन सिंह अकेला सारी रात ढोलक बजाया करता था। यह उसके साहस का प्रत्यक्ष प्रमाण था।

(iii) भाग्यहान-लुट्टन सिंह साहसी होने पर भी भाग्यहीन था। बचपन में नौ वर्ष की अवस्था में उसे छोड़कर उसके माता-पिता चल बसे; उसकी सास ने उसे पाला-पोसा। बाद में उसके दोनों बेटे भी काल का शिकार हो गए। जिस वीरता के बलबूते वह श्यामनगर का राज-पहलवान बना था, राजा की मृत्यु के बाद वह पद भी उसे छोड़ना पड़ा।

(iv) निडर-लुट्टन सिंह एक निडर पुरुष था। जब सारा गाँव महामारी के कारण भयभीत होकर अपनी झोपड़ियों में गम हो जाता था, तब अकेला लुट्टन सिंह रात्रि के सन्नाटे में निडरता से अपना ढोल बजाया करता था। श्यामनगर के दंगल में भी वह चाँद सिंह जैसे प्रसिद्ध पहलवान के साथ लड़ते हुए नहीं डरा। राजा के मना करने पर भी उसने निडरता से चाँद सिंह के साथ कश्ती की तथा अंत में उसे हराया। पहलवान को दंगल में हराना ही उसका निडरता का उदाहरण है।

सहयोगी-लुट्टन सिंह पहलवान होने के साथ-साथ एक संवेदनशील व्यक्ति भी था। वह दुख-सुख में सभी गाँववालों का साथ देता था। महामारी में जब गाँव में कहर मचा हुआ था, तब वह लोगों में जीने की उमंग पैदा करने के लिए रात में ढोल बजाया करता था। दिन में वह घर-घर जाकर अपने पड़ोसियों और गाँववालों का हाल-चाल पूछकर उन्हें धैर्य देता था।

प्रश्न 3.
प्रस्तुत कहानी पहलवान की ढोलक’ में भारत पर इंडिया के छा जाने की समस्या को किस के माध्यम से उद्घाटित किया है?
उत्तर
लेखक ने भारत पर इंडिया के छा जाने की समस्या को श्यामनगर के राजा श्यामानंद की मृत्यु के बाद नए विलायती राजा द्वारा व्यवस्था को बदलने के रूप में उद्घाटित किया है। श्यामनगर का पहला राजा लोक-संस्कृति का शौकीन था, इसलिए वह प्रतिवर्ष दंगल और कुश्ती का आयोजन करवाता था। उसने लुट्टन सिंह पहलवान की वीरता को देखकर उसे राज परिवार का पहलवान नियुक्त कर दिया था। उसका सारा खर्च भी राजा के खजाने से चलता था।

लेकिन राजा की मृत्यु के पश्चात वहाँ एक नया विलायती राजा। उसने आते ही दंगल को घोड़ों की रेस में बदल दिया तथा लुट्टन सिंह को दिया जाने वाला सम्मान व खर्च बंद करवा दिया। उसे लोक-संस्कृति बिल्कुल भी पसंद नहीं थी, इसलिए उसने अपने राज्य में विलायती संस्कृति को फैलाने का प्रयास किया। इसके परिणामस्वरूप धीरे-धीरे राज व्यवस्था बदलकर नए स्वरूप में ढल गई और लोक-संस्कृति विलुप्त होने लगी। अंततः भारत पर इंडिया का साम्राज्य छाने लगा।

प्रश्न 4.
रात्रि की विभीषिका को कौन भंग करती थी और कैसे?
उत्तर
रात्रि की विभीषिका को पहलवान की ढोलक भंग करती थी। पहलवान रात से लेकर प्रात:काल तक ढोलक को एक गति से बजाता रहता था। उससे ‘चट्-धा गिड़-धा…चट्-धा, गिड़-धा’ का स्वर निकलता रहता था।

प्रश्न 5.
लुट्टन सिंह मेला देखने कहाँ गया और उसने वहाँ क्या किया?
उत्तर
लुट्टन सिंह मेला देखने श्यामनगर गया। वह पहलवानों की कुश्ती और दांव-पेंच से बहुत प्रभावित हुआ। उससे प्रेरित होकर उसने बिना कुछ सोचे-समझे दंगल में ‘शेर के बच्चे’ के नाम से प्रसिद्ध चाँद सिंह पहलवान को चुनौती दे दी।

प्रश्न 6.
‘पहलवान की ढोलक’ कहानी के संदेश को स्पष्ट कीजिए। (Delhi C.B.S.E. 2016)
उत्तर
पहलवान की ढोलक फणीश्वरनाथ रेणु द्वारा रचित एक प्रमुख आंचलिक कहानी है। इसके माध्यम से लेखक ने नि:स्वार्थ भाव से देश-सेवा का संदेश दिया है। लुट्टन सिंह की ढोलक की आवाज़ पूरे गाँववालों में धैर्य, साहस और स्फूर्ति प्रदान करती थी। रात्रि की विभीषिका में तथा सन्नाटे को ललकार के सामने चुनौती पैदा कर देती थी। जब पूरा गाँव महामारी के कारण मलेरिये और हैजे से त्रस्त होकर अधमरा, निर्बल और निस्तेज हो गया था तब इस भयंकर वातावरण में ढोलक की आवाज़ गाँववालों को संजीवनी प्रदान किया करती थी।

उपचाराधीन और पथविहीन लोगों में संजीवनी शक्ति भरती थी। बच्चे, जवान और बूढों की आँखों के आगे दंगल का दृश्य पैदा कर देती थी। ढोल की आवाज सुनकर शक्तिहीन शिराओं में बिजली-सी दौड़ पड़ती थी। मरते हुए प्राणियों को भी आँख मूंदते समय कोई तकलीफ़ नहीं होती थी तथा लोग मृत्यु से भी नहीं डरते थे। इसे सुनकर लोगों के मन में जीने की नई उमंग जागृत हो जाती थी।

प्रश्न 7.
राजा साहब ने लुट्टन को क्यों सहारा दिया था? अंत में उसकी दुर्गति होने का क्या कारण था? (A.I.C.B.S.E. 2016)
उत्तर
राजा साहब ने लुट्टन को इसलिए सहारा दिया था क्योंकि उसने श्यामनगर के दंगल में सुप्रसिद्ध पहलवान चाँदसिंह को हरा दिया था। इसके बाद राजा ने उसे राज पहलवान घोषित कर दिया था। अंत में राजा की मृत्यु के बाद विलायती राजा आया। जिसने कुश्ती को बंद करके घोड़ों की रेस आदि खेलों को प्राथमिकता दी। उसने लुट्टन सिंह को भी राज पहलवान के पद से हटा दिया। इसके कारण लुट्टन के जीवन में दुर्गति हुई।

प्रश्न 8.
‘पहलवान की ढोलक पाठ का एक संदेश यह भी है कि लोककलाओं को संरक्षण दिया जाना चाहिए। अपने विचार लिखिए। (A.I. 2016, Set-II)
उत्तर
लेखक ने इस कहानी में भारत पर इंडिया के छा जाने की समस्या को श्यामनगर के राजा श्यामानंद के बदलने पर नए विलायती राजा के श्यामनगर का राजा बनने की व्यवस्था के प्रतीक रूप में उद्घाटित किया है। यहाँ श्यामनगर का राजा लोक संस्कृति का शौकीन था इसलिए वह वहाँ प्रतिवर्ष दंगल और कुश्ती का आयोजन करवाया करता था।

उसने लुट्टन सिंह पहलवान की वीरता को देखकर भी उसे राज परिवार का पहलवान नियुक्त कर दिया था तथा लुट्टन सिंह का सारा खर्च भी राजा के खजाने से चलता था लेकिन उसकी मृत्यु के पश्चात वहाँ एक नया विलायती राजा आया तो उसने आते ही दंगल को घोड़ों की रेस में बदल दिया तथा लुट्टन सिंह को भी दिया जाने वाला सम्मान और खर्च बंद करा दिया। उसे लोक संस्कृति बिल्कुल भी पसंद नहीं थी।

इसलिए उसने अपने राज्य में विलायती संस्कृति को फैलाने का प्रयास किया। जिसके परिणामस्वरूप धीरे-धीरे राज व्यवस्था बदलकर नए स्वरूप में ढल गई और लोक संस्कृति विलुप्त होने लगी। इस प्रकार इस पाठ से हमें यह संदेश भी मिलता है कि लोककलाओं को भी संरक्षण दिया जाना चाहिए।

प्रश्न 9.
‘पहलवान की ढोलक’ कहानी के आधार पर ग्रामीणों की गरीबी और असहायता पर टिप्पणी कीजिए। (Outside Delhi 2017, Set-II)
उत्तर
‘पहलवान की ढोलक’ कहानी में लेखक ने ग्रामीणों की गरीबी एवं असहायता का मार्मिक चित्रण किया है। गाँव में गरीबी से युक्त घास-फूस की झोपड़ियाँ चारों तरफ छाई प्रतीत होती हैं। पूरा गाँव गरीबी के आतंक से जूझ रहा है। लोग अपनी दो जून की रोटी के लिए भी तरस रहे हैं। यही कारण है कि जब गाँव में मलेरिया एवं हैजे की महामारी फैल गई तो पूरा का पूरा गाँव खाली हो गया। गाँव में महामारी तांडव मचाने लगी।

इस समय पूरा गाँव असहाय प्रतीत हो रहा था। रात्रि की विभीषिका से भयभीत होकर लोग घास-फूस की झोंपड़ियों में दुबक जाते थे। दिन में पक्षियों के कलख, हाहाकार से गाँव वालों के चेहरों पर थोड़ी-सी चमक दिखाई देती थी। किंतु रात होते ही वह फुर हो जाती थी। गाँव में प्रतिदिन दो-तीन लाशें निकलती थीं।

महत्वपूर्ण गद्यांशों के अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

1. जाड़े का दिन। अमावस्या की रात-ठंडी और काली। मलेरिया और हैजे से पीड़ित गाँव भयात शिशु की तरह थर-थर काँप रहा था। पुरानी और उजड़ी बाँस-फूस की झोंपड़ियों में अंधकार और सन्नाटे का सम्मिलित साम्राज्य! अँधेरा और निस्तब्धता!

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
1. उपर्युक्त गद्यांश के लेखक और पाठ का नाम लिखिए।
2. इस गद्यांश में लेखक किन दिनों का चित्रण किया है?
3. गाँव किन-किन बीमारियों से पीड़ित था?
4. मलेरिया और हैजा से पीड़ित गाँव किसके समान काँप रहा था?
5. गाँव की झोंपड़ियाँ कैसी थीं? वहाँ का वातावरण कैसा था?
उत्तर
1. उपर्युक्त गद्यांश के लेखक का नाम फणीश्वर नाथ रेणु तथा पाठ का नाम ‘पहलवान की ढोलक’ है।
2. इस गद्यांश में लेखक ने जाड़े के दिनों की अमावस्या की काली व ठंडी रात का चित्रण किया है।
3. गाँव मलेरिया और हैजे की भयानक बीमारियों से पीड़ित था।
4. मलेरिये और हैजे से पीड़ित गाँव भयात शिशु के समान थर-थर काँप रहा था।
5. गाँव की झोंपड़ियाँ बाँस-फूस से बनी हुई पुरानी और उजड़ी हुई थीं। वहाँ के वातावरण में चारों ओर अंधकार और सन्नाटे का साम्राज्य था।

2. अंधेरी रात चुपचाप आँसू बहा रही थी। निस्तब्धता करुण सिसकियों और आहों को बलपूर्वक अपने हृदय में ही दबाने की चेष्टा कर रही थी। आकाश में तारे चमक रहे थे। पृथ्वी पर कहीं प्रकाश का नाम नहीं। आकाश से टूटकर यदि कोई भावुक तारा पृथ्वी पर जाना भी चाहता तो उसकी ज्योति और शक्ति रास्ते में ही शेष हो जाती थी। अन्य तारे उसकी भावुकता अथवा असफलता पर खिलखिलाकर हँस पड़ते थे।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
1. प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने किसका मानवीकरण किया है?
2. लेखक ने अमावस्या की रात का कैसे मानवीकरण किया है?
3. अंधेरी रात के सौंदर्य का वर्णन कीजिए।
4. आकाश के तारे किस पर खिलखिलाकर हँसते हैं और क्यों?
उत्तर
1. प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने अमावस्या की अंधेरी रात निस्तब्धता तथा तारों का मानवीकरण किया है।
2. लेखक कहता है कि अमावस्या की अँधेरी रात चुपचाप आँसू बहा रही थी। वह करुण सिसकियों और आहों को बलपूर्वक अपने हृदय ___में ही दबाने की चेष्टा कर रही थी। इस तरह लेखक ने रात का मानवीकरण किया है।
3. लेखक के अनुसार चारों ओर अंधकार और सन्नाटे का वातावरण था। रात चुपचाप आँसू बहा रही थी। अँधेरी रात में आकाश में तारे चमक रहे थे। पृथ्वी पर कहीं भी प्रकाश का नामोनिशान नहीं था।
4. अँधेरी रात में आकाश से टूटकर जब कोई भावुक तारा पृथ्वी पर जाना चाहता है, तो उसकी ज्योति और शक्ति बीच रास्ते में ही समाप्त हो जाती है। इसी को देखकर आकाश के अन्य तारे खिलखिलाकर हँस पड़ते हैं, क्योंकि वह भावुक तारा असफल हो जाता है।

3. रात्रि अपनी भीषणताओं के साथ चलती रहती और उसकी सारी भीषणता को, ताल ठोककर, ललकारती रहती थी-सिर्फ पहलवान की ढोलक! संध्या से लेकर प्रातःकाल तक एक ही गति से बजती रहती-‘चट्-धा, गिड़-धा,…चट्-धा गिड़-धा!’ यानी आ जा भिड़ जा, आ जा, भिड़ जा!’- बीच-बीच में-‘चटाक्-चट्-धा, चटाक्-चट्-धा!’ यानी ‘उठाकर पटक दे! उठाकर पटक दे!!’
(C.B.S.E. Outside Delhi 2013, Set-I)

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
1. रात्रि किसके साथ चलती थी?
2. पहलवान की ढोलक किसे ललकारती थी?
3. पहलवान की ढोलक रात्रि के किस रूप को ललकारती थी? कैसे?
4. पहलवान की ढोलक कब-से-कब तक बजती थी?
उत्तर
1. रात्रि अपनी भीषणताओं के साथ चलती थी।
2. पहलवान की ढोलक रात्रि की भीषणता को ललकारती थी।
3. पहलवान की ढोलक रात्रि के भीषण रूप को ललकारती थी। वह इस रूप को ताल ठोककर ललकारती थी।
4. पहलवान की ढोलक संध्या से लेकर प्रातःकाल तक बजती रहती थी।

4. शांत दर्शकों की भीड़ में खलबली मच गई-‘पागल है पागल, मरा-ऐं! मरा-मरा!’… पर वाह रे बहादुर! लुट्टन बड़ी सफाई से आक्रमण को सँभालकर निकलकर उठ खड़ा हुआ और पैंतरा दिखाने लगा। राजा साहब ने कुश्ती बंद करवा कर लुट्टन को अपने पास बुलवाया और समझाया। अंत में, उसकी हिम्मत की प्रशंसा करते हुए, दस रुपए का नोट देकर कहने लगे-‘जाओ, मेला देखकर घर जाओ।’

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
1. शांत दर्शकों की भीड़ में खलबली क्यों मच गई?
2. श्यामनगर के राजा को क्या प्रिय लगता था?
3. राजा साहब ने बीच में ही कुश्ती क्यों रुकवा दी?
4. राजा साहब ने लुट्टन सिंह पहलवान को कितने रुपए दिए और क्यों?
उत्तर
1. एक बार श्यामनगर में मेला लगा हुआ था। लुटट्न सिंह भी वहाँ मेला देखने गया। वहाँ दंगल हो रहा था, जिसमें शेर के बच्चे के नाम से प्रसिद्ध चाँद सिंह पहलवान आया हुआ था। दूर-दूर तक उसकी बराबरी का कोई पहलवान नहीं था, लेकिन ढोल की धुन से जोश में आकर लुट्टन सिंह ने उस शेर के बच्चे को चुनौती दे दी। इसी चुनौती को देखकर शांत दर्शकों की भीड़ में खलबली मच गई।
2. श्यामनगर के राजा को शिकार करना प्रिय लगता था। इसके साथ-साथ उसे दंगल का भी बहुत शौक था।
3. राजा साहब चाँद सिंह पहलवान को जानते थे। वे उसके दाव-पेंच पहले भी देख चुके थे। चाँद सिंह शेर के बच्चे की उपाधि प्राप्त कर चुका था, लेकिन लुट्टन सिंह पहली बार ही दंगल में लड़ा था। राजा साहब को डर था कि चाँद सिंह अनुभवहीन लुट्टन सिंह को चुटकियों में मसल डालेगा। इसलिए उन्होंने कुश्ती बीच में रुकवा दी।
4. राजा साहब ने लुट्टन सिंह पहलवान को दस रुपये का नोट दिया, क्योंकि उसने ‘शेर के बच्चे’ नामक बलशाली पहलवान से लड़ने की हिम्मत की थी।
5. भीड़ अधीर हो रही थी। बाजे बंद हो गए थे। पंजाबी पहलवानों की जमायत क्रोध से पागल होकर लुट्टन पर गालियों की बौछार कर रही थी। दर्शकों की मंडली उत्तेजित हो रही थी। कोई-कोई लुट्टन के पक्ष से चिल्ला उठता था-“उसे लड़ने दिया जाए।”

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
1. भीड़ अधीर क्यों हो रही थी?
2. बाजे क्यों बंद हो गए थे?
3. दर्शकों की भीड़ उत्तेजित क्यों हो रही थी?
4. लुट्टन के पक्ष वाले चिल्लाकर क्या कह रहे थे?
उत्तर
1. लुट्टन सिंह पहलवान द्वारा ‘शेर के बच्चे’ नामक प्रसिद्ध पहलवान को ललकारने की बात सुनकर भीड़ अधीर हो रही थी।
2. लुट्टन सिंह पहलवान की घोषणा सुनते ही बाजे बंद हो गए थे।
3. दर्शकों की भीड़ इसलिए उत्तेजित हो रही थी, क्योंकि वह प्रसिद्ध पहलवान चाँद सिंह के साथ लुट्टन सिंह के लड़ने को उसकी मूर्खता ___मान रही थी।
4. लुट्टन सिंह के पक्ष वाले चिल्लाकर कह रहे थे कि उसे लड़ने दिया जाए।

6. उसी दिन से लुट्टन सिंह पहलवान की कीर्ति दूर-दूर तक फैल गई। पौष्टिक भोजन और व्यायाम तथा राजा साहब की स्नेह-दृष्टि ने उसकी प्रसिद्धि में चार चाँद लगा दिए। कुछ वर्षों में ही उसने एक-एक कर सभी नामी पहलवानों को मिट्टी सुंघाकर आसमान दिखा दिया।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
1. लुट्टन सिंह की कीर्ति किस दिन से दर-दर तक फैल गई?
2. लुट्टन सिंह पहलवान प्रसिद्ध क्यों हो गया?
3. लुट्टन सिंह की प्रसिद्धि में किसने चार चाँद लगा दिए?
4. लुट्टन सिंह ने चाँद सिंह को हराने के बाद क्या किया?
5. उपर्युक्त गद्यांश में आए मुहावरों के अर्थ लिखिए-चार चाँद लगाना, मिट्टी सँघाना।
उत्तर
1. जिस दिन लुट्टन सिंह ने श्यामनगर के दंगल में नामी और प्रसिद्ध पहलवान चाँद सिंह को हराया, उसी दिन से उसकी कीर्ति दूर-दूर तक फैल गई।
2. लुट्टन सिंह पहलवान इसलिए प्रसिद्ध हुआ, क्योंकि उसने ‘शेर के बच्चे’ नाम से प्रसिद्ध चाँद सिंह पहलवान को हराया था।
3. लुट्टन सिंह की प्रसिद्धि में पौष्टिक भोजन, व्यायाम तथा राजा साहब की स्नेह-दृष्टि ने चार चाँद लगा दिए।
4. लुट्टन सिंह ने चाँद सिंह को हराने के बाद कुछ ही वर्षों में एक-एक कर सभी नामी पहलवानों को मिट्टी सुंघाकर आसमान दिखा दिया।
5. चार चाँद लगाना-सम्मान में वृदिध होना, मिट्टी सुंघाना-हरा देना।

7. मेलों में वह घुटने तक लंबा चोगा पहने, अस्त-व्यस्त पगड़ी बाँधकर मतवाले हाथी की तरह झूमता चलता। दुकानदारों को चुहल करने की सूझती। हलवाई अपनी दुकान पर बुलाता-“पहलवान काका! ताजा रसगुल्ला बना है, जरा नाश्ता कर लो!”

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
1. मेलों में लुट्टन सिंह क्या पहनता था?
2. मेलों में वह कैसे चलता था?
3. उसे देखकर दुकानदारों को क्या करने की बात सूझती?
4. हलवाई अपनी दुकान पर बुलाकर उसे क्या कहते थे?
उत्तर
1. मेलों में लुट्टन सिंह घुटने तक लंबा चोगा तथा अस्त-व्यस्त पगड़ी पहनता था।
2. मेलों में वह मतवाले हाथी की तरह झूमता हुआ चलता था।
3. उसे देखकर दुकानदारों को उसके साथ चुहल करने की बात सूझती थी।
4. हलवाई अपनी दुकान पर बुलाकर उसे कहते थे कि पहलवान काका! ताजा रसगुल्ला बना है, जरा नाश्ता कर लो।

8. अकस्मात गाँव पर यह वज्रपात हुआ। पहले अनावृष्टि, फिर अन्न की कमी, तब मलेरिया और हैजे ने मिलकर गाँव को भूनना शुरू कर दिया। गाँव प्रायः सूना हो चला था। घर के घर खाली पड़ गए थे। रोज दो-तीन लाशें उठने लगीं। लोगों में खलबली मची हुई थी। दिन में तो कलरव, हाहाकर तथा हृदय-विदारक रुदन के बावजूद भी लोगों के चेहरे पर कुछ प्रभा दृष्टिगोचर होती थी, शायद सूर्य के प्रकाश में सूर्योदय होते ही लोग काँखते-कूँखते-कराहते अपने-अपने घरों से बाहर निकलकर अपने पड़ोसियों और आत्मीयों को ढाढ़स देते थे।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
1. अकस्मात गाँव पर कैसा वज्रपात हुआ?
2. गाँव के लोगों में खलबली क्यों मच गई?
3. भयंकर बीमारी से ग्रस्त गाँव का दृश्य हृदय विदारक था? कैसे?
4. दिन में गाँव के लोगों के चेहरों पर प्रभा क्यों दृष्टिगोचर होती थी?
5. उक्त गाँव के दिन और रात के दृश्य में क्या अंतर था?
उत्तर
1. अकस्मात गाँव में पहले अनावृष्टि हुई और फिर अन्न की कमी हो गई। उसके बाद मलेरिये और हैजे ने मिलकर गाँववालों को अपनी चपेट में ले लिया।
2. गाँव में जब मलेरिया और हैजा फैल गया, तो उसने सारे गाँव को अपना शिकार बना डाला। इन बीमारियों के कारण गाँव में घर के घर खाली हो गए। प्रायः प्रतिदिन दो-तीन लाशें उठने लगी थीं। इसी भयानक दृश्य को देखकर लोगों में खलबली मच गई।
3. भयंकर बीमारी से ग्रस्त गाँव में दिन में हृदय-विदारक दृश्य के बावजूद भी लोगों के चेहरों पर कुछ ज्योति दिखाई देती थी, लेकिन रात्रि होते ही जब लोग अपनी-अपनी झोंपड़ियों में घुस जाते थे तो यूँ की भी आवाज नहीं होती थी। माताओं को अपने दम तोड़ते पुत्र को अंतिम बार बेटा कहकर पुकारने की हिम्मत भी नहीं होती थी।
4. दिन में गाँव के लोगों के चेहरों पर प्रभा इसलिए दृष्टिगोचर होती थी, क्योंकि सूर्योदय होते ही लोग रोते-बिलखते-कराहते अपने-अपने ___घरों से बाहर निकलकर पड़ोसियों तथा आत्मीयों को धैर्य देते थे।
5. दिन में तो इस गाँव के लोगों के चेहरों पर कुछ प्रभा दिखाई देती थी; लोग रोते-बिलखते अपने पड़ोसियों को धैर्य देते थे। लेकिन रात में चहुँ ओर सन्नाटा छा जाता था; माताएँ अपने मरते हुए बच्चे को देखकर बेटा पुकारने की भी हिम्मत नहीं कर सकती थीं।

9. रात्रि की विभीषिका को सिर्फ पहलवान की ढोलक ही ललकारकर चुनौती देती रहती थी। पहलवान संध्या से सुबह तक, चाहे जिस ख्याल से ढोलक बजाता हो, किंतु गाँव के अर्धमृत, औषधि-उपचार-पथ्य-विहीन प्राणियों में वह संजीवनी शक्ति ही भरती थी। बूढ़े-बच्चे-जवानों की शक्तिहीन आँखों के आगे दंगल का दृश्य नाचने लगता था। स्पंदन-शक्ति-शून्य स्नायुओं में भी बिजली दौड़ जाती थी। (C.B.S.E. Model Q. Paper 2008)

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
1. गद्यांश के लेखक तथा पाठ का नाम बताएँ।
2. रात्रि की विभीषिका को सिर्फ पहलवान की ढोलक ही ललकारकर चुनौती देती थी, कैसे?
3. लेखक ने रात्रि को डरावनी क्यों कहा है?
4. रात्रि की विभीषिका में पहलवान की ढोलक किन प्राणियों के लिए संजीवनी का काम करती थी?
5. पहलवान की ढोलक अर्धमृत प्राणियों के लिए संजीवनी का कार्य कैसे करती थी?
उत्तर
1. इस गद्यांश के लेखक ‘फनीश्वर नाथ रेणु’ तथा पाठ का नाम ‘पहलवान की ढोलक’ है।
2. रात्रि की विभीषिका को सिर्फ पहलवान की ढोलक ही ललकारकर चुनौती देती थी, क्योंकि गाँव के अन्य सभी लोग रात्रि से भयभीत होकर अपनी झोंपड़ियों में गुम हो जाते थे। बस लुट्टन पहलवान ही अकेला पूरी रात ढोल बजाकर इधर-उधर टहलता रहता था।
3. गाँव में जब मलेरिये तथा हैजे की महामारी फैल गई, तो चारों ओर लोग मरने लगे। दिन में फिर भी लोग एक-दूसरे को ढाढ़स दे देते थे, लेकिन रात्रि में वे महामारी से भयभीत होकर अपनी-अपनी झोंपड़ी में गुम हो जाते थे। माताएँ दम तोड़ते अपने पुत्र को अंतिम बार बेटा पुकारने की भी हिम्मत नहीं कर पाती थीं। इसलिए लेखक ने रात्रि को डरावनी कहा है।
4. रात्रि की विभीषिका में पहलवान की ढोलक गाँव के अर्धमृत, औषधि-उपचार, पथ्यविहीन प्राणियों के लिए संजीवनी का काम करती थी।
5. रात्रि की विभीषिका में जब चारों ओर लोग डरकर अपनी-अपनी झोंपड़ियों में सुन्न हो जाते थे, तब पहलवान सारी रात ढोलक बजाता था। उस समय ढोलक की आवाज से बच्चों, बूढ़ों तथा जवानों की शक्तिहीन आँखों के आगे दंगल का दृश्य नाचने लगता था। उनकी स्पंदन-शक्ति-शून्य स्नायुओं में बिजली दौड़ जाती थी।

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  1. Bricks, Beads and Bones: The Harappan Civilisation Important Questions
  2. Kings, Farmers and Towns: Early States and Economics Important Questions
  3. Kinship, Caste and Class: Early Societies Important Questions
  4. Thinkers, Beliefs and Buildings: Cultural Developments Important Questions
  5. Through the Eyes of Travellers: Perceptions of Society Important Questions
  6. Bhakti-Sufi Traditions: Changes in Religious Beliefs and Devotional Texts Important Questions
  7. An Imperial Capital: Vijayanagara Important Questions
  8. Peasants, Zamindars and the State: Agrarian Society and the Mughal Empire Important Questions
  9. Kings and Chronicles: The Mughal Courts Important Questions
  10. Colonialism and the Countryside: Exploring Official Archives Important Questions
  11. Rebels and the Raj: The Revolt of 1857 and its Representations Important Questions
  12. Colonial Cities: Urbanisation, Planning and Architecture Important Questions
  13. Mahatma Gandhi and the Nationalist Movement: Civil Disobedience and Beyond Important Questions
  14. Understanding Partition: Politics, Memories, Experiences Important Questions
  15. Framing the Constitution: The Beginning of a New Era Important Questions

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FAQ’s on Important Questions for Class 12 History

Question 1.
What are the most important questions of history for Class 12 CBSE board exams?

Answer:
History is one of the most important subjects in primary and secondary education. Learning the concepts and memorizing them is a difficult task for all students but preparing the important questions of class 12 history makes you attain the best scores in the board exams.

Question 2.
How should I study history for CBSE class 12 board exams?

Answer:
First, download the NCERT Textbook from our website and start making a preparation strategy where you need to follow before the board exams and cover all the topics covered in the 12th class history syllabus. Also, prepare study notes during your preparation and revise easily at the time of annual exams.

Question 3.
How do I score 90 plus in history class 12 CBSE?

Answer:
By following the study plan and learning all easy and complex chapters one by one without any fail makes you feel confident to attempt the annual exam and score more than 90 marks. However, you should also revise all CBSE class 12 history previous year question papers and important questions.

Question 4.
Where do I obtain Class 12 History Important Questions?

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Indigo Extra Questions and Answers Important Questions Class 12 English Flamingo

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Indigo Extra Questions and Answers Short Answer Type

Indigo Class 12 Questions And Answers Question 1.
How did Rajkumar Shukla establish that he was resolute?
Answer:
Rajkumar Shukla was a peasant from Champaran. He wanted Gandhiji to come with him to accompany him to Champaran. At that time Gandhiji was very busy. But Shukla accompanied Gandhiji everywhere. Therefore, he had been described as resolute.

Indigo Questions And Answers Question 2.
How was Gandhiji treated at Rajendra Prasad’s house?
Answer:
The servants at Rajendra Prasad knew Shukla as a peasant who pestered their master to help the indigo sharecroppers. But they thought that Gandhiji belonged to some low caste. Therefore they didn’t allow him to draw water from the well.

Indigo Short Question Answer Question 3.
What were the terms of the indigo contract between the British landlords and the Indian peasants?
Answer:
The landlords compelled all tenahts to plant three twentieths or 15 per cent of their holdings with indigo and surrender the entire indigo harvest as rent. This was done by a long-term contract.

Indigo Extract Based Questions Question 4.
What did the landlords do when they know that Germany had developed synthetic indigo?
Answer:
The landlords came to know that Germany had developed synthetic indigo. Now producing natural indigo was not profitable for them. But very cunningly they hid that fact from the peasants. They instead obtained agreements from the sharecroppers to pay ‘ them compensation for being released from the 15 per cent arrangement.

Indigo Extra Question Answer Question 5.
Why did many sharecroppers sign the agreement letters willingly? What did the others do who had not signed the letters?
Answer:
The sharecropping system was irksome to the peas-ants. They signed the agreement letters willingly. Those who resisted engaged lawyers; the landlords hired thugs.

Indigo Important Questions And Answers Pdf Question 6.
Why did Gandhiji meet Secretary of the British landlord’s association? How was he treated by him?
Answer:
Gandhiji arrived Chamaparan to get the facts. Therefore he visited the Secretary of the British landlord’s association. The secretary told him that they could give no information to an outsider.

Indigo Class 12 Extra Questions Question 7.
Why did Gandhiji go to Muzzafarapur? Where did he stay there?
Answer:
Muzzafarpur was enroute to Champaran. To obtain more information about sharecropping system he went there. He decided to stay at Professor Malkani’s house. He was a teacher in a government school.

Indigo Question Answers Question 8.
Why did Gandhiji chide the lawyers of Muzza-farpur?
Answer:
Gandhiji chided the lawyers for collecting big fee from the peasants. He said that he had come to the conclusion that they should stop going to courts. Taking such cases to the courts did little good. Where the peasants were so crushed and fear-stricken, law courts were useless. The real relief for them was to be free from fear.

Indigo Extra Questions Question 9.
How did the peasants of Champaran react when they came to know about the arrival of Gandhiji?
Answer:
The news of Gandhiji’s advent and of the nature of his mission spread quickly through Muzzafarpur and to Champaran. Sharecroppers from Champaran began arriving on foot and by conveyance to see their champion.

Indigo Chapter Class 12 Questions And Answers Question 10.
Why did Gandhiji feel that taking the Champaran case to the court was useless?
Answer:
Gandhiji felt that taking the Champaran case to the court was useless. Where the peasants were so crushed and fear-stricken, law courts were useless. The real relief for them was to be free from fear.

Indigo Important Questions Question 11.
How did Champaran peasants react when they came to know that a Mahatma had come to help them?
Answer:
When the Champaran peasants came to know that a Mahatma had come to help them and he was in trouble with the authorities they came in large numbers to Motihari. Thousands of them hold demon¬strations around the courthouse. The officials felt themselves helpless.

Indigo Class 12 Extra Questions And Answers Question 12.
What made the lieutenant-governor drop the case against Gandhiji?
Answer:
Thousands of peasants came in support of Gandhiji. The authorities felt that they could not control them and the condition of law and order could deteriorate. The pressure of the peasants was increasing. On the other hand, Gandhiji refuse to have any bail. Therefore the lieutenant-general dropped the case against Gandhiji.

Class 12 English Indigo Extra Questions And Answers Question 13.
Why did Gandhiji tell the court that he was involved in a ‘conflict of duties’?
Answer:
Gandhiji said in the court he was involved in ‘conflict of duties’. On the one hand, he didn’t want to set a bad example as a lawbreaker; on the other hand, he wanted to render humanitarian and national service for which he had come to Champaran.

Indigo Important Questions And Answers Question 14.
How was civil disobedience won for the first time in India?
Answer:
The judge said that he could not deliver his judgement for several days because of the overwhelming support to Gandhiji. However, he was allowed to remain at liberty. Several days later, Gandhiji received a written communication from the magistrate informing him that the Lieutenant-General had decided to drop the case against him. In this way the civil disobedience won for the first time in India.

Indigo Class 12 Short Questions And Answers Question 15.
How much did the planters ready to refund to the peasants? How did Gandhiji react to it?
Answer:
The planters wanted to prolong the dispute in some way. Therefore, they offered to refund only 25 per cent of the money they extracted illegally from the peasants. Gandhiji at once agreed to it thus breaking the deadlock.

Indigo Class 12 Important Questions Question 16.
Why did Gandhiji agree for only 25 per cent refund?
Answer:
Gandhiji knew that the planters wanted to prolong the dispute in some way or the other. But he proved too smart for them. He at once agreed to their offer of 25 per cent refund. In this way the planters had to part with some of their money and also their prestige.

Indigo Chapter Question Answer Question 17.
What social work did Gandhiji do in the villages of Champaran?
Answer:
Gandhiji opened primary schools there. Many of his disciples came to volunteer their services. Health condition of the place was miserable. Gandhiji got a doctor to volunteer his services for six months.

Indigo Lesson Short Questions And Answers Question 18.
Why was Gandhiji against taking the help of Charles Freer Andrews?
Answer:
Charles Freer Andrews became Gandhiji’s disciple at Champaran. The lawyers thought that it would be good for them if they had an Englishman with them. But Gandhiji was deadly against it. He said taking help of an Englishman would show the weakness of their heart.

Indigo Extra Questions And Answers Question 19.
Why is Rajkumar Shukla described as being ‘resolute’?
Answer:
Rajkumar Shukla was a peasant from Champaran. He wanted Gandhiji to come with him to accompany him to Champaran. At that time Gandhiji was very busy. But Shukla accompanied Gandhiji everywhere. Therefore, he had been described as resolute.

Extra Questions Of Indigo Class 12 Question 20.
Why do you think that the servants thought Gandhiji to be another peasant?
Answer:
Gandhiji wore very simple clothes. His complexion was dark and he was thin. In this way, his appear-ance matched a peasant of that days. Therefore, the servants thought Gandhiji to be another peasant.

Extract Questions From Indigo Class 12 Question 21.
List the places that Gandhiji visited between his first meeting with Shukla and his arrival at Champaran.
Answer:
First of all Gandhiji went to Patna at Rajendra Prasad’s house. From there he went to Muzzafarpur to obtain more information about the sharecropping system. There he stayed at Professor Malkani’s house and from there he went to Champaran.

Indigo Short Questions And Answers Question 22.
What did the peasants pay the British land¬lords as rent? What did the British now want instead and why? What would be the impact of synthetic indigo on the prices of natural indigo?
Answer:
The peasants worked on large estates owned by the British planters. The landlords compelled all the peasants to crop three twentieths or 15 per cent of their holdings with indigo and surrender the entire indigo harvest as rent. The planters came to know that the Germany had developed synthetic indigo.

Producing natural indigo was not profitable. The price of the synthetic indigo would be much less than the natural indigo. But they hid this information from the share¬croppers. Instead they demanded compensation from the peasants to release them from this system.

Question 23.
The events in this part of the text illustrate Gandhiji’s method of working. Can you identify some instances of his method and link them to his ideas of satayagraha and non-violence?
Answer:
Gandhiji believed in the path of truth and non-vio-lence. He did nothing that is morally wrong. He fol- . lowed the path of non-violence against the British. Gandhiji’s path was the path of satayagraha, it means protest for truth by adopting non-violent methods. One of the biggest examples of it is the Dandi March.

Question 24.
Why did Gandhiji agree to a settlement of 25 per cent refund to the farmers?
Answer:
The British planters Wanted some excuse to prolong the dispute between them and the sharecroppers. They offered only 25 per cent refund. They thought that perhaps Gandhiji would ask for full refund. But Gandhiji agree to their offer and broke the dead lock. For him the amount of refund was not important. The landlords had been obliged to part with some of their money and also prestige. Before that they thought themselves above law. As a result, the planters abandoned their estates, which were reverted to the peasants.

Question 25.
How did the episode change the plight of the peasants?
Answer:
The episode of Chamapran had a great effect on the peasants. They saw they had rights and defenders. They learned courage. Also, the British planters abandoned their estates, which were reverted to the peasants.

Question 26.
Why do you think Gandhi considered the Champaran episode to be a turning-point in his life?
Answer:
The episode of Champaran proved that the Indians couldn’t be harassed in their own country. It gave courage to the normal Indians against the dreaded power of the British. Gandhiji thought that it to be a small problem. But due to this incident he decided to urge the departure of the British. It was here where the civil disobedience was first time succeeded. In this way the episode of Champaran proved to be a turning point in Gandhiji’s life.

Question 27.
What was the attitude of the average Indian 1 in smaller localities towards advocates of ‘home rule’?
Answer:
In smaller localities the people were afraid to show sympathy for advocates of home rule. They were so crushed and frightened by the dreaded power of the British that it was impossible for them to support even the idea of home rule.

Question 28.
How do we know that ordinary people too con-tributed to the freedom movement?
Answer:
In the given text it was only due to the support of ordinary people that the sharecroppers of Champaran could get justice. When Gandhiji was arrested in Motihari, the ordinary people flocked on the roads in large numbers, as a result, the government had to drop the case against Gandhiji. This Champaran episode was just a glimpse of the freedom movement. Thus, from this episode, we can gauge the role of ordinary people in the freedom movement.

Indigo Extra Questions and Answers Long Answer Type

Question 1.
Who was Rajkumar Shukla? What did he want from Gandhiji?
Answer:
Rajkumar Shukla was a peasant from Champaran. He visited Gandhiji in 1942 at his ashram in Sevagram, in Central India. He wanted that Gandhiji should accompany him to his village in Champaran district. He described to Gandhiji about himself and his district. He told Gandhiji the peasants of Champaran were sharecroppers. Rajkumar Shukla was illiterate but resolute.

He had came to the Congress session to complain about the injustice of the landlord system in Bihar, and somebody told him to speak to Gandhiji. At that time, Gandhiji was very busy. Shukla accompanied him everywhere in India. For weeks he never left Gandhiji’s side.

Impressed by the sharecropper’s tenacity and story Gandhiji said, “I have to be in Calcutta on such-and-such a date. Come and meet me and take me from there.” Shukla reached at the appointed spot in Calcutta when Gandhiji arrived. He waited till Gandhiji was free. Then Gandhiji went with him to Patna by train.

Question 2.
What information did Gandhiji get about the sharecropping system in Champaran?
Answer:
The chief commercial crop of Champaran was indigo. The British landlords compelled all the ten-ants to plant 15% of their holdings with indigo and surrender the entire indigo harvest as rent. This was done by a long-term contract. Then the land-lords came to know that the Germany had developed synthetic indigo. Now producing natural indigo was not at all profitable. Very cunningly the British landlords obtained agreements from the sharecroppers to pay them compensation for being released

from the 15% agreement. Many sharecroppers signed it willingly while the others engaged lawyers. The landlords hired thugs. Meanwhile, the information about synthetic indigo reached the illiterate peasants. Who had paid the compensation wanted their money back.

Question 3.
Describe Gandhiji’s visit at Muzzafarpur.
Answer:
Gandhiji decided to go to Muzzafarpur, which was en route to Champaran. He wanted to obtain more information about the conditions there. He stayed for two days in the home of Professor Malkani who was a teacher in a government school. It was not an ordinary thing those days for a government professor to harbour a man like him. In smaller localities, the Indians were afraid to show sympathy for the advocates of home-rule. The news of the advent of Gandhiji spread quickly to Champaran and Muzzafarpur. Sharecroppers in large number came to see their champion.

Gandhiji talked to the lawyers about the court cases of the sharecroppers. They brief him about the cases and also reported him about the size of their fees. Gandhiji chided the lawyers for collecting big fee from the sharecroppers. He said that it was useless to go to the courts when the peasants were so crushed and fear-stricken.

Question 4.
Describe the incident related to Motihari.
Or
How can you say that the civil disobedience was succeeded first time in modern India?
Answer:
Gandhiji visited British official commissioner of Trihut division. He tried to bully Gandhiji and ordered him to leave Trihut. Gandhiji proceeded to Motihari, the capital of Champaran. A large number of people greeted him at the railway station. A report came that a peasant had been maltreated in a nearby village. Gandhiji decided to go there. Gandhji was a given a notice to leave Champaran immediately. Gandhiji signed the receipt and wrote on it that he would disobey the order.

As a result Gandhiji was ordered to present in the court the next day. The next morning a lot of peasants had gathered in the town of Motihari to support Gandhiji. The officials had to seek Gandhiji’s help to control the crowd. However they got the clear message that the Indians couldn’t be ordered in their own country. The government was baffled. They wanted to postpone the trial.

Gandhiji protested against it. He told the court that he was not a lawbreaker, but he had duties towards his countrymen. In the end the judge said he would not deliver any judgement for several days. Gandhiji was allowed to remain at liberty. After a few days the case against him was dropped. The civil disobedience was suc¬ceeded first time in modern India.

Question 5.
Why is the Champaran episode considered to be the beginning of the Indian struggle for Independence?
Answer:
Gandhiji thought that the problem of the sharecroppers could be solved within a few days. But he stayed there for months. The landlords were compelled to refund some of the money they extracted from the peasants illegally and also they had to part with their prestige. Eventually they abandoned their estates which were reverted to the peasants.

The peasants came to know that they had rights and the defender of their rights. Before that the planters had behaved as lords above the law. The government was compelled to bow before Gandhiji and the case against him was dropped. The civil disobedience was succeeded for the first time in India. Therefore the Champaran episode is considered as the beginning of the Indian struggle for Independence.

Question 6.
Gandhiji’s loyality was not a loyalty to abstractions; it was loyalty to living human beings. Why did Gandhiji continue his stay in Champaran even after indigo sharecropping disappeared?
Answer:
Gandhiji was able to win the battle of Champaran for the poor sharecroppers. They got their land back from the British landlords. But Gandhiji continued his stay there. Gandhiji saw the cultural and social backwardness in the Champaran villages and wanted to do something about it. Many of his disciples joined him in this noble cause. His youngest son and his wife also arrived there from the ashram. Primary schools were opened in six villages.

Kasturbai taught the ashram rules on personal cleanliness and community sanitation.Health conditions were miserable. Gandhiji got a doctor volunteer. He offered his services for six months. Three medicines were available castor oil, quinine and sulphur ointment. Anybody who showed a coated tongue was given a dose of castor oil; anybody with malaria fever received quinine and castor oil; anybody with skin eruptions received ointment with castor oil.

Gandhiji’s loyalty was not a loyalty to abstractions; it was a loyalty towards human beings. His politics was intertwined with the practical day-to-day problems of the millions.

Question 7.
The Champaran episode was a turning point in Gandhiji’s life. Elucidate.
Answer:
Gandhiji considered the Champaran episode a turning point in his life. His revolutionary vision inspired many people. The episode was linked with day to day problems of the poor peasants of Champaran. They were compelled by the British landlords to crop Indigo in 15% of their total holdings and surrender the whole harvest as rent. When they discovered that synthetic Indigo had been developed by Germany, they no longer needed the harvest of the peasants. But they hid this fact from the peasants.

Instead they demanded compensation from the poor peasants to release them from the 15% agreement. Some signed willingly, while others engaged lawyers. The landlords hired thugs. Gandhiji helped the poor peasants by protesting and civil disobedience. At last, he was successful in freeing the peasants from the exploitation. Many other movements took place after t that. It also meant the victory of civil disobedience for the first time in India.

Question 8.
Why was Gandhiji against taking help from Charles Freer Andrews? What values of life are conveyed by this?
Answer:
Early in the Champaran action, Charles Freer Andrews, the English pacifist became Gandhiji’s devoted follower. He came to bid Gandhiji farewell before leaving for his duty to the Fiji Islands. Gandhiji’s lawyer friends thought it would be a good idea for Andrews to stay at Champaran and help them. Andrews was willing if Gandhiji agreed.

But Gandhiji strongly opposed it. He said to have Mr. Andrews on their side only because he happened to be an Englishman is wrong. It would show only the weakness of their spirit. They were fighting for a just cause and they should believe in their strength. This incident showed that self-reliance and self-help are most important to achieve any goal.

Question 9.
How was Gandhi able to influence lawyers? Give instances.
Answer:
Gandhiji was able to influence the lawyers in several ways. First he came to know about the size of fee they collected from the peasants to fight their cases in court. He chided them for that. He told them that taking such cases to courts were not good when the peasants were so crushed and fear-stricken. When it was feared that Gandhiji might be put to prison they consulted among themselves.

They realised that if Gandhiji who was totally stranger, and yet ready to go to prison for the sake of peasants; it would be shameful for them to go homes since they were not only the residents of the adjoining districts but also had claimed to help the peasants. Therefore they decided to follow Gandhiji in jail in pairs. In Champaran an Englishman, Charles Freer Andrews became Gandhiji’s disciple.

The lawyers throught that it would be of great help to them if Andrews supported them. But Gandhiji told that it would show only the weakness of their soul to seek help of Mr Andrews only because he happened to be an Englishman. They should learn to be self-reliant.

Question 10.
“Freedom from fear is more important than legal justice for the poor”. Do you think that the poor of India are free from fear after Independence?
Answer:
The episode of Champaran represents the exploitation of the poor Indian peasants by the British planters. At that time India was under British rule. But even after seventy years of Independence there is Champaran everywhere in India. The poor are still exploited by the bureaucrats, moneylenders and politicians. The moneylenders charge unimaginably high rates of interest from the farmers.

No wonder the incidents of suicides by the farmers are on the rise. Our constitution has given equal rights to all Indians. But in fact the poor can’t enjoy any of the rights given to them by the constitution. They are remembered only at the time of elections. Though they had got political freedom yet this freedom is shameful.

Indigo Extra Questions and Answers Extract Based

Read, the following paragraph and answer the questions that follow:

(Para-1)

Under an ancient arrangement, the Champaran peas-ants were sharecroppers. Rajkumar Shukla was one of them. He was illiterate but resolute. He has come to the Congress session to complain about the injustice of the landlord system in Bihar, and somebody had probably said, “Speak to Gandhi.”

Questions :
(a) What was an ancient arrangement ?
(b) Who was Rajkumar Shukla ?
(c) Why Rajkumar Shukla had come to Congress session ?
(d) What, somebody had said to Rajkumar Shukla ?
Answers:
(a) An ancient arrangement was sharecropping. The Champaran peasants were share croppers.
(b) Rajkumar Shukla was an illiterate but resolute peasant from Champaran, Bihar.
(c) Rajkumar Shukla had come to Congress session to complain about the injustice of the landlord system in Bihar.
(d) Somebody had said to Rajkumar Shukla, “Speak to Gandhi.”

(Para-2)

The news of Gandhi’s advent and of the nature of his mission spread quickly through Muzzafarpur and to Champaran. Sharecroppers from Champaran began arriv-ing on foot and by conveyance to see their Champion. Muzzafarpur lawyers called on Gandhi to brief him; they frequently represented peasant groups in court; they told him about their cases and reported the size of their fee.

Questions :
(a) What was the news at Muzzafarpur ?
(b) How and why did the sharecroppers reach from Champaran ?
(c) What was the role of Muzzafarpur’s lawyers ?
(d) Name the chapter and the writer.
Answers:
(a) The news of Gandhi’s advent and of the nature of his mission was the news at Muzzafarpur.
(b) Sharecroppers from Champaran reached on foot and by Conveyance to see their Champion.
(c) Muzzafarpur’s lawyers were frequently representating peasant groups in court.
(d) ‘Indigo’ is the chapter written by ‘Louis Fischer’.

(Para-3)

A report came in that a peasant had been maltreated in a nearby village. Gandhi decided to go and see; the next morning he started out on the back of an elephant. He had not proceeded far when the police supritendent’s messanger overtook him and ordered him to return to town in his carriage. Gandhi complied. The messenger drove Gandhi home where he served him with an official notice to quit Champaran immediately. Gandhi signed a receipt for the notice and wrote on it that he would disobey the order.
The consequence, Gandhi received a summons of appear in court the next day.

Questions :
(a) What report came and what did Gandhi decide ?
(b) What happened when Gandhi was on the way to the nearby village ?
(c) What did the messenger do with Gandhi ?
(d) What was Gandhi’s reaction to the notice and what consequence had he to face ?
Answers:
(a) A report came in that a peasant had been maltreated in a nearby village. Gandhi decided to go and see.
(b) When Gandhi was on the way to the nearby village, the police supertendent’s messenger overtook him and ordered him to return to town in his carriage.
(c) The messenger served Gandhi with an official notice to quit Champaran immediately.
(d) Gandhi signed a receipt for the notice and wrote on it that he would disobey the order. In consequence, Gandhi received a summons to appear in court the next day.

(Para-4)

What about the injustice to the sharecroppers, Gandhi demanded. The lawyers withdrew to consult. Rajendra Prasad has recorded the upshot of their consultations : “They thought, amongst themselves, that Gandhi was totally a stranger, and yet he was prepared to go to prision for the sake of the peasants : If they, on the other hand, being not only residents of the adjoining districts but also those who claimed to have served these peasants, should go home, it would be shameful desertion.”

Questions :
(a) What did Gandhi demand to the lawyers ?
(b) What was the reaction of the lawyers ?
(c) What was the conclusion of their consultations ?
(d) What would be- shameful desertion ?
Answers:
(a) Ghandi demanded the lawyers about the injustice to the sharecroppers.
(b) The lawyers withdrew to consult.
(c) According to their consultations : they, if would go home being local residents, would surely be shameful and a defeat to them in that war of injustice.
(d) If they should go home, claiming to have served those peasants, it would be shameful desertion.

(Para-5)

They thought he would demand repayment in full of the money which they had illegally and deceitfully extorted from the sharecroppers. He asked only 50 per cent. “There he seemed adamant,” writes Reverend J.Z. Hodge, a British missionary in Champaran who observed the entire episode at close range. “Thinking probably that he would not give way, the representative of the planters offered to refund to the extent of 25 per cent, and to his amazement Mr. Gandhi took him at his word, thus breaking the deadlock.”

Questions :
(a) What landlords had done with the sharecroppers ?
(b) Who was Reverend J. Z. Hodge ?
(c) What did the representative of the planters offer to refund ?
(d) How did Mr. Gandhi break the deadlock ?
Answers:
(a) Landlords had illegally and deceitfully extorted money from the sharecroppers.
(b) Reverend J. Z. Hodge was a British missionary in Champaran who observed the entire episode at close range.
(c) Representative of the planters offered to refund to the extent of 25 per cent only.
(d) Mr. Gandhi broke the deadlock by getting agree to the offer of 25 per cent refund by British planters.

(Para-6)

Gandhi never contented himself with large political or economic solutions. He saw the cultural and social backwardness in the Champaran villages and wanted to do something about it immediately. He appealed for teachers. Mahadev Desai and Narhari Parikh, two young men who had just joined Gandhi as disciples, and their wives, volunteered for the work. Several more came from Bombay, Poona and other distant parts of the land. Devdas, Gandhi’s youngest son, arrived from the ashram and so did Mrs. Gandhi. Primary schools were opened in six villages. Kasturbai taught the ashram rules on personal cleanliness and community sanitation.

Questions :
(a) What did Gandhi observe in the Champaran villages ?
(b) Whom did Gandhi appeal and why ?
(c) From Gandhi’s family, who came to Champaran ?
(d) What did Kasturbai do to the people of Champaran ?
Answers:
(a) Gandhi, in Champaran villages observed the cultural and social backwardness and wanted to do something immediately
(b) Gandhi appealed Mahadev Desal and Narhari Parikh, two young teachers, to volunteer for the work.
(c) Devdas, Gandhi’s youngest son and Mrs. Gandhi Casturbai came to Champaran.
(d) Kasturbal, Gandhi’s wife taught the ashram rules on personal cleanliness and community sanitation to the people of Champaran.

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Macroeconomics Class 12 Important Questions

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  2. National Income Accounting Important Questions
  3. Money and Banking Important Questions
  4. Determination of Income and Employment Important Questions
  5. Government Budget and the Economy Important Questions
  6. Open Economy Macroeconomics Important Questions

Indian Economic Development Class 12 Important Questions

  1. Indian Economy on the Eve of Independence Important Questions
  2. Indian Economy 1950-1990 Important Questions
  3. Liberalisation, Privatisation and Globalisation: An Appraisal Important Questions
  4. Poverty Important Questions
  5. Human Capital Formation In India Important Questions
  6. Rural Development Important Questions
  7. Employment: Growth, Informalisation and Other Issues Important Questions
  8. Infrastructure Important Questions
  9. Environment and Sustainable Development Important Questions
  10. Comparative Development Experiences of India and its Neighbours Important Questions

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FAQ’s on Economics Class 12 Important Questions

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Where do I find Economics Class 12 Important questions chapter-wise?

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The Rattrap NCERT Text Book Questions and Answers

The Rattrap Think as you read 

Question 1.
From where did the peddler get the idea of the world being a rattrap?
Answer:
The poor rattrap peddler struggled for his existence. He could not make both ends meet so he had to resort to both begging and petty thievery. Despite this, his condition was deplorable. Thinking of his miserable plight and his job, as he plodded on, he was struck by the idea that the whole world was nothing but a big rattrap. It baited people in the form of riches and joys, shelter and food, heat and clothing, just as the rattrap offered cheese and pork. Similarly, the moment one was tempted by the material joys, the world closed in on him and trapped him.

Question 2.
Why was he amused by this idea?
Answer:
The world had never been kind to him, so it gave him great joy to think ill of it. It became a treasured pastime for him to think of people he knew who had let themselves be caught in the dangerous trap, and of others who were still moving around the bait, ready to be trapped.

Question 3.
Did the peddler expect the kind of hospitality that he received from the crofter?
Answer:
When the peddler reached the little grey cottage by the roadside, he knocked on the door to ask for shelter for the night. He was surprised because, instead of the sour faces which ordinarily met him, this time he was welcomed by the owner, an old man.

Question 4.
Why was the crofter so talkative and friendly with the peddler?
Answer:
The crofter was an old man without wife or child. He was happy to get someone to talk to, in his loneliness. So, he welcomed the peddler. The old man was just as generous with his confidences as with his porridge and tobacco.

Question 5.
Why did he show the thirty kronor to the peddler?
Answer:
The old man was confiding and trusting. He told the peddler that he was no longer able to work as a day labour, and was supported by what he earned by selling his cow’s milk. The old man showed him the thirty kronor that he had received as payment from the creamery, to convince the peddler.

Question 6.
Did the peddler respect the confidence reposed in him by the crofter?
Answer:
No, the peddler did not respect the confidence reposed in him by the crofter because later, he went up to the window, smashed a pane and got hold of the pouch with the thirty kronor. He took the money and thrust it into his own pocket and went away.

Question 7.
What made the peddler think that he had indeed fallen into a rattrap?
Answer:
At first, the peddler was pleased with the money in his pocket; but he later got lost in the forest. All at once, he recalled his thoughts about the world being a rattrap. He felt that his end was near and that he had been fooled by a bait of thirty kronor.

Question 8.
Why did the ironmaster speak kindly to the peddler and invite him home?
Answer:
The owner of Ramsjo iron mill came into the forge on one of his night rounds of inspection and saw the peddler. The ironmaster walked close up to him, looked him over very carefully and mistook him for his friend, Nils Olof, and invited him home.

Question 9.
Why did the peddler decline the invitation?
Answer:
The peddler did not reveal his identity because he thought that the ironmaster might give him a couple of kronor. But, to go along up to the manor house and be received as his friend scared the peddler. He had stolen the thirty kronor from the old man and he felt that going up to the manor house would make him vulnerable. He merely wanted to sleep in the forge and then quietly sneak away.

Question 10.
What made the peddler accept Edla Willmansson’s invitation?
Answer:
When Edla Willmansson invited him, she looked at him compassionately. She also assured him that he would be allowed to leave just as freely as he came. She requested him to stay with them over Christmas Eve. She said this in such a friendly manner that the rattrap peddler felt reassured. Hence, he accepted Edla Willmansson’s invitation.

Question 11.
What doubts did Edla have about the peddler?
Answer:
When Edla Willmansson looked compassionately at the peddler, she noticed that the man was afraid. She at once knew that he had either stolen something or else had escaped from jail.

Question 12.
When did the ironmaster realise his mistake?
Answer:
When the ironmaster saw the stranger the day after, clean and well dressed, he realized his mistake. The valet had bathed him, cut his hair and shaved him. He was wearing clothes that belonged to the ironmaster. The ironmaster frowned as he realized that in the dimly-lit furnace, he had made a mistake. As the stranger stood there in daylight, it was impossible to mistake him for an old acquaintance.

Question 13.
What did the peddler say in his defence when it was clear that he was not the person the ironmaster had thought he was?
Answer:
When the ironmaster realized his mistake, the stranger made no attempt to hide or pretend. He said that it was not his fault as he had never pretended to be anything but a poor trader. He had pleaded and begged to be allowed to stay in the forge. He offered to put on his rags and go away.

Question 14.
Why did Edla still entertain the peddler even after she knew the truth about him?
Answer:
Edla entertained the peddler even after she knew the truth about him. She said that the whole year long the peddler roamed about without anyone welcoming him. He was forever afraid of being arrested and cross-examined. So, she felt compassion for the homeless tramp and wanted him to enjoy a day of peace with them. She also said that it was their mistake and they ought not to chase away a human being whom they had invited home and had promised Christmas cheer.

Question 15.
Why was Edla happy to see the gift left by the peddler?
Answer:
Edla gave a little cry of joy on seeing the gift, a small rattrap with three wrinkled ten kronor notes. Her deed of kindness had helped the poor peddler atone for his sin. He did not want her to be embarrassed in the Christmas season because of a thief. He said that the rattrap was a Christmas present from a rat who would have been caught in the world’s rattrap, had he not received kindness and honour from her. Ella felt satisfied at having helped someone rise above his faults.

Question 16.
Why did the peddler sign himself as Captain von Stahle?
Answer:
The peddler signed himself as Captain von Stahle because Edla had treated him as if he were a captain. He took away from the incident, the transient honour of having being treated like a captain. It inspired him to do good, and let go of his thieving ways.

The Rattrap Understanding the text

Question 1.
How did the peddler interpret the acts of kindness and hospitality shown by the crofter, the ironmaster, and his daughter?
Answer:
The peddler was granted shelter in a little cottage by the roadside. The crofter gave him food and trusted him by investing confidence in him. However, the peddler betrayed his trust and stole his money. Later, as he was lost in the forest, he felt trapped, and judged the kindness and money that came his way as nothing but a bait to trap him. He was also suspicious of the kindness showed to him by the ironmaster and his daughter. The peddler was convinced that any kindness shown to him was just a bait to trap him.

Question 2.
What are the instances in the story that show that the character of the ironmaster is different from that of his daughter in many ways?
Answer:
Despite a close relationship, the character of the ironmaster is shown to be different from that of his daughter. The ironmaster spoke to the peddler for some time but continued to mistake him for his friend Captain von Stahle, whereas, his observant daughter, who had never met his friend, within minutes, observed that either the peddler had stolen something or else he had escaped from jail.

When the ironmaster discovered that the peddler was not his friend, he wanted to hand him over to the sheriff but his daughter was more compassionate. She said that the peddler roamed without being welcomed anywhere. So, she wanted him to enjoy a day of peace with them. She also said that it was their mistake and they ought not to chase away a human being whom they had asked to come to their home and whom they had promised Christmas cheSr.

At church, they learnt that the rattrap peddler had robbed the crofter. The ironmaster wondered what all he had stolen from their cupboard and blamed the daughter for letting him in. However, she was repaid by the peddler for her trust that helped in reforming his character.

Question 3.
The story has many instances of unexpected reactions from the characters to others’ behaviour. Pick out instances of these surprises.
Answer:
The story does have many instances of unexpected reactions of the characters in response to others’ behaviour. The first was the crofter’s reaction to the peddler. Instead of the sour faces which ordinarily met him, the old man, without wife or child, was happy to get someone to talk to in his loneliness. He was very welcoming. But, the peddler, despite the hospitality, stole his money.

The second was the ironmaster, who mistook the peddler to be his friend Nils Olof, and tried to take him to his house. But, he was quick to turn his back when he realized his mistake.The third was the arrival of the ironmaster’s daughter, who realized that there was something amiss about the peddler but took him in. Even when the father and daughter found out the truth, the daughter stood by him. She wanted him to enjoy a day of peace with them.The peddler, in turn, surprised everyone when he returned his stolen booty. He honoured the trust reposed in him by Edla.

Question 4.
What made the peddler finally change his ways?
Answer:
Due to the trust and compassion shown by the ironmaster’s daughter Edla Willmansson, the peddler became a changed man. This was evident from the package he left for her before leaving. The package contained a small rattrap with three wrinkled ten kronor notes that the peddler left for her. In the rattrap, also lay a letter that revealed how he did not want her to be embarrassed in the Christmas season by a thief. He wanted her to return the money to the old man on the roadside. The rattrap was a Christmas present from him, who had been reformed and touched by the treatment he received from her.

Question 5.
How does the metaphor of the rattrap serve to highlight the human predicament?
Answer:
The peddler considered that the whole world was nothing but a big rattrap. Its only purpose was to set baits for people. It offered riches and joys, shelter and food, heat and clothing, exactly as the rattrap offered cheese and pork, and as soon as one let oneself be lured by the bait, it closed in. The peddler also told the ironmaster that the whole world was nothing but a big rattrap. All the good things that were offered were nothing but cheese rind and bits of pork, set out to drag people into trouble.

None escaped; one person falls into the trap one day and the other the next day. The only thing that could turn a person from rat-like ways was human kindness, something that he had received from Edla. Thus, in the end, the peddler left the rattrap as a Christmas present and called himself a rat who had been spared.

The metaphor of the rattrap highlights the theory of crime and punishment. Crimes, such as theft or giving in to temptation, are compared with a bait and the subsequent imprisonment in a trap. However, the human predicament forms the basis of the story where the story of the rattrap serves to bring out a lesson in moral values.

Question 6.
The peddler comes out as a person with a subtle sense of humour. How does this serve in lightening the seriousness of the theme of the story and also endearing him to us?
Answer:
The peddler has a good sense of humour and this diffuses the seriousness of the theme of the story, he also endears himself to the reader. Although he was a vagabond in pursuit of food and shelter, he found time to meditate on his philosophies and draw pleasure from the anticipated miseries of other people. He imagined people he knew to have landed in the trap and of others who were still circling around the bait.

The humour is brought out when at every occasion he lapsed into his theory of the rattrap. When his identity was discovered by the ironmaster, he said that a day would arrive when the ironmaster too might chase a big piece of pork, and get caught in the trap. He also signs off in the letter as “Captain von Stahle”, revealing how he held on to his sense of humour till the end.

The Rattrap Talking about the text

Discuss the following in groups of four. Each group can deal with one topic and present the views of the group to the whole class.

Question 1.
The reader’s sympathy is with the peddler right from the beginning of the story. Is the sympathy justified?
Answer:
The reader’s sympathy is with the peddler right from the beginning of the story for various reasons. It is justified.He is a victim of circumstances. He made rattraps with the material he got by begging in stores or at big farms. But even so, the business was not profitable. He had to resort to both begging and petty thievery for a living. His clothes were in rags, his cheeks were sunken, and hunger gleamed in his eyes. When he knocked on a door to ask for shelter at night, he was often refused and he “met sour faces”. Even when he stole the money from the crofter, he at once realized that his philosophy about the world as a rattrap had turned true for him. He had been caught with the bait of money. He regretted it and knew his own turn had come.
OR
It is not justified.
There were many who had lost their jobs. He stole money from the crofter who was hospitable to him. Secondly, he had the opportunity to tell the ironmaster of his true identity which he did not. He knew all along that if he did something wrong, he would be trapped, yet, he could not resist the bait.

Question 2.
The story also focuses on human loneliness and the need to bond with others. Discuss.
Answer:
The above statement is true for many characters in the chapters:
(a) The crofter, because of loneliness, lets the peddler in.

(b) The ironmaster at once bonded with the peddler without confirming his identity—“But of course it is you, Nils Olof!” he said. “How you do look!” and again “.. .We were just saying that it was too bad we didn’t have any company for Christmas.”

(c) Edla Willmansson sensed that all was not well, yet insisted that the peddler spend Christmas with them. When the ironmaster wanted to turn the peddler out, the daughter said, “I think he ought to stay with us today. I don’t want him to go.”

(d) The peddler, while leaving the ironmaster’s house left a message, “Written with friendship and high regard”.
The peddler was reformed by the kindness shown by Edla Willmansson. He wanted to be nice to her in return and did not want to embarrass her by his theft. He returned the stolen money, asking her to forward it to the old man. Human warmth and bonding enabled this change in him.

Question 3.
Have you known/heard of an episode where a good deed or an act of kindness has changed a person’s view of the world?
Answer:
The Bishop’s Candlesticks is one such episode that takes up on a similar theme.

The Rattrap Working with words

Question 1.
The man selling rattraps is referred to by many terms such as “peddler”, “stranger”, etc. Pick out all such references to him. What does each of these labels indicate about the context or the attitude of the people around him?
Answer:
He is referred to as a vagabond, intruder, tramp, ragamuffin and poor hungry wretch. These labels indicate the context or the attitude of the people around him. The people

  • Had no respect for him.
  • Felt he was a burden.
  • Did not care to know him or his problems.
  • Could pity him, but were not really compassionate.

Question 2.
You came across the words plod, trudge, stagger in the story. These words indicate movement accompanied by weariness. Write down five other words with a similar meaning.
Answer:
drag oneself, footslog, lumber, plod along, slog, stumble, traipse

The Rattrap Extra Questions and Answers

The Rattrap Short Answer Questions

Question 1.
What did the rattrap peddler do for a living?
Answer:
The rattrap peddler was an iron worker who lost his job to machines in an age of industrialization. Hence, he resorted to selling small rattraps of wire, and he obtained the required materials by begging. His business was not a profitable one, so he had no option but to beg and steal. His clothes were in rags, and his cheeks were sunken; he looked starved. He roamed alone like a vagabond.

Question 2.
How did the peddler get the idea of the world being a rattrap?
Answer:
The peddler struggled for his existence as selling rattraps was not a profitable business. He often resorted to begging and stealing. This led him to believe that the world was a big rattrap that sets baits for people. The moment one was tempted to reach out for the bait, the trap closed in on him.

Question 3.
Why was he amused by the idea of the rattrap?
Answer:
The peddler was amused by the idea of the rattrap because the world had been unkind to him. No one helped him; on the contrary, everyone shunned him. Hence, the peddler got joy in thinking ill of others. His treasured pastime consisted of thinking of people caught in the trap.

Question 4.
How was the crofter different from the kind of people the peddler usually met?
Answer:
The crofter was different from the kind of people the peddler usually met. The crofter invited him into his house, and unlike the usual people, he did not shun him. When the peddler went begging, the crofter offered him porridge, supper, and tobacco. He played cards with the peddler. Not only was he hospitable, but reposed a lot of trust in the peddler. He showed peddler where he kept his money.

Question 5.
Why did crofter show the thirty kronor to the peddler?
Answer:
The crofter showed the thirty kronor to the peddler because he was generous with his confidences. Moreover, he had told the peddler that he could not labour, but a cow supported him. When the peddler looked at him in disbelief, just to prove his point, he showed him the thirty kronor.

Question 6.
How did the peddler discover Ramsjo Ironworks?
Answer:
After stealing the crofter’s money, the peddler realized that he was lost. He had been walking around in the same area. Soon it became dark, and his fears and apprehensions increased. He felt he was caught in a rattrap. He sank down on the ground in gloom and dejection. When he put his head on the ground, he heard a hard, thumping sound. He was certain that the sound was produced by hammer strokes. So he mustered strength and moved in the direction of the sound.

Question 7.
What sight did the peddler see at the Ramsjo Ironworks?
Answer:
At the Ramsjo Ironworks, the peddler noticed that the master smith and his helper were sitting near the furnace. They were heating pig iron to put on the anvil. They wore nothing but a long shirt and a pair of wooden shoes. He also saw them get up every few minutes to stir the glowing mass with a long iron bar.

Question 8.
What was the blacksmith’s reaction to the peddler’s arrival at the forge?
Answer:
When the peddler entered the forge, the blacksmith failed to notice him right away as it was noisy and they were busy working. When the peddler stood close to the furnace, the blacksmith showed no reaction. It was a usual sight for the blacksmith to see vagabonds take shelter for the night at the forge. So he just glanced casually at the peddler and nodded a haughty consent, permitting him to spend the night.

Question 9.
How was the blacksmith’s reaction to the peddler different from that of the ironmaster? Why was it different?
Answer:
The blacksmith’s reaction was one of sheer indifference. He glanced casually and nodded a haughty consent. But the ironmaster noticed the tall stranger at once. He walked up to him, looked him over and called out, “Nils Olof!” The reactions were different because it was a usual sight for the blacksmith who often saw vagabonds come to spend the night there. But the ironmaster had mistaken him for his friend and hence invited him home.

Question 10.
Why did the rattrap peddler not reveal his identity to the ironmaster? Why did the peddler decline the invitation?
Answer:
The rattrap peddler realized the ironmaster’s mistake. He expected the ironmaster to give him a couple of kronor. He, however, felt discomforted to visit the ironmaster’s home with the mistaken identity. He also felt guilty having stolen thirty kronor. He felt going to the ironmaster’s house would be like throwing himself into the lion’s den. He just wanted to sleep in the forge that night and then sneak away.

Question 11.
What were the peddler’s feelings on his way to the ironmaster’s manor?
Answer:
On his way to the ironmaster’s manor, the peddler felt confidence in Edla. He followed her to the carriage. However, while travelling in the carriage, he had evil premonitions and regretted taking the crofter’s money. He could see himself in the trap. He felt he would never get out of it.

Question 12.
When the peddler was bathed and dressed, the ironmaster was not pleased. Why?
Answer:
The peddler had reached the ironmaster’s house looking like a vagabond. There, the valet helped the peddler dress. He had bathed him, cut his hair, and shaved him. The peddler was dressed in the ironmaster’s clothes. But when the peddler was bathed and dressed, the ironmaster was shocked. He then realized that this man was not his friend. In the dim light, he had mistaken him for his friend.

Question 13.
After the peddler’s identity was discovered, how did he spend the rest of his stay at the ironmaster’s house?
Answer:
After the peddler’s identity was discovered, he wondered why Edla had supported him. He sat and ate quietly. Through the morning he slept, and at noon they woke him for his share of the Christmas fare, after which he slept again. Feeling safe, he slept soundly like he had never slept before. He awoke in the evening, and after he had had his dinner, he thanked each one in the house and wished them for the night.

Question 14.
What did the ironmaster and Edla learn about the peddler at the church? How did they react?
Answer:
At the church, Edla received news of how the rattrap peddler had robbed the old crofter. The ironmaster was angry with Edla for letting the peddler stay. He was certain that the peddler might have had stolen things from the house while they were at the church. Edla was dejected, as well as embarrassed. She realized her mistake and was speechless.

Question 15.
What did the ironmaster and Edla discover when they went home?
Answer:
When ironmaster and Edla reached home, they expected the peddler to have escaped after robbing them. However, when they reached home, they discovered that the peddler had gone away, but much to their surprise, he had left a gift for Edla. The gift was a small rattrap with three wrinkled ten-kronor notes. Edla’s compassion had helped the poor peddler atone for his sin. The peddler also left a note saying he would have been caught in the world’s rattrap had he not been inspired and moved by Edla’s generosity.

The Rattrap Long Answer Questions

Question 1.
“The old man (crofter) was just as generous with his confidences as with his porridge and tobacco.” Justify.
Answer:
The crofter was as generous with his confidences as with his porridge and tobacco. It was out of a sense of hospitality that he looked after the vagabond as a guest. He had offered him porridge, supper and a big slice from his tobacco roll. After that they had played cards until bedtime. He discussed his life with the peddler and told him about his days of prosperity. He took him into confidence and told him that he earned a living by selling the milk his cow produced. The crofter had received a payment of thirty kronor. He also showed him the three ten-kronor bills and where he kept his money. The crofter was liberal with his hospitality and trust.

Question 2.
How did nature play against the peddler after he stole the crofter’s money?
Answer:
Nature seemed to penalize the peddler for stealing the crofter’s money. The peddler was initially pleased to get the money. He decided to steer away from the public highway for the fear of getting caught. So he went into the woods. The first hours of travel were easy, but later, the forest seemed like a labyrinth. The paths twisted back and forth strangely. The peddler walked on without coming to the end of the wood, He then realized that he had been walking around in the same area. At once, he recalled the rattrap theory he was baited with the thirty kronor.

Question 3.
Was the ironmaster a generous man? Why or why not?
Answer:
The ironmaster was a generous man. He mistook the rattrap peddler for an old acquaintance, Captain von Stahle, and coaxed him into going home with him. When the peddler refused, he sent his daughter to get him. He was also anxious that the peddler was looked after and comfortably dressed at his home. He also promised to try to get him a job. However, he felt cheated by the peddler once he found out his real identity.
OR
The ironmaster was not generous. He was a lonely man whose wife was dead and whose sons were abroad. He lived with his daughter. He had invited the peddler, mistaking him as an old friend, to alleviate his loneliness. Later, when he discovered his true identity, he wanted to get rid of him. In fact after discovering the truth about the peddler at the church, he was so angry and worried that he wanted to hand him over to the sheriff.

Question 4.
What kind of a girl was Edla? Give reasons for your answer.
Answer:
Edla was not pretty, but looked modest and shy. She was very hospitable and went to the forge to welcome her father’s guest. Her father was confident of her powers of persuasion and was sure that she would convince the guest to stay with them. Edla was also concerned and sensitive. She handed her big fur coat to the peddler to make him feel more comfortable and to cover his rags. She was polite and gentle.

She was, however, a keen observer. Unlike her father, she noticed that the peddler was afraid. She knew at once that either he had stolen something or had escaped from jail. She had the maturity to hide her emotions. She also assured the peddler that he would be allowed to leave just as freely as he had come. But, out of concern, she made him stay till Christmas.

Question 5.
What were the attitudes of the ironmaster and Edla toward the peddler before and after they discovered his identity?
Answer:
Before discovering the peddler’s identity, the ironmaster addressed the peddler as Nils Loft. He did not take the peddler’s reaction into account. He sensed that the peddler must have been uncomfortable because of the economic disparity between the two of them. The ironmaster also made sure that he was supplied with good meal and clothes. But once he discovered the case of mistaken identity, he immediately wanted to hand the peddler over to the sheriff. After he heard of the peddler in the church, he was furious and wondered what he had stolen from their cupboard. He blamed his daughter for letting him in.

Edla saw the peddler for the first time when she came to fetch him home. She noticed at once that the man was afraid. She guessed that he was either a thief or a runaway culprit. Despite this, she requested him to stay.

She was spontaneous and friendly, and coaxed the peddler into spending the Christmas with them. He also accepted the fur coat, and wore it over his rags. Edla expressed her surprise about his miserable plight and noticed that there was nothing to show that he was an educated man. When in the church, she realized that he was a thief; she never once expressed her fear. Her trust and compassion helped in reforming the peddler.

Question 6.
Was the case of mistaken identity the peddler’s fault?
Answer:
It was his fault.
The peddler let the ironmaster believe that he was an old acquaintance. He did so in order to get a couple of kronor from the ironmaster. He told the ironmaster that he was not doing well in life. His second chance to clear himself came when Edla came to invite him home. He kept quiet deliberately in the hope of material gain. He realized the risk of going to the manor house. Even when his identity was revealed, he behaved in a self-righteous fashion.
OR
It was not his fault.
The poor peddler stuggled to survive.
He had lost all ways of earning his livelihood and lived a life of hardship. He did not deliberately cheat them but merely kept quiet. He did try to avoid going to the iron master’s place many times, but starved as he was, and in rags, he was tempted to spend a comfortable day.

Question 7.
The story is both entertaining and philosophical. Discuss.
Answer:
The story has entertaining merit. The peddler has a pronounced sense of humour despite odds. He tends to philosophize even in the most difficult times. The reader is also kept in a ‘cliff hanging situation’ throughout the story. Every moment, the reader waits to know what would happen next. The story has entertaining moments like when the peddler’s identity is revealed after the valet had bathed him.
The philosophical message of the story is brought out in the theory of the rattrap— life is one big rattrap which closes in on an individual when he gives in to a temptation or steals or commits a crime. The story also elaborates the philosophy of second chances, stating that everyone should get another chance.

The Rattrap Value Based Question

Question 1.
The warmth of compassion extends its rays around the world, engraving mankind with its characteristic. Selma Lagerlof supports the theory of compassion in “Rattrap” which depicts the powerful and positive impact of such care. Discuss.
Answer:
The story revolves around the theory that life is one big rattrap. This implies that if one takes something wrongfully, the person will end up getting trapped in life as a consequence. The peddler felt that the whole world was a big rattrap that sets baits for people. The peddler earned his living by petty thievery. However, he turns over a new leaf when he receives compassion and trust from the ironmaster’s daughter. The protagonist believed till then in the dismal side of human nature.

His first “true” Christmas at the ironmaster’s . house egged him to change his ways and honour people’s trust in him. The story validates the concept that compassion revolves around humankind and the consideration of others. The peddler makes amends by returning the money he had previously stolen from the old man who had sheltered him. The tale also throws light on the value of second chances, stating that everyone should get another chance in life.

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Question 1.
What are the most important topics of History for Class 12 CBSE Board Exams?

Answer:
I can really understand the pressure and anxiety one goes through while preparing for boards. As far as History is concerned one can’t distinguish which all topics to study or which all to leave. Go through the Previous Year Questions so that you will have an idea on topics/questions that have the most probability to appear in CBSE Board Exams.

Question 2.
Where do I get Class 12 History 1 Mark Questions?

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Question 3.
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Question 4.
How to access Chapterwise Class 12 History One Mark Questions and Answers?

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